पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४५८

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ताम्रलिप्त माग करना चाहो, तो इमो ममय मुझे एक लाख मुद्रा २१ कोशिकनारायण ३० लक्ष्मीनारायण राय दे दे।" राजाने ब्राह्मण को अमङ्गत बातको सुन कर २२ अजितनारायण गय ३१ चन्द्रादेवो (लक्ष्मोको उन्हें 'दूर दूर' कर निकाल बाहर किया। ब्राह्मणने ३३ कणकिशोर राय कन्या और राजा नि:- गजाको शाप दिया कि, तृ निवश हो जा और आजमे २४ चन्द्रार्क राय द्राक राय शङ्करायकी स्त्री) ताम्रलिजको शस्यशाली भूमि समुद्र के जलमे प्रावित होतो २५ मौनोकिशोर राय ३२ कालभूया गय है। यह स्थान सारभूमि में परिणत होवे। यहांक अधि- २६ पन्द्रमाण राय ३३ धागभूया राय २७ सुधन्वा राय वामो क्रियाहीन, श्रोपद तथा वृहरोगमै दुःख पावें। कोई ३४ मुरारिभू यां राय २८ मृगया देवो ( सुधन्वा- भी यहां मुग्यो न होवे । कलिके ४५०० वर्ष बोतन घर को भगिनो और कमार ३५ हरवावभूया राय यहां निकोका पाधिपत्य होगा भोर भीमादेवो भी अपने जमिनभञ्जको स्त्रो) ३६ भागमभूयां राय शक धामको चलो जायगो ।' ( दिग्विजय प्रकाश, '०१-१०३) २८ भानुराय (मृगयाके पुत्र) मं० १३२५ में मृत्यु ) इस ममय कलिको प्रारम्भ हुए कगेब ५०२२ वर्ष ३६वें राजा भाङ्गडभूयाके बाद के पुत्रादिक्रमसे आप है। यदि दिग्विजय प्रकाशको बात ठोक है, तो मानना प्रत्येक राजाका राज्यकाल लिखा जाता है। पड़ेगा कि ५२२ वर्ष हुए भोमादेवो अन्तरित हो गई नाम राज्यकाल हैं, अब सिर्फ उनको मूर्ति मात्र पड़ी है ! (शक संवत) यहां कवतजातिका ही अधिक वाम है। ब्राह्मण और ३७ धिताइ राय १३२६-१३७० कायस्थ यहां बहुत ही कम रहते हैं । यहाँक ब्राह्मगा भी १३७१-१४१७ सोनावस्था में पड़े हैं। शायद इमोलिए दिग्विजयप्रकाश १४१४-१४४२ के ताम्रलिप्त विवरणमें गेमा लिया है.-- ४० रामभूया राय * १४४३-१४८१ 'प्रायो भानकविप्राश्च वभूवः पतिताः द्विजाः । ४१ योमन्त राय १४८२-१५३४ कैवर्तसहशा: प्रायाः कृषिकर्मरता: सदा ॥" ४२ त्रिलोचन राय वर्ग भोमाके मन्दिरके ऊपर म्लेच्छाका लक्ष्य था, यह ४३ हरिराय (अनुमानसे) १५७. बात वहकि बादशाहो पञ्जीके देखनमे मालूम होता है। ४४ गमगय (हरिके पुत्र ) ४५ गम्भीरराय मनोहरके पुत्र । । । १५७१-१६१८ पूर्वकालके ताम्रलिप्लके राजाओंका धाराबाहिक विव- ४६ नरनारायण ( रामके पुत्र ) ni) सन मिलता। बहत दिन हुए, यहां के प्राचीनतम ४७ प्रतापनारायगा ( गम्भोरके १८१८-१६५५ राजवंशका नाश हो गया है। वर्तमान राजवंगके पुत्रा- दिक्रमिक धारावाहिक तालिका इस प्रकार है-- ४८ रूपानारायण नरनारायणकी। ४८ कमलनारायण दोनों स्त्रियोंकेप्लन) १६५६-१६८० १ विद्याधर गय ११ शम्भूचन्द्र राय २ नीलकण्ठ गय १२ दीपचन्द्र राय ___ शकमं० १६७४में लपानारायणको मृत्यु होने पर कमलनारायण मम्य ग राज्यक अधिकारो हो गये थे। ३ जगदीश राय १३ दिव्यमिह गय ४ चन्द्रशेखर राय १४ वीरभद्र गय शकस० १६८०में नबाब ममनदो महम्मदखांक अनु- ग्रहसे मिर्जा देदार अलोवेगने समस्त मम्पत्ति पर दखल ५ वोरकिशोर गय १५ लक्ष्मणसेन राय कर लिया। उसो वर्ष कमलनारायणको मृत्य हो गई। । गोविन्ददेव राय १६ रामचन्द्र गग ७ यादवेन्ट्र गय १७ पद्मलोचन राय *नके दो पुत्र थे, श्रीमन्त और त्रिलोचन । श्रीमन्त के ७ पुत्र हरिदेव राय १८ कृष्णचन्द्र राय थे। श्रीमन्तकी मृत्युके बाद उनके छोटे भाई त्रिलोचनको ।, विश्व खर गय १८ गोलोकनारायण ज्येष्ठपुत्र केशवको , और बकीके छह पुत्रोको के हिसाबसे १. रसिंहराया २० बसिनारायण हिस्सा मिला था। पुत्र ) Un)