पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४४

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रीपू सुलतान . .. . . RASE ASEX नि कट SHED - -- AN THEATERIES RECIPE HTrans करने के लिए पार्कटकी तरफ गये थे, उम ममय टोपूने पतिगय पितमोक प्रकट काम :रोधकी रक्षा बन्दोवास पवरोध किया था। उस समय टोपूत रणन- करने में अपमर्थता दिखाई दोनों सुबतर ममियों के पुण्य और कार कुशनसाको देख कर अग्रेजसेनानायक कोशलमे टोपू सुलतान हो गये। तक चमत्कम हो गये थे। निम दिन अंग्रेजीमानायक पारनीकी तरफ गये, उम दित दग्ने बहुतसो मेना देकर टीपूको पारनो भेज दिया। पारनौमें हैदर- का मुख्य अड्डा था । अंग्रे जमेनापति मर पायार कुटका मोनिय पारनी पर विशेष लक्ष्य था। १७८२ में २गे जमको सेनापतिने पारमो के पास शिविर स्थापित किया। म भमय मौका देख कर टीपू अंग्रेजी सेना पर गोला बरमान लगे। अंग्रजो फौज घबरा गई। उम दिन टोपूकी हो जय हुई। सर पायार कुटको मद्राज- में पृष्ठप्रदर्शन करने के लिए बाध्य होना पड़ा। २० नव म्बरको कर्नल हम्बाष्टोनने पोनानोको तरफ मेना चलाई। टीपून फरासोसो-से मानायक लालिक माथ हटिशसेना पर पाक्रमण किया था। इस समय वे सर्वदा हो रणक्षत्रमें रहते थे। ७टिसम्बरको धीरवर हैदरअलोने अपने तम्ब में प्राणत्याग किया, उस समय चारों तरफ विपद देख कर टीपू सुल्तान । पूर्णिया और कृष्णराव नामक दोनो मन्त्रियोंने उनकी हैदरपलोके मृत्य संवादको सुन कर मंज लोग मृत्य मंवाद प्रकट नहीं होने दिया। हेदर के द्वितीय पुत्र महसुर गग्य पर आक्रमण करन के लिए अभिपन्धि अबटुम्न करीमको यह बात किसी तरह मालम पड़ गई; करने लगे ; किन्तु अंग्रेज-राजपुरुषों के मतभेदके कारणा वे दो सेनापतियों को सहायतासे पिमिहामन अधिकार उन्होंने मौका पोर सुभोता खो दिया। टीपू सुलतान करनेके लिए षड्यन्त्र रचने लगे। किन्तु विज मन्चियोंके हो कर प्रथमतः युद्धविग्रहमें मन न दिया था। उन्होंने कौशनमे शीघ्र ही षड़यन्त्र प्रकट हो गया टोनी मन्धिः कर्णाटकसे अपना तमाम दलबल हटा लिया, पचिमकी योंने यथामम्य विश्वस्त अनुचरके जरिये टीपूको पिता- तरफ मिर्फ एक दल फरासीसो सेना रही। हेटिसमें का मृत्व मंवाद भेजा । टोपूको ११ तारोखको यह सर पायार कुटको फिर मद्राज भेजा, किन्तु हमसेना- संवाद मिला था, देगै न कर शीघहो वे (१७८३ ई०को पतिने रोग और पथकष्ट के कारण मार्ग में ही लोलासव- रीजनवगैको) पिशिविरमें भा पहुँचे। उस समय रण को । फरामोसो-सेनामायक बूसो भारतमें पाये और सक भी सबको हैदरको मृत्यु का समाचार नहीं माल म १० प्रपोलको उन्होंने कुहाल रमें फगमोसो सेनाका हुमा था। टोपूने शामको प्रधान प्रधान कर्मचारियोंको प्राधिपत्य ग्रहण किया। समय पर टोपूको सहायता बुला कर एक मभा को । मभामें वे ममिन वेशमें माधारण पहुंचाने की बात थो, उस समय अंग्रेजोको भवखा एक गलीचे पर बैठे थे। उनकी अवस्था देख कर सभी बड़ी माटजनक थी। इसके थोड़ो दिन बादण्ड लोग चौक पड़े। शोघ्र ही मबको हैदरअलीका मृत्य और फ्रान्समें एक सन्धि स्थापित हुई। बूसोने जो सेना संवाद माल म हो गया। अमान्योने टोपूको मसनद पर टीपूके कार्य में लगा रक्सी चो, जसे सन्धि हो बैगने के लिए अनुरोध किया किन्तु सुचतुर टोपून सासे उसको पटा लिया। . . . . . . .