पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४३९

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शामिक-मानल जैनोंके उद्योगमे तामिलभाषाके माहित्यको समधिक ( भागवत ५२९) तमिसया साध्य पण । २ ।३ उबति हुई है। श्रवणबेलगोला के शिलालेख और जैन पविद्याविशेष, एक पविद्याका नाम। भोगको इच्छ- ग्रन्यों के पढ़नेसे माल म होता है, कि अन्तिम श्रुतविलो पूर्तिमें बाधा पड़ने से जो क्रोध उत्पन होता है उसे सामिस्र भवाहस्वामीने बहुत दिनों तक द्राविड़ देशर्म वास कहते है। क्रोध, गुस्मा । किया था, मोर्यराज चन्द्रगुप्त यहाँ उनके शिष्य हुए सामो (हि. स्त्रो०) १ तावका तसला । २ एक प्रकारका थे । चन्द्रगुप्त देखो। यदि ऐसा हो है, तो मानना पड़ेगा, बरतन जिसमे द्रव पदार्थ मापा जाता है। कि पहलेसे हो जेनियोका य विस्तार हो गया था। तापोल (प. स्त्रो.) पाजाका पालन। जितने भो प्राचीन तामिल अन्य मिलते हैं, उनमें अधि- साम (म०वि० ) सम-उगा । स्तोता, स्तुति करनेवाला । कांश जन है । बहतोका अनुमान है, कि ताग्नि भाषाके ताममेरो (हि. स्त्री० ) गेरू के योग बनाये जानका एक जिसनो भो प्राचीन हस्तन्तिःपयों का पाविष्कार हुआ प्रकारका तामड़ा रंग। है, उनमें जैनग्रन्य हो मबसे अधिक प्राचीन है। कुमा- ताम्ब लो ( म० स्त्रो० ) साम्बुली पृषो. साधुः । ताम्बूल, रिल और शगचार्य के आविर्भावके बादसे हो द्राविड़में पान । जैन प्रभावका हास होने लगा और जैनों को संख्या भो ताम्बूल (स' को.) तम उलच, वुगागमो दोघच । सजि- बहुत घट गई। ऐमो दशामें तमिल-जै नमाहित्य की विजादिभ्य उरोलचौ। उग् १९०। । पण नागवली दम, उति और अवनति उनसे पहले हो माननी पड़ेगी। पान। पर्याय-ताम्बूलवलो, साम्बुलो, नागिनो पोर सामिल भाषामें कवि तिरुवल्लर-चित कुरन ग्रन्थ नागवल्लगे। हो सर्व पधान है। ईसा को रौं शताब्द मे पहले यह खनाम-प्रसिद्ध नताविशेषके पत्ते को साम्ब ल वा ग्रन्थ रचा गया था। कविके निम्न थेगोको परिया जाति- पान ( Piper Beetle ) कहते हैं। पान शब्द संस्कृत में जन्म लेने पर भो, उनका ग्रन्थ सर्वत्र पाहत होता पण शब्दका अपनश है, जिसका पर्थ है-पत्ता । पान है। प्रसिद्ध विद्वषो औरार (प्रावियार) तरवावरको भारतवर्ष में सर्वत्र मिलता है, पर ज्यादा उत्तरमें नहीं भगिनो थौं । इनको कविताने भो द्राविड़-समाजम विशेष होता। आदर पाया है। कम्बनको तामिल रामायणमें कविको पानके विभिन्न नाम- कवित्वर्थातका यथेष्ट परिचय मिलता है। सुन्दरपागडा हिन्दी में पान। तामिल भाषामें कई शिव-स्तोत्र लिख गये हैं, तामिल बङ्गलाम पान। शेवगा उनको तामिल-वेद मानते हैं। ऐसा हो ४००० बम्बईमें पान, विलिदेले। श्लोकोंका एक विष्णु स्तोत्र भी है, वह भो वैष्णवो के मराठीमें विड़े चा-पान। लिए वेदस्वरूप है। गुजरातों में पान, नागरवल। सामिल भाषामें रचित जैनकायों में १५००० बोका सामिलमें वेत्तिलाई। मक "चिन्तामणि" नामक ग्रन्थ ही विशेष उल्लेखयोग्य तेलगूमें ... तमालपाकू, नागवल्लो। है। इस ग्रन्थको रचना-प्रणाली, शब्दयोजना और वर्ण- कनाड़ोंमें विलेदेले । माधुर्य कम्वनको रामायणको पपेक्षा श्रेष्ठ है। मलयमें वैता, वित्तिना। सामिन (स'• पु०) तमिस्रा तमस्तति रस्तास्य पण । १ ।। ब्रह्ममें ... कुनियोई, कानिनेत्। नरकविशेष, एक नरवका नाम । इस नरको सदा घोर । सिंहलमें बलात। पन्धकार बना रहता है, जो दूसरोंको ठग कर पपनी परबीमें तान्धोल। मोविका निर्वाह करते हैं, वे हो रैस नरकके अधिकारी फारसीमें .... सानबोल, बर्ग-ए-तॉयोल। सनरको पधिक याणा भोगनी पड़ती है। पान सपदेगमें सोली जमीन पर होता है। भारत,