पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४०६

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५.२ तानसन लिो व्यग्र ह। उन्होंने तानमेनको प्रागरे ले धान र तानसेनको मृत्यु के विषयमें भी एक अपूर्व उपा. जिग जलान्न उद्दोनकर्गों को भेजा। गजा रामचन्दको ख्यान सुनर्नमें पाता है। तानसेन अकबरके अत्यन्त धभरको आज्ञा उमदन करनेका माहम न हुआ। प्रियपात्र हो गये थे, इमलिए बहुतमे लोग उनसे वर्षा चन्हान गर्न गत तानमेनको विदा किया। तानमेनन करते थे। बहुतमे उम्ताद मङ्गोत मग्राममें परास्त हो 'म दिन पर पहल दरबार में उपस्थित हो कर गाना कर उनको मारनेका ड्यन्त्र कर रहे थे। परन्तु उसमें सन , नमो दिन बादशाहने उनको दो लाख रुपये वेक्तकार्य न हो मकै । एमके बाद उन लोगोंने निश्चय ..नाम दिय । किया कि, दोपक राग गानसे गायक जल जाता है, हम- द हम प्रकार है-पहले तानसेन दिमाश्वरके । लिए तानसेनसे दोपक राग गवान हो हम लोगोंकी " मना गात नहीं करना चाहते थे। उनके पाम पह. प्रभोष्टमिद्धि हो सकता है। एक दिन अकबर जब दर. पर भो ये कुक गाते नहीं थे। बादशा: प्रायः ।। बाग्में पहुंचे, तब उस्तादोंने दोपकका प्रमाकोड़ा। बाद. पर इनका गाना सुना करते थे। श्राविर एक शाहने उन लोगोंमे दोपक मान के लिए अनुरोध किया। न प्रकवरन तानमन पाम अपनो लडको भेज दो। उस्तादोंने कहा-'हम लोग दोपक नहीं जानते, बादशाहजादो कपन नानमेनको मोहित कर लिया। दोपक गाना तो मियां तानमेन हो जानते हैं।' प्रकवरने हजादो भो तानन पर लट्ट हो गई। अकबरने तानमेन को दीपक गान के लिए आदेश दिया गायक दानांका विवाह कर दिया। तबमे तानमेन मुमलमान चहामगि तानमेनने बादशार पाम आ कर कहा-"यदि प्रकार मभासद हो गये। पहले ये स्वरचित आप मुझे चाहते है, तो दोपक गनिका आदेश न दें।" जितने भी गोत गतिं थे, उममें उनके प्रविणलक गमचन्द्र- किन्तु दोयक सुनने के लिए बादशाह का कुतहल बहुत बढ़ नामका म्वम्ति काश वा भनिता होता था। मन गया था। उन्होंने नानपेनको बात पर ध्यान न दिया । गोलको हज दृष्टि मे देवनमे मागम होता है कि उनमें तब तानसेन क्या करते ? उन्होंने अपनो कन्याको मलार पाति गमचन्द्रको मरिमा गायो गई है। परन्त अक गाने के लिए कहा और खुद दोपक गाने लगे। उनका . आथित पनि बाद ये भ-ितामें अकबर वा 'ताना विश्वास था कि, ममारक गुणमे दोपकानल कुछ प्रश- ति अकबर' का नाम देत थे । मित होगा। तानसेनको कन्या मबार गाम लगो, तानमेन एक मङ्गोतपाधक व्यक्ति थे। माधक का किन्त पिताक मरनेको आशङ्कामे उसका स्वर विक्कत हो • त उनके हृदयमे कभी भी दूगभूत नहीं हुआ। ये गया । * तानमेन भी दोपक राग गाते गाते अपने हो तक भावमे ब्रह्मको जगत् माथ एकाकार ममझते टाएनसे बाप दग्ध हो गये। कहा जाता है कि, उनके शायांतो उनके बनाए हुए अनेक गोत मिलते हैं, पर स्वर के प्रभावसे मभास्थ निर्वाषित दीप उठे थे। किन्तु वन एक हो गीत उडत किया जाता है .- उनके जीवन-प्रदोपके माथ माथ वह दोपावलो भो निर्वा- "प्यारे ! तुही ब्रह्म तुही विष्णु तुमी शेष तुही महेश । पित हो गई थी। भी आदि तुही अनादि तुही अनाथ तुही गणेश ॥ तानसेनको कब उन्होके आदि लोलाक्षत्र ग्वालियरमें गल स्थल मरुत गोभ तुही अकार नुही सोम । स्थापित हुई। अब भी वहाँ इनकी कब्र देखने के लिये ती कार तुही मकार निरोड़ कार तुही धनेश । बहुत दूर दूरसे नत की ओर गायक आया करते हैं। तुही पेद तुही पुराण तुही हदीश तुही कुरान, दुनको कब्रके ऊपर एक वृक्ष अव भी मौजूद है। तुही पान तुही ज्ञान तुही त्रिभुवनेश । बहुताका विश्वास है कि, उम वृक्षको पत्ती खानेसे कण्ठ- तानसेन हे वैन तुही देन तुही रमण । खर परिष्कार और गोतयक्तिको वृद्धि होती है। इस- तुही घर पलवुन तुभी वरुण तुही दिनेश ।" लिए बहुतसे गायक और नत की वहां जा कर उसकी मुसलमान धर्म में दोक्षित होने के बाद ये मियाँ तान- पत्तियां चबाते हैं। ग्वालियर देखो। सेनक नामसे प्रसिद्ध हुए थे।

  • इस विकृत मालारका ही मियो मलार नाम पड़ गया है।