पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४५

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सरबाई गवर्मण्टने टीपूर्व विषद जनरल म्याध करने लगे, पदपद पर खोजित होने लगे। मालर को भेज दिया था । मैसर पधित्ववास्थित वेदना में उनके सम्ब के सामने दो फांसी का खापित किये अंग्रेजोंके अधिकारमें हो गया था। टोपूने अपील- गोजराजपुरषोंने जो सोचा था, वही पान को पा कर उम स्थानको घेर लिया। पंग्रेजों ने दोनोंने बड़ो मुसीबतसे छिपी तौर एल जो जहाज महीने तक रमको रजाके लिए कोशिश की आखिर पर चढ़ कर अपने प्राण बचाये। रक्षाका कुछ उपाय न देख कर मन्धिधर्वक पाममम. १७८४ में ११ मार्च को टीपू एक अमात्य लिए पंण करनेको वाध्य होना पड़ा। टोपने पराजित अंग्रेजी गये हैं कि-"ज कमित्राने मात मस्तकसे बसे मेनाको मेस रके किले में कैद कर सकता। हो कर सन्धिपत्र हा लिए हुए २ घण्टे तक कितनी बेदन रमे प्राय: एक लाख मेमा ले कर टीपू मङ्गलोर- ही खुशामद की और मनोमुन्धकर बात कहकर सन्धि- को तरफ बढ़। यहां कर्नल कम्बमके अधीन ७००। पत्र पर मम्मति देनेने लिए अनुरोध किया था। पूना और अंग्रेजी और २८०० देशोय मेना टुर्ग को रक्षा कर रही हैद्राबाद वकीनने भो उम समय विशेष अनुनय विनय यौ। २रो अगस्त तक उन लोगों ने टोपूके पवन अाक्रा- किया था, पाखिर सुलतान महमत हो गये थे ।" रस मण सहे। बादः ३० जनवरी तक कोई युद्धविग्रह सन्धिसे म्भिर पा था कि. परस्पर कोई विवाद विस नहीं हमा: मिस्त रसदके प्रभावमे उनको वाध्य हो कर बाद वा युद्धविग्रह न कर सकेंगे। मन्धि अनुसार १८. तेलिसेरोकी तरफ चला जामा । मज-गजपुरषों, ८०० अप्रेजों पोर १६. देशोय अधर अग्रेज सेनानाय कर्मल फुलाग्टनने १३००० सेनाने छुटकारा पाया। इन्होंके जरिये टीपूके अत्याचार, मेना ले कर दिन्दिगुल, पालघाटगे और कोरम्बार जनरल म्याथ और अन्यान्य प्रेज सेनापतियों को पर अधिकार कर लिया। अब वे भो महिनुर राजधानो हत्या की बात मालूम पड़ी। सन्धि हुई तो समो, पर पर पाक्रमण भरने के लिए अग्रमर हए। और एक दल स्थायी नहीं हुई। मेना महिरके उत्तर-पूर्वाशस्थित कार्यागज्यमें उपस्थित १७८५ में ग्रेजोंने बंगलोर और महाराष्ट्र थो; टोपूके प्रत्या नाग्मे राज्यणित हिन्द्र अधिवामिगण | राज्यको रक्षाके लिए तीन दल पथदि मज। किन्तु नामा- सुलतामके विरुद्ध हो गये थे। वे भी इस समय महिसूर- फड़नवीम के प्रस्ताव अगाध करने पर टोपू सुलतानका के पवतम रानाको वृष्टिगकी महायमामे टीपूके हाश्रमे दोष प्रकट हो गया और यहो मे सन्धिमङ्गका सूत्रपात मुक्त करने के लिए विशेष चेष्टा कर रहे थे। इस ममयः हा। में अंग्रेजों के लिए बहुत कुछ सुभोता होने पर भी उधर नानाफाड़नवोस टोयूमे चौध वसूल करने के लिए लार्ड साझाटनि बड़े लाट की बात न मान कर टोपू अग्रसर हुए । निश्चय किया कि, यदि टोपू चौध देनमें प्रस- के साथ सन्धि स्थापन करने को वाध्य हुए थे। मद्राजील मत हाँ, तो अवश्य हो घोरतर खुब होगा। १७१४९० मन्त्रिसभाने टी के पास दो कमिश्नरोंको भेजा किन्तु जुलाई महीने में नाफमाड़नवीसने भोमानदो किनार टोपून तोन मास तक व्यर्थ उनको रोक रक्वा । इमके यातगिर नामक स्थान पर निजाममे मुलकात की। उनके बाद उन्होंने अपने पादमोके साथ उनको मद्राज भेज माथ मित्रता स्थापन कर वे चुपचापटोपूक विश्व युद्ध कर- दिया। नेका आयोजन करने लगे । यह संवाद गौत्र ही टीपूके बोलाट सन्धित विषयमें विशेष भापत्ति को कानों तक पहुंचा। टीपू शोधही युद्धकी तैयारियां करके थी, उनका कहना था कि, यदि सन्धि करनी ही हो तो मिजामसे बीजापुर प्रदेश्य मांग बैठे पोर मिजामराज्य- मरिसर राजधानोमें उपस्थित हो कर करनी होगी। किन्तु में उनके हारा स्थापित परिमाणादि पलानीका पादेश लार्ड माकार्टमित्र अपनी रच्छानुसार टोप के दूत के साथ दिया। इस पसात प्रस्तावसे मिनामने अपना अपमान फिर कमिनारोंकी मेज दिया। मार्गमें सभी उनको सो समझा, किन्तु सम ममय उनकी ऐसी क्षमता न हो कि, Vol.. 1x. 11.