पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४२१

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बापेक्षिक ताप-एक हो तापक्रमके दो बिभिव लिये जितना ताप पावणाता , उस तापसे जसका पदार्थों को एकसे पात्रमें समान दूरी पर रख, एक मात्र सापक्रम जितमा बढ़ता है, उस तापमे जलका •०३१४ एक हो पागका एकसा ताप दो तो उन दोनों पदार्थो के तापक्रम होगा। सुतरा सोसेका पापेक्षिक ताप तुलनामें तापक्रममें अन्तर देखा जायगा। पारद और जल इमो .० ३१४ हुवा । प्राधा मेर जलका तापक्रम ० से तरह रखने से देखेंगे कि जल की अपेक्षा पारद मधे पर्यन्त बढ़ानमें जितना ताप पावाक होता है, उमे उत्तम हो जाता है। वैज्ञानिक लोग तापाड ( Thermal unit. ) कहते हैं। ___ पारेको तापक्रममे किमो निर्दिष्ट तापक्रम तक यहो भापक्षिक तापका नाप है। उठाने के लिए जितना ताप लगता है, उतनेसे नहीं ठोस और तरल पदार्थों का पापेक्षिक ताप जाननेके होगा; अर्थात् पारा ओर पानो को समान तापक्रम तक लिए सोन प्रकारके उपाय काममें लाए जाते हैं -बरफका उष्ण करने में पारेको अपेक्षा जल के लिये अधिक ताप गलन, मिश्रण और शोतलोकरण । अन्तिम प्रणालो समय के भावपाक होगा। इसो तरह यदि ममान परिमाणका द्वारा जाना जाता है, अर्थात् किमो एक विशेष तापमें पारा और पानी १०० मे शोतल करना शुरू किया जाय पा कर पदार्थों के शोतल होने में जिसके जितना समय तो पारेके बराबर शीतन होनमें पानोको अधिक ममय लगता है, उसो समयको घट-बढ़के अनुसार विमिव लगेगा । ठोक इमो तरह जल पारटके समान उषण होन- पदार्थोके आपेक्षिक तापका निरूपण किया जाता है। में जितना अधिक ताप लेगा. उमके बराबर शोतन होने में प्राधसेर बर्फ गलाने के लिए ८० तापायों को जरूरत उतना हो अधिक ताप त्याग भी देगा। होतो है। यदि किसो पदार्थका कोई एक निर्टिष्ट तापक्रम, जब एक तापक्रम के एक पदार्थ के साथ दूमर पदार्थ- मान लो १०० में लाकर एकदम तुषारके ऊपर रक्खा का मिश्रण किया जाय और दोनों का परिमाण एक जाय, तो देखा जायगा कि वह शीतन हो कर १०० सेके हो हो, तो उनके ता क्रम में विशेष अन्तर पड़ जाता तापक्रम में प्रानमें कुछ बर्फ गला कर पानो बना देता है। है। यदि १०० तापक्रमका प्राधसेर पारद . तापक्रम- उस पानो का वजन और उम.पदार्थ का वजन ठण्डा होते के आधसेर पानी में मिलाया जाय तो मिश्रण का तापक्रम होते जितना तापार नीचे गिर पड़ेगा, उमको संख्या देख करीव ३ होगा. अर्थात् पारदका तापक्रम ८७ कम हो कर उम पदार्थ के अापेक्षिक तापका निरूपण सहज हो कर पानोका तापक्रम केवल ३ बढ़ेगा। सुतरों बगबर किया जा मकता है। इसे महजहोंमें जाननेके लिए सोलके पानी पोर पारेको बराबर तापक्रम तक उठानमें सुप्रसिद्ध विहान् लाप नसने तापमिति (Calorimeter) पानी के लिए पारेको अपेक्षा ३२ गुणा ताप अधिक प्रयोग नामक एक यन्त्र प्रस्तुत किया है। इस यन्त्रमें धातुके करना पड़ेगा। तीन बकम एकके भीतर एक लगे रहते हैं। प्रथम दितीय- इसी तरह यदि अन्यान्य वस्तु नोंको जलके साथ के बीचकी जगह बर्फ से भर दी जातो है और तोमरे तुलमा को जाय तो मब वस्तुम ही तापक्रमको यह बकसके भीतर जिस पदार्थ का आपेक्षिक ताप जानना विषमता लक्षित होगी। किमी पदार्थ के तापक्रमको होता है, उसे रक्खा जाता है। प्रत्ये क बकममें ढबन लगा ० से १ तक बढ़ानिमें वह पदार्थ जितना ताप शोषण दिया जाता है। प्रथम और द्वितीय बकम के बीच को जगह- करेगा पौर उमो अवस्था के उतने हो जलको उसो ताप- में जो बफ रहता है, वह द्वितीय पोर टतोय बक मके क्रममें लानके लिए जम्न जो ताप शोषण करेगा. उन अन्दर रकवे बफे के साथ बाहरो तापका सम्बन्ध अलग विभिन्न तापोंको तुलना करनेसे जो हाथ पायगा वहो ___ कर देता है, वहां पर केवल तोमरे बकसका हो उम पदार्थ का पापेक्षिक ताप है। अर्थात् मोसेका पाप- ताप पहुँच सकता है और किसो तापके वहा पहचनका क्षिक ताप जानने के लिए समान परिमाणका जल और रास्ता नहीं ; सुतरां उस तापसे बरफ गन कर जितना सोसा खो, उस मोमेको में तापाममें सानिक जल होगा उसे जल हारा कौशलपूर्वक निकाल कर तौल Vol. IX. 105