पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४५१

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वामू-ताम्रकार ४४७. उसके बाद उस जिमो कन्दवे चारो तरफ एक पल। करनेसे क्षय. कुष्ठ, पागह, शूल, मेद, अर्थ पोर वातरोग मोटो मिटो थोप कर गजपुटमे उसका पाक करें। इस • नष्ट होता है। एक रत्तोसे दो रत्तो तकको मावा वर्ष तरह ताम मारित होता है। यह मारित ताम्म वमन, भर मेवन करनेसे मेद, मृत्यु और जरा नष्ट हो जाता है। विरेचन, भ्रम, कम, अरुचि, विदाह, खेद और उत्कद ___शोधित ताम उणता. विषदोष, यज, मोहा, उदरो, को कभी भी नहीं होने देता। कमि, शून, आमवात, ग्रहणो, पर्श पौर पम्लपित्त प्रादि मारित ताम्के गुण-यह कषाय, मधुर, निता, अम्ल नष्ट करता है। ( रसेन्द्रमा) रस, कट विपाक, सारक, पित्तनाशक, कफापहारक,! तौबा अम्न मयोगमे शुद्ध होता है। तापमम्ळेन वीय, व्रणरोपक, लघु, लेखनगुणयुक्ता, किश्चित् हण शुद्धति' (मनु. तथा पाण्ड, उदर, अग, ज्वर, कुष्ठ, काग, खास, क्षय, ताम्रके पामें भोजन न करना चाहिये। देवपूजा पोनम, अम्लपित्त. शोथ, कमि और शूल को नाश करने । श्रादिमें तमके पात्र हो प्रगल्त है, देवपूनामें साम्ब बाला है। निर्मित पात्र हो व्यवहत होते हैं। अमम्यक मारित ताम्रके मेवन करनेसे दाह, खेट, | ___कुष्ठभेद, एक तरहका कोढ़। ३ रतवर्ण, लाल अरुचि, मूळ, केद, विरेचन. वमन और भ्रम उपस्थित रंग। ४ होपभेद, एक होपका नाम। (भा'त २।३१।३५) होता है। ( भावप्र.) ताम-महिषासुरका एक प्रसिद्ध मेनापति । यह दानव रमेन्द्रमारम ग्रहके मतमे ताबमें पाठ प्रकार के दोष इन्द्रयमादि देवों के माय धोरतर युद्ध करने के बाद हैं। इसलिए ताम्रका शोधन करना आवशाक है। अन्तमें देवोके हाथसे मिहत हा था। ताम्रशोधन - लवङ्गः और अकवनके दूधमे ताँबेको (देवीभा०५५ स्कन्ध) पत्तोको लेप कर, प्रागमें जला कर मम्हालके पत्ते के ताम्रक ( स० को०) तामस्वार्थ कन् । ताम्म, ताँबा । रसमें छोड़ देनेमे ताम्रका शोधन होता है। ताम्र देखो। मतान्तरमें ऐसा भी है, कि गोमूत्रम ताम्रपत्र डान | तामकण्टक ( म०प० । १ निर्यापप्रधान कण्टक वृक्ष कर एक प्रहर तक खूब तेज आग पर पाक करनेसे ताँबा विशेष. एक प्रकारका पेड़। रतखदिर वृक्ष, लाल खैर- संशोधित होता है। का पेड़। · ताम्रपाक-दूने गन्धकके साथ पारेको पृतकुमारोके ताम्रकर्णी ( म० स्त्री० ) ताम्रवर्णी करें यस्याः बहुव्री. रसम घोंट कर ताँब की पत्तो पर पोत', फिर उसको स्त्रियां डोष । १ पश्चिमदिहस्तोको पत्रो, पश्चिमके लवणयन्कम चार पहर तक पकावें, गोतल होने पर दिग्गजको पत्रो, पञ्जना। २ तमेरा, वा. जो तांबका उसका चूण बना कर सब रोगोंमें प्रयोग करें। तांबे के बरतन बनाता हो। पत्र पर जम्बोरी नौबूका रस, सेंधा नमक और गन्धकका ताम्रकार ( म० ए०-स्त्रो०) तान करोति ताम्रधातुभिः लेप दे कर भस्म होने तक उसका पुटपाक करें। इम पात्रादिक निम्ाति -प्रण । वर्ष सहर जातिविशेष । तरह ताम्रपाक होता है। इसके सस्कृत पर्याय-तामिक, शौल्विक भोर ताम्र. किसोके मतसे-तॉब को पत्तोको लवण, क्षार और | कुट्टक । दम जातिके विषय में अनेक मतभेद है। किसा- जम्बोरोके रसमें एक दिन घोट कर उन पर सिज और के मतमे पायोगव (बढ़ई) के औरस और विप्राके गर्भ से अकवनका दूध पोत कर बार बार जलावें भोर मम्हालूके । हम जातिको उत्पत्ति है। समें निषिम करें। पीछे समभाग पाग्द, दूध, घो और ___ "आयोगबेन विप्रा । जातास्तामोपजीविनः ॥" गन्धक मिला कर सोन बार पुटपाक करनेसे भस्म हो! शूद्रक औरस और वैश्याके गर्भ से पायोगव आति जायगी; पचामृतमें सौन पुट देखें। एनाब हुई है। यह ताम्रकार (तमेग) जाति कसकार शोषित ताम्रके गुण-मनपाम विशेषके साथ सेवन । ( कसेरो ) जातिके अन्तर्गत है और फिर किसीक मतसे