पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४५२

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ताम्रलिसि-सानपट्ट यह जाति वैश्वा और ब्राह्मण के मभोगमे उत्पन्न हुई है। "सुभगा लम्बिनी लम्बा ताम्रचूड़ा विकासिनी"। किसो सोमरेका मतानमार विश्वकर्मा के अोरम पोर शूद्र है। __ (भारत ४७ मा गर्भ से हम जातिको उपत्ति हुई है। ये तांबे के बरतन (त्रि० ) ४ सता शिवायता, जिसकी चोटी लाल हो। बना कर अपनो जाविका निर्वाह करते हैं। ताम्रचड़भैरव (मं.पु. ) भैरवमेट। ___ काय कार देखो।। ताम्रजाक्ष ( म० पु.) मत्यभामा के गर्भ से उत्पव श्रोष्ण ताम्रकिन्नि म ५०) लोहितवर्ण का कोटविशेष, बोरवहटो के एक पुत्र का नाम । ( इग्विश १६२ अ० ) नामका कोड़ा। ___ ताम्रतन (म त्रि०) nिम' शरीरका ग तांबे के ताम्रकट (म. पु०-स्त्री० ) ताम्र कट्टयति कट-प्रा ।१ जमा हो। ताम्रकार. तमेरा । तामकार देखो। २ तमाकू का पेड़। ताम्रसुगड (२०१०) एक प्रकारका बन्दा । इसके मुखका ताम्रकटक ( स० प्र०) साम्र' कुट्टयति कुट-गवन्न । संग ताम्रवर्ण होता है। तामकार देखो। ताम्रपुज ( म०प्र०) ताम्रञ्चत्रपच ताभ्यां जायते जम ताम्रकगड ( मको०) कगा- ताम्रमयकगई। ताम्रमय डाकांस्य, कांमा। जलाधार पावद, नाँचका चना उमा एक प्रकारका ताम्रत्व ( म.की.) ताम्रय भावः ताम्र-त्व । ताम्रका बरतन । हममें जाके ममय जल गिराया जाता है। भाव, मावगा साम्रकूट ( म० ए० स्त्रो. ) नाम्रग्य कटमिव । अपविशेष तामदग्धा ( म'० स्त्रो ) ताम्म रक्त दुध चोर रसो. तमाकू । तन्त्रक मतमे मम्बिदा, कालकर ताम्रकट, यम्याः बहवी०। गोरक्षदग्धा, गोरखदुद्दो, अमरमजो- धस्तर ( धतूग ), अनिफेन ( अफोम , बज्ज ग्रम, वनो । तारिका ( तालो ), और तरिता ( भांग, गांजा ) ये आठ ताम्रष्ट्र ( म० पु.!) रतनन्दन । प्रकारके मिडद्रव्य हैं। तामहोप (म० पु०-को०) दक्षिणदेशस्थित होपविशेष । ताम्राम ( म० ए० ) ताम्र पण, लाम: कोट: मध्गलो। दक्षिगादिक विग्यके ममय मादेवने यह होप जय इन्द्रगोपगोट, चौराहटो नामका कोड़ा। किया था । ताम्रपणा देगो। ताम्रगर्भ ( म० लो० ताम्रगम-दव नत्यतिम्थान' यस्य तामधात (म० पु. ) ताम, तो वा । ताम्र देखो । बहती० । तुल्य तलिया। य: तॉर्च में उत्पन्न होता है। ताम्रधम (मं० वि०) का पोरवण, तमेड़ा, लाल रंग। तुत्थ देम्वो। मामध्वज (म'• ५०) रत्ननगर के राजा मयूरध्वनके पुत्र । उन्होंने युग में अर्जुन और श्रोताणको पराजय किया था। ताम्रचक्षु ( म०प०) ताम्रचक्षुषी यय बहवो । लाल ताम्रलिप्त और मयूरध्धाज देखो। नेत्रवाना, कपोत, कबूतर । साम्रपक्षा ( स० सो.) सत्यभामाके गम से उत्पन ताम्रगड (म. पु० स्त्रो०) तामा रक्ता-चडा यम्य बहब्रो। श्रीकण की एक कन्याका नाम । ( हरिवंश १६२ म° ) १ कुक्कट, मुग्गा । मुरगा भीत हो कर 'कू करू कू' शब्द ताम्रपती (म. पु. ) श्रीकृष्ण के एक पुवका नाम । करता है । गतमें यदि वह उक्त शब्द छोड़ कर मरे ताम्रपट (म० क्लो.) ताम्रनिर्मितं पटं मधालो०, कमंधा० । तरहका शब्द करे तो भय होता है। जिन्तु रात्रिी पव ताममय लेखनपत्रभेद, ताम्रशासन । पूर्व कालमें राणा मान होने पर स्वस्थ चन्द्रचड़ तारस्वर, म्वाभाविक शब्द धर्मविद साधणोंको ताम्रपत्रमें भूमिका परिमा- करनेसे राजाका राज्य पोर देशको वृद्धि होती है। णादि ममम्त विवरण लिम्ब कर स्वमुद्रा चित्रित करके ( वृहत्सं . ८६।२४ ) 3ट देखो। प्रदान करते थे. ब्राधण परुषानक्रमसे वह भूमि भोग २ कुछ रङ्गम. ककगेंधा नामका पौधा । ३ कमारा करते थे। इसके बाद कोई भी अन्य राजा उस भूमिका गुचर मावभेद, कात्तिकयके एक पनुचरका नाम। पर नहीं लेते थे। इस तरको भूमिदान करनेको