पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४१

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कास को गति देतो.. बापान तक सिर नहीं मानुके स्तन पथका मनुवाश का मूलमें जो मौतला ।जो कुरो , जब देखा जाता है कि एक बार बसन्त निकलती है, उसके रसको शाके पप्रभागमें लेकर प्रपोडित व्यक्ति फिरसे भी वसन्तरोगावास होते हैं, तो वामूलमें प्रविष्ट करना चाहिये। पखवारा वाहमलसे पन्ततः र ७ वर्ष टोका लेना उचित है। टीकाके जो रस निक्षलेगा, उसके साथ वह रस मिल कर अच्छी तरह नहीं उगने पर फिर भी टीका लेना पच्छा स्फोटकन्या उत्पादन करता है। कोई कोई डाकर तो हर तीसरे वर्ष में या उससे १३ विकृति, पर्थ का विवरण, व्याया। भी कम दिममें टीका लेनेको सलाह देते हैं। टीकाकार ( पु.) टोको करोति -पण । व्याख्या- टोकेका नीर लेना बहुत ही सावधानोका काम है। जिस कार, जो किमी ग्रन्थका पथं लिखता। बर्षको शीतलासे नोर लिया जाय, वह यदि कोढ़ी हो टोटा (हि.पु. ) टना देखो। अथवा उपदंश पादि रोगोंसे पाक्रान्त हो, तो वही मब होण्डल-मामिद अंग्रेज वैज्ञानिक । १८२.१.में पाय रोग हजारों बालकोंमें जिन टीका लगाया जाता है, लेण्डको कालो नगरके निकटवर्ती एक छोटेसे गांवमें इन कैल जाते है। इसी कारण सबसे पहले लड़के के माता• का जन्म इपा था। टौखल के पितामाता अत्यन्त दरिद्र पिताको कोई संक्रामक रोग है या नहीं भन्नोभौति जॉच थे। दरिद्रमाके कारण वे पुत्रको पढ़ाने में असमर्थ थे। कर लेनी चाहिये। फिर कोई डाकर कहते है कि इसलिए थोड़ीमो जो पढ़ा कर उन्हें शिक्षा बन्द कर टीकाहारा व्याधिमामित नहीं होती। देनी पड़ी। गाईस्या अवस्थाको पतीव शोचनीय देख्न मनुषा और गोके वमन्तरोग विषयमें मतभेद है। कर, बहुत थोड़ो उनमें हो टोडल स्कूल छोड़ कर डा. जैमर कहते है कि यह यथार्थ में एकही रोग है। सेना-विभागमें किसी काम पर भरती हो गये। परीक्षा करके देखा गया है, कि गौको मनुषा-मोर हारा जो जड़ विज्ञानके पस्यन्त गुच मत्वोंका पाविष्कार टोका लगानसे उमे शीतला रोग हुआ है और पीछे उस करनेके लिए उत्पनइए थे, उन्हें ये सब कामको प्रय को शीतलाका नौर ले कर टोका लगानेसे प्रतत गो. लगने लगे! कुछ दिनों बाद होने वा काम छोड़ नौरको नाई फल हुआ है। पतः मनुषा और गो दोनों दिया और मष्टरके एक कारखाने में काम करते हुए का शोतमा रोग एक ही है। घोड़े आदि भी इम गैगसे यन्वादिका काम मोखने लगे। म पवमा उन' आक्रान्त होते हैं। घोड़े के नोरसे टीका लगाना भो गो- ज्यादा दिन न रहना पड़ा; कुछ ही दिनों वे कल-कार- नौर मरीखा फलप्रद है। बेलुचिस्तानके टीमें भो एक खानेके काममें विशेष व्य त्पन हो गये और मोघ हो मी. प्रकारका शीतना रोग शाम है। लेकिन विशेषता यह ष्टरको रुवे कम्पनीमें सोनियर नियुक्त हो गये। टोण्डल है कि उस अवस्थामें जो इसका प्रतिपालन करते हैं वा बड़े मम्मानके साथ तीन वर्ष तक इस कामको करते दूध पीते हैं, वे अकस्मात् वसन्तरोगसे पाक्रान्त नहीं रहे। इस समय पनकी कार्य कुशलताके कारण मर होते । भारतवर्ष में टीकाका प्रचार अंगरेजी शासनकाल- में पा है। घरको रेएवं कम्पनीको विशेष लाभ पा था। १८४७ प्राचीन काल में भारतवासी गो-नीर और मनषा-नोर ई में हम्पसायरमें साइनस -उड-कालेज प्रतिष्ठित दुपा, दोनोमसे किसी एकके हारा जैसो सुविधा देखते टीका कालेजके अधिकारियों ने टोडसका पतुलनीय बुधियाख्य लगाते थे। इसके विषय में धन्वन्तरिने कहा है- देख कर उ उत कालेजका प्रोफेसर नियुक्त किया। "वेमुस्तन्यमसूरिका नराणाच ममूरिका । कुएनम -ड-कालेज ही टोलका प्रथम जोखनीय तज्जलं बाहुमूलाच शखाम्तेन गृहीतवान् । कार्य क्षेत्र है। यही प्रसिह रसायनवित् प्रासण्डके बाहम च शमाणि रक्कोसत्तिकराणि । . साथ टोण्डलको मित्रता हुई थो और यहीं रह कर तास र कमिलित स्फोटकपरसम्भवम् ॥" उन्होंने बड़े परिश्रमके साथ पदार्थ विद्या सम्बन्धी नाना पान्तरित भालेय प्राय) पत्रात सत्वोंका पाविष्कार कर जगत्में खाति पाई थी। Vol. Ix. 10.