पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४६०

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तानाप-तार ताम्राम ( को०) ताम्रमय प्राभाइव पामा यस ताम्रपजोविन् ( जि.) तामेष उपजोवति, ताम्र- बहुत्रो । १ मा चन्दन । (नि.) ताम्रा पामा यस्य। उप-जोव-णिनि । जो तानद्वारा अपनो जोविका निर्वाह २ रावर्ण आभायुक्ता जिम लाल रङ्गको कान्ति को। करत है, कांस्यकार, कसेरा। साम्रार्यण (म० पु० याज्ञवल्का एक शिष्यका नाम। ताम्रोष्ठ (म पु०) ताम्र इव पोष्ठ यस्य बनो.। जिस के ताम्रायगिा ( म०प० ) एक शक्ल यजुर्वेदी ऋषि। ये अवर और पोष्ठ रावण हो। ममाम करने पर प्रकार के याज्ञवल्काक शिष्य थे। बाद प्रोष्ठ शब्द रहनसे प्रोष्ठका प्रकार विकल्पसे लोप तामारि ( म० ए० ) ताम्रवर्गा शात्र भेट । होता है। ताम्र पोष्ठ साम्रोष्ठ, साम्रौष्ठ, यहां पर एक ताम्राकण ( म० को ) तार्थ भेद. एक तीर्थ का नाम । डा. जगह प्रकारका लोप हुआ है और दूसरी जगह पकार- सोर्थ में सानदानादि करनेमे अश्वमेधयजमा फन होता का लोप न हो कर अ-मोकारमै वृद्धि हो कर औकार है और अन्त में ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। हो गया है। (पाणिनि ) 'ताम्र रुण सभा गद्य ब्रह्मचारी समाहितः । - ताम्रा (स० को०) ताम्रस्य भावः ताम्र था । ताम्रका अश्वमेधमवाप्नोनि ब्रह्मलोकं च गच्छति ॥" (भा० ३८४अ) भाव । ताम्राई ( म० क्लो० । कांस्य, कांमा। कॉमे में आधा तायन ( म ° क्लो० ) ताय मावे ल्युट । १ वृद्धि, बढती। सॉबका भाग है। २ उत्तम गति, अच्छा चाल। तत्रावतो (म स्त्री०) ताम्रमाधयत्वातास्य ताम्र तायना (हिं.क्रि.)तपाना, गरम करना। मतुप मस्य व, मजायां दोघ । नदीभेट, एक नदो ताफा ( फा० स्त्रो० ) १ नाचने गानवाली वेश्याओं और का नाम। ममाजियोंको मण्डल्लो । २ वेश्या, रडो। "नामवती वेत्रवती नद्यस्तिस्रोऽय कौशिफी ॥" ताया (हि• पु० ) पिता के बड़े भाई, बड़ा चाचा । ( भारत वनप० २२१ अ०) तायिक (स० पु.) ताये पालने मुरिति ठत्र । देशविशेष. ताम्राश्म ( म० पु. ) ताम्र प्रश्म कम धा। पनगग एक देशका नाम। मगि। तःयु (स'• पु० ) ताय-उन् । चोर, चोर । तामिक ( मं० पु० ) ताम्र तत्पात्रादिनिर्माण कार्यत्वं ना तार । म क्लो. ) तावते विस्तार्यते ट-णिच प्रच. । स्त्यस्य ताम ठन् । १ कंसकार, कसैग। वि० ) २ ताम १ रोप्य, रूपा, चोदो। (१०) तारयति खजापकान् निर्मित, जो तांबेका बना हो। मसारममुद्रात् तृ-णिच पच । २ प्रणव, बमबोज, तामिका (स० स्त्रा०) तामक टाप। १ गुञ्जा, धुंधचो आकार मन्त्र । २ वाद्यविगष, एक प्रकारका बाजा। 'तारयेद् यद्भवाम्भोधेस्वरूप सक्तमानस । तामिमन् ( स० पु० ) ताम्रस्य भावः ताम्र-इमनिन् । वर्ण- ततस्तार दाते ख्याती यस्त' ब्रह्मा व्यलोकयेत् ॥” (काशी ७२अ०) रहादिभ्यः व्यञ्च । पा ११२३ । साम्रका भाव। जो यह मन्त्र जप करते हैं, वे भवसारसे उत्तीर्ण ताम्री ( म० स्त्री० ) तामस्य विकारः इति प्रण ततो- हर्ति हैं । ३ वानरविशेष, एक बन्दरका नाम। ये राम- डोप । १ वाद्यविशेष, एक प्रकारका बाजा। इसके चन्ट्रजो के सेनापति थे । वृहस्पति के संयमे इनका जन्म पर्याय-मानरन्ध्रा, विकारिका । २ भारतवर्षोय हुआ था । ( रामा० ११० अ०) ४ एबमोलिक, प्राचीन टिकायच, प्राचीन कालको एक प्रकारको धर्मः शुद्ध मोती। ५ मुत्ता विधि, यह मुला।। देवी- घड़ी। यह समय जानने के लिये व्यवहत होती थी। प्रणव, कूच बोज। ७ तारण, बार, निसार । भाजकस काक' और 'वाच' का प्रचार हो जाने पर भी ८ शिव । शिवजीने विजगत्का बार किया था। सोमे बहुत जगह घटिकायन्त्र काममें लाया जाता है। उनका नाम तार पड़ा है। नक्षत्र, तारा । साखर (स.पु) ताम्रभस्म, सांबे की राख। यमरूप प्रथम गोण सिदिभेद, साहयक मतानुसार गोल