पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४४४

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३४० ताम्बद-ताम्बूली ताम्ब लपात्र, पान रखनेका चन, महा । इम का दूसरा इनि । ताम्म लविक्रता, पान बेचनेवाला, समोलो। नाम स्थलो है। ताच लो ( स० स्त्रो० ) ताम्ब न गौरा डोष । २ ताम्बूल- ता बन्नद (म.वि.) ताम्ब न ददानि दक। ताम्बन- वलो. पान को बेल । दाता, जो पानगा कर अपने मालिक को देता है। ताम्बली - साधारणतः त'बोलो या तमोलो नामसे प्रसिद्ध रममा प्रयो। ३ग गुलिक है। एक जाति । बङ्गाल, बिहार और उड़ोमामें इनका काफी साम्ब नाग ( म. पु. ) ताव लदा राव न । ताम्बल- मम्भ्रम है। ये मनमः ताम्बल व्यवपायो होने के कारण दता, मह नोकर जो पान इत्यादि लगामयिक किया न नाममे अभिनित ए हैं। इन जातिको भो मिश्र जाता। जात कहा गया है बगानमें इनको ताम्लो वा त मुली ताम्बलधर ( पु.) वह नोकर जो पान लेकर खड़ा तथा ताम्बल-वणिक कहते हैं। रनता है। ___विनाके तानियाँमें मोबभेद नहीं है। इनमें साम्ब लनियम ( म०प० ) पान मग लग इना. हमेशा मे चने प्राग्रे निया के अनुसार विवाह प्राडि यचो आदि खानका यि । मबन्ध होते हैं। "धिय निया' सम्पर्कको पकड़ कर ताम्ब लपत्र (मं० १०) ताम्ब लरिव पत्राम्य । १ पिण्डान , ६ पोटो तक ओर "टेयाडो" मम्पक पकड़ कर १४ पोढ़ो अकया नामको लता। हमके पत्ते पानी जमे होने हैं। तक विवाह मम्बन्ध नहीं होता। (को०) २ पानका पत्ता । बङ्गाल और उड़ीसा में ब्राह्मणगोत्रके अनुसार इनके ताम्ब लपात्र (म) को ) ताम्ब,लम्य पात्र, तत्। नाना विभाग है। कुलमानानुमार भी इनमें विभाग ताम्ब लकर, पान रवन का बरतन, बट्टा, पानदान। हैं। ममानगोत्र और ममान कलम विवाह नहीं होता, ताम्ब लपेटिका (म• स्त्रो०) साम्ब लम्य पेटि का ६-तत्।। मपिगड वा ममानोट होने पर भी नहीं होता। मगो. ताम्बूलपात्र देखो। बोय किन्त भित्र कल के होने पर, वा ममोपाधि किन्त ताम्ब लबीटिका ( म स्तो०) पान का बोडा, बोड़। भिन्न गोत्रोय होने पर विवाह करने में वाधा नहीं। साम्ब लराग ( म० पु. ) तावलकतो रागः मध्यनो० बङ्गालके ताम्बूलो पांच थाकों में विभक्त हैं, जैसे- कम धा० । १ पानको पोक । २ ममू। । ताम्बूनलिका ( म स्त्रो० ) ताम्तल, पान । मनग्रामो वा कुगद हो, अष्टग्रामो वा कटको, चौदहग्रामो, साम्बूलवानो ( म० स्त्री० ) ताम्बूललना, पानको बेल। वियानोमग्रामा और वह माना । मन्नग्रामियोका कहना इमका महत पर्याय-ताम्बूला, नागवल्लिका, वर्ण है, कि वे उत्तरभारतमे पा कर पहले पहल सरग्राममें लता, समशिरा, मघनता, फणिवतो, भुजगनता, भक्ष- बमे थे, वहां उनके वोटह मो घर हैं । किमो मुमलमान पत्रा. ताम्ब लामिका, पर्णवबो, तःम्ह निदिवाभोष्टा, नवाबके इन को किमो स्त्रो पर अत्याचार करने के कारण नागिनो और नागवलरो। (भाव।।श ) ये मलग्रामको छोड़ कर कुशदहमें प्रा कर रहने लगे। ताम्बुलवाहक (म पु०) राजभृत्य वशेष, पान खिलान- बिपालोम ग्रामियों का भी अपने आदि इतिहासके मम्वन्ध वाला नोकर। में ऐसा ही कहना है । ये बङ्गालमें मप्तग्रामियों के पोके ताम्ब लाधिकार ( स०ए०) वह नोकर जिसके हाथ । आये हैं परन्तु सख्या इन्हों को अधिक हैं। चौदहग्रामि- पानका इन्तजाम हो। यांका फिलहाल ज्यादा सम्मान नहीं है! बिभालीस- ताम्ब लिक ( म० त्रि.) ताम्बल स्ट्रचन' शिल्पमस्य ग्रामो थाक के षष्ठोवरसिंह, वर्षमानी थाकके श्रीमन्त ताम्ब ल ठन् । १ पान बेचनेवाला, तमोनो । २ तमोलो पालको एक कन्या के साथ विवाह करने के कारण, पिता के जाति। हारा घरमे निकाले गये थे और खारके साथ हुगलो साम्ब लिन् (स• त्रि.) ताम्बल' पण्यतया पस्त्यस्य जिले के वोरची नामक ग्राममें पा कर रहने लगे थे। ये