पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४०१

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ताती . सांवचीको जाते : टेशनसे दो मोल चनमा साता कम्पनीको कार्यावती अस्वन्त चमत्कार ।। पड़ता है। इम कम्पनी ने अपने प्रतिष्ठाता नामानुसार ( उनके परन्तु खेद है कि साता इस कारखानेको तैयार न स्मरणार्थ ) शहरका नाम जमशेदपुर कर दिया है। देख सके। १८०४९०में पापको मृत्यु हो गई। उस जमशेदपुर पच्छा शहर है. यहांक मकानात, बाजार, ममय कारखाने का काम चालू नहीं हुआ था। हां, उन थाना, चिकित्सालय, विद्यालय प्रादि सब ताता बाग के दोनों सुपुत्रोंने पिताके प्रयत्नको व्यर्थ नहीं जाने। प्रतिष्ठित है। तातानगर देखो। दिया ; पुत्रों ने उनके सभो उद्योगों को मार्थक कर इम कम्पनीके अधीन चिकिया और स्वास्था विभाग दिखाया है। है। शिक्षा-विस्तार के लिये कम्पनीने चार विद्यालय साताको बगोचेका बड़ा शोक था। उन्होंने देश खोल रक्खे हैं। कम्पनो के कर्मचारियोंके पामोद. देशके पौधे ला कर अपने बागमें लगाये थे । धनिक होने प्रमोदके लिए भी अच्छा इन्तजाम है। यहाँ दो राष्टि पर भी आप बड़े मितव्ययी पौर मद्यपानके बड़े विरोधी टिउट और उनके साथ दो लारियां हैं। हर एक थे। मद्य प्रचारको रोकनेवाले नेताओं को श्राप काफी कम चारो अल्का देकर उसका नदस्य बन सकता है। पार्थिक सहायता दिया करते थे। इसके सिवा मद्राजो, बङ्गालो पर मारवाडियों के भिव राजनीतिक विषयों में माधारणतः पाप किसी प्रकार. नाव्य समाज है। का मन्तव्य जाहिर नहीं करते थे। इस विषय में चुप. तानाके कारग्वानि में एक रत् विद्य तागार है। चाप काम करते रहना हो पाप युक्तिसङ्गात समझते थे। जिसे 'पावर हाउस' ( Power House ) कहते है। ६५ वर्षको अवस्था में साताको मृत्यु नई थी। मृत्युके भारतवर्षमें इतने बड़े विद्य नागार बहुत कम है। इसके कई माम पहले आपका हृद-भाग हमा था। डाकरी भीतर इतना भोषण शब्द होता है, कि प्रवेश करनेसे और हितषियों को मलामे, १८०४ ई० जनवगे माममें कान बहर मे हो जाते हैं। तमाम कारखामेसा काम चिकित्साके लिये प्राग यमप गये थे। इमो साल मार्चकं इमो विद्य सागार पर निभर है। कारखानेके भीतर महीने में पापको स्त्रोका देहान्त हो गया । १८वीं मई मर्वत्र रेल लाइन है ; भारो चाजे रेन पर लाद कर को जम नोके नामि शहरम आपका भी मानव-लोला एक जगहमे दूमरो जगह पहुंचाई जाती है। खींचनेक समा हो गई। मृत्यु के समय आपके पुत्र दोराब ताता लिए एचिन भो बहुतमे है. ये सब कम्पनीको सम्पत्तियां और जाति-भाई रत्न ताता प्रापर्क पास थे। हैं। कारग्वनिमें सर्वत्र बिजल्ला जत्ती पोर टेलिफोनका पाप नामके भूखे न थे। काम करना ही आपके प्रबन्ध है । कर्मचारियांको पिपामा-निहसिके लिए वर्फ जोवनका उद्देश्य था। आप चारते तो बहुतभी उप. और मोडा-वाटरका भो इन्तजाम है। इसके लिए उन्हें धियोंमे विभूषित होमसे थे किन्त ऐसा विचार प्रापर्व पैसे नहीं देने पड़ते। उदयमें कभी नहीं हुआ । परन्तु 'साता कम्पनी अापके ताताका लोहेका कारखाना बहुत उत्कष्ट समझा मामको अमर बनाये रकबेगोसमें सन्देह नही। जाता है। दमका माल अमेरिका, जापान, चीन, पट्टे. 'ताता-कम्पमी' और उसका कारखाना-जमशेदजो तातार्क लिया, न्यू जिलेण्ड, फ्रान्म, अफरीका और पटसोको उद्योगसे १८०५०में रस कम्पनीको प्रतिष्ठा ही और जाता है। पृथिवोके प्रायः सभी बड़े बड़े नगरों में १८०७ में इसका कार्य प्रारम्भ हुआ था। तानाके कार्यालय (पाफिम ) है। भारत में पन्यत्र कहीं गत युधक समय स कम्पनी वा कारखानाने नाना भी ऐसा लोहेका कारखाना नहीं। प्रकारसे गवर्म एटको माल दे कर सहायता पहुंचा ताता कम्पनीको पोर एक पक्षय कोति-कालो है। इसके लिये भारत के गवर्नरजनरल स्वयं जाकर इलेक्ट्रिक पावर मलाइ कम्पनो' है। यह पृथिवीमें एक कम्पनीको धन्यवाद दे पाये। सखयोग्य वैधानिक व्यापार है। १८१११ में बाई - Vol. IX. 100