पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४१९

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ताप परिवित होतो है । सुतरां वायु दिनमें जो भाप रमतो है, परिमाणु विकम्पित हो कर उत्तम हो जाते हैं। कभी रातमें शीतल होनेसे यदि वह परिषिक्त हो उठे तो गोतन कभो बेगसे जानेव' लो बन्दूक को गोलो के किसो कठिन द्रव्य के स्पर्श मात्र मे हो उसके भोतरके आपका कुछ अंश पदार्थ पासत होने पर भो पाग उत्पन्न होती है। धनोभूत हो कर भोमके रूपमें परिणत हो जाता है। पतन गो न वस्तु के भूतन पर पतित होनेसे उसको दृश्य- वायुमें जितने अधिक परिमागमें वाव रहता है, उतने मान गति रुक जाने पर अदृश्यमान पाणविक गति या ही अल्प परिमागा में शोतल होते हो अोस उत्पत्र होतो ताप उत्पन्न होता है। है। यहो कारण है कि ग्रोमका नमें दिनमें वायुमण्डन पदाथ शास्त्र के विहानांने परीक्षा के हारा यह प्रमा- प्रत्यन्त उत्पन्न होता है। किन्तु रात्रि में उतना ठगड़ा नहीं णित किया है कि कोई एक मेर भारो पदार्थ १२८२ होता, इसीलिए वायुका वाय प्रोमके रूपमें परिणत नहीं फुरमे अथवा १३८२ मे भार पदार्थ के १ फट जैसे होता। गिरनमें जो वेग प्राप्त होता है, उसके तिरोहित होने पर जिम वस्तुओंको विकिरण-शक्ति अधिक प्रबल होतो उतना ताप उत्पन्न होता है कि उनके द्वारा १ सेर जलको है, वे सब रात्रिकालमें अधिक शोतल हो जाती उष्णता शताशिक तापमान को बढ़ाई जा सकतो है। है। इसी कारण उन मब वस्तुओं में अधिक प्रोम इकट्ठी , रासायनिक संयोग -लकड़ो पादिमे जो पग्मि प्राम होता है। मभो धातुओं को विकिरण शक्ति अयन्त अल्प होतो है, उममें जलने व ले पदार्थ के साथ वायुमें रहने है, इसीलिए उनमें विशेष प्रोस नत्रों ठहरता, किन्तु वाले, अक्सिजनका गमायनिक मयोग हो इसका कारण मिट्टो, कोच, बाल, पेड़ों के पत्ते. जन प्रभृति द्रव्यों को है। दोपक आदिमे जो प्रकाश निकलता है, वह भो विकिरण-शक्ति अधिक होने के कारण उनके ऊपर प्रचर नेल प्राटि अङ्गारक सहित वायक अक्सिजनके मयोग परिमाणमें प्रोस सञ्चित होता है। हनिमे उत्पन्न होता है। हम जो भागको लपट देखी है ____तापके उत्पत्तिस्थान - समस्त जड़ द्रवों के परस्पर मंध. वह केवल अत्यन्त गरम वाष्य है। वाष्य या वायवीय द्रव्य गासे ताप उत्पब होता है। प्राचीन कालमें आर्य अधिक उत्तम होनसे अग्नि शिवाक समान ही दिखाई लोग अरणि घर्षण धारा अग्नि उत्पन्न करते थे . प्रमभ्य देते हैं। लोग दो काठोको अापसमें धिम कर भाग जलाते हैं। तड़ित् --बिजलोंसे भो ताप उत्पन होता है । वचकी धिमनेमे दियामलाई जल उठी है। चकमक पत्थर और अग्नि भो इमो बिज लोगो पागका रूपान्तर मात्र है। इस्पातमें परम्पर चोट करनमे आगको चिनगारियां नि जीव दे, जाका पार भी तापका एक उत्पत्ति- लती हैं । बफ यद्यपि इसना शीतन है । तथापि घर्षण स्थान है। हमारे शोरको उणता चारों भारको करनसे उष्ण हो जाता है। वायके ममान नहीं है। क्या अरब देशक' बालुकामय ___ संकोचन - जिस तरह तापके निकन्न जानसे वस्तु मापदेश भार क्या तुषारपन्डिन सुमेरु-शिखर ऊ निकट- सिकुड़ जाती है, उसी तरह वस्तु के सिकुड़न पर ताप निक। वर्ती प्रान्त, मब जगह मनुष्य गरीरको उष्णता फारेन- लता है । सोचनसे आयतनका जितना हो हास होगा, हीटक ८८ अ होगी। उष्णताको भी उतनी ही वृद्धि होगी। वारि-घटित पेषणा भूगर्भ -ज्वालामुखी पहारोंमे निकली अग्नि पोर यन्त्र द्वारा किसी ठोस वस्तु के अपर दबाव डालनमे वह झरनोंक जल की उष्णता देख कर विदित होता है कि पाकुचित पोर उत्तप्त होता है। जल और तेल संकुचित पृथ्वोका भातरो भाग अग्निमय पदार्थो में परिपूर्ण है। होने से गरम होते हैं। सूर्यके उत्तापमं तो रिफ टो तोन फुट ऊपरको मिट्टो आघात - यह सभी मानते है कि पाघात प्राल होने मे रात्रिको अपेक्षा दिनमें अधिक उष्ण हो जाता है। ग्राम समस्त जड़ वा सण होते हैं । निहाईके अपर सोभेका कालमें शीतकालको अपेक्षा कुछ अधिक दूर माचे तक एक टुकड़ा रख, उस पर हतौड़ की चोट करनेसे मीमेक पृथ्वो उष्ण विदित होता है। जो हो, ७० या १..