पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३९४

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३९० साहितवाविह-ताड़ी पंहुच के कारण ग्राहक यन्त्रका काँट। आगज पर जोरमे सामुद्रिकतार -जो तार समुद्रमें हो कर जाते हैं, वह लग कर चिह्न बना देता है। प्रेरक यन्त्रमें जमी भी बहुत मजबूत होते हैं और उस पर नाना प्रकार के परि. समबार लगा रहतो, ग्रारक यन्त्रके कागज पर इवह चानक पदार्थ चढ़े रहते हैं। सामुद्रिक तारको गठन वम हो चिह्न वा रेवाएँ आदि खाच जाती हैं। पत्तो प्रणालो इम प्रकार है,-पाँच या सात विशुद्ध तांबेके जिन स्थानों में चपहा नहीं रहता, उन स्थानों पर कार्टक तारांको एक साथ एठ कर, उमके ऊपर अपरिचालक लगते हो वैद्य तिक प्रवास चालित होता है और ताक्षणात् . कोई पदाथ मदा जाता है। फिर उन पर गुटापार्चा ग्राहक यन्त्रका कोटा कागजसे अलग हो कर को कुचुक आदि पदार्थ ४।५ बार चढ़ाये जाते हैं। अन्तमें चढ़ जाता है. फिर उम कागज पर किमी तरह का दाग उमे दोहे तार और पन्न कातरम डुबोये हुए सन नहीं पड़ता । इस प्रकार सिगडर एक बार घूम कर कुछ आटिक वारा वष्टित किया जाता है। इस प्रकारसे देर ठहरता है और कुछ बाई आर एट कर फिर घूमन . मस्थित तारक सुरक्षित हो जाने पर, फिर उसे धूना लगता है । क्रमशः रेखा या पाश्वमे यि बनता जाता तारपिन तेन्न, अलकतो आदिम परिपूर्ण उत्तम कड़हमें हैं और २० वा ३० मिनट में एक चित्र बन कर तैयार हो : डुबो लिया जाता है। जाता है। इसके बाद कागज ग्वान्न कर नित्रकारको दिया : बे-तारका तार-(Vircles, Telegraph) इस टेलि- जाता है और वह उसे देख भाल कर जहां जो कुछ कमो ग्राफ, तारको आवश्यकता नहीं, बिना तार के हो खबर रह जाता है, उमे सुधार देता है; फिर वह चित्र प्रकाश-: पहुँच जातो है। केवल दोनों स्थानों पर दो विद्य त्यन्त योग्य हो जाता है । भिर बाल पही. तः लिख दिया होते हैं, जिनको महायतामे एक स्थानका संवाद दूसरे जाता है। उमके अनुसार चित्र कर आलोक और छाया : स्थान तक बिना तारको महायना हो पहुंच जाता है। डाल कर उसे सुधार देता है। एक ही मशानमें उसो। विशेष विवरण के लिये बेताना ता" देखो। ममय वही तसबोर भिन्न भिन्न दूरवर्ती स्थान पर भेजो ताडित वियोजन (स' क्लो०) ताड़ितस्य वियोजन ६ तत् । जा सकती है । - (Electrical repul-ion ) जो नाड़ित पदार्थो के गुण यह स्थिर हो चुका है कि, बिजली एम गडम हारा कोटी वस्तु कांच या लाइसे अलग हो जाय, उसे ४००००० मोल दौड़ सकता है। अतएव यह कहा जा ताड़ित-वियोजन कहते हैं। मकता है, कि चाई कितना भी दूर क्या न हो इमका भो ता :ताकर्षण ( म० को० ) ताड़ितस्य पाकर्षण ६ तत्। प्रवाह तत्क्षणात् पहुंच जाता है। फिलहाल इस यन्त्रको ; ( Electrical attration ) वह वस्तु जो ताड़ित पदा- "Narok llerall"ने अपने हो की में रखवा है कि गुण हारा कॉच या नाईके माथ मिल जाती है हिउ माहबका प्रण्टिट् टेलिग्राफ ! | lugho's printing. उमे ताड़िताकर्षण कहते हैं। telegraph-- इसके द्वारा दूरवर्ती स्टेशन पर अंग्रेजो नाड़ितापरिचालक ( स० पु. ) नाड़ितस्य अपरिचालका अक्षम कृपा हा संवाद पहुंचता है । इसके यन्त्र दि ६-तत् । (non-conductor of electricity ) वह वस्तु बहन हो जटिल है। इसलिए सनिपुण कम चारो हो जिससे ताड़ित पदार्थो का सञ्चालन निवारण किया इसका व्यवहार कर सकते हैं। फिलहाल दमको और भी जाय । उबात हो गई है। ताडिनान्नोक -- ताडितका आलोक, बिजलौका प्रकाश काउपर साहबका राइटिट् टेलिग्राफ (Cowper's ITriti - ताड़ी ( स० स्त्रो० . ताडि डोष । ताड़का पेड़ । इसका ng telegraph --- हम अङ्गत यन्त्र के हरा, एक स्टेशन - पर्याय--ताडि, तालो और तानि है। २ पाभरणविशेष. पर मवाददाता जो कुछ भी लिखेगा, वः तत्क्षणात् : एक प्रकारका गहना। दूसरी स्टेशन पर लि जायगा। इम को अब काफो त डो (रि. स्त्रा० ) माद शक्ति विशिष्ट ताड़का रस, तरको हो गई है। | वह नशोला रस जो ताड़के फूलते हुए डंठलमिसे निक-