पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४६७

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तारस्य-तारविमा एक पिचकारीके मदृश बहुतसे छिद्रोवाला यंत्र जनसे कठिन पदार्थका जपरो भाग नहीं बचा कहीं नोचा भर कर उसका पगंल बलपूर्वक यदि भोतर डाला जाय, हो सकता है। किन्तु तरल द्रश्योको सतह व ममान तो उसके समस्त छिद्रोंसे जल वाहर निकलता है। यदि जची होतो है। कठिन अवस्था में पाणविक पाकर्षण नागें पोर चाप संचालित न होता तो सभी छिट्रॉस जल गुण के कारण द्रव्य के परमाणु परस्पर दृढ़रूपसे पासष्ट न निकलना। रहते हैं। इसीलिए किमो दृयका कोई अंगविशे। जलादिके एक अशी चाप प्रयोग करनेमे यह चाप किश्चित् ऊचा होने पर भी मध्याकर्षण हाग विच्छिन उसके सर्वा शमें संचालित हो कर चाप युक्त शके माय होकर पतित नहीं होता, किन्तु तरल अवस्थाम पाग. समायतनसम्पवयोंके जपर समपरिमाणमें और लम्ब- विक पाकर्षण वसा प्रवल नहीं होता। इससे तरल भावसे कार्य करता है तरल पदार्थक एक अंशमें दिया वस्तु के परमाणु महज हो विचलित और प्रवाहित होकर या चावसर्वा शमें मचालित होता है। यह भी पूर्तता ममतलभाव धारणा करते हैं। परीक्षाहाग प्रतिपादित हुवा है। किमो तरल वस्तुका यदि कोई भाग किश्चित् उक्त तरल पदार्थाका सरक्षेपक चाय ( दवाव )- तरल पदार्थों के हो उठे तो पृथ्वो के मध्याकष गमे उमे पुन: नितिन ऊपरमे नोभेको ओर चाप हारा जिस प्रकार नोचेके भण। होना पड़ता है। वास्तव में ताल पदार्थीको सतह स्वभा आक्रान्त होते हैं उमो तरह नीचे अपर की ओर चाप वस: मम उच्च होतो है। जलक जंचे नोचे होने का द्वारा अपरके प्रण उद्भामित होते हैं। नीलेके स्तरोका। कारण मभोको विदित है। अपरके स्तर्ग पर अवक्षेपक चाप और अपरके स्तरोंका जिम तरह धरापृष्ठ पर कहो जचे पर्वतशिखर, नोचेके स्तरों पर उत्तेवक चाप समान होता है। यह कहौं गभोर गहर दिखाई देते हैं। सागर पृष्ठ में वैसा निम्नलिखित परीक्षा द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। नहीं दिखाई देता। यदि कभी किसी कारणसे कहीं किमो जलपूर्ण पात्रमें दोनों ओर खुलो एक नलो डुबान पर ममुद्रका जन किंचित् जचा उठ जाता है तो उस मे देखा जायगा, पालमें जितना ऊंचा जन है उतना ही कारण के हटते हो वहांका जल ममभाव धारण कर लेता ॐचा पानी नलीमें भो उठता है, किन्तु इमो नलोके है। यद्यपि महाममुद्रकै जिम भाग पर दृष्टि डालो जाय नोचेका मह उमोके समान एक टुकड़ा कांच या अभ्रक वहो समतल मालम देता है तथापि यह नहीं कहा हाग पावड कर थोड़े से सून हारा वह कार या अभ्रक' जा मकता कि उसका ममय पृष्ठ देश दर्पण की तरह मम- वधिक धीरे धीरे जलमें डुबाया जाय तो देखा जायगा, तन्न है। उसको सतहका प्रत्ये क विन्दु पृथ्वोके केन्द्रके सूत छोड़ देने पर भो नलो डुवेगो नहीं और जन्लर्क ! । साथ तुलनामें समतलभावमे अवस्थित है, किन्तु भूपृष्ठ चापसे उद्भासित हो उठेगी। अब यदि नलोक भोतर को जलरागिका प्राकार गोलेको मतहको तरह गोल है। पानी डाला जाय तो देखा जायगा, नलोके भोतरका जल इस तरह जहां बहत दूर पर्यन्त जल शाल है उमको ज्योंही बाहरके जल को अपेक्षा जचा होगा त्योहो नली समस्त मतहका दपगाकार ममतल होना सम्भव नहीं। डूब जायगो। सुतरां देखा जाता है कि मोचेको पोर लग २ तरलता, द्रवत्व। ३ पतलापन । एवा कांच जिस नम्ल मे उद्भासित होता है वह उसके ममा तारबाई-हैदराबाद राज्यके वरङ्गाल जिलेका एक तालुक! यत और उसके पृष्ठदेशमे वहिर्भाग तक जल जितना इसमें कुल १५५ ग्राम लगते हैं। राजस्व २७८००० उव्रत है उतने हो उबत जलके समान होता है अर्थात् लगभग है । तालुकका अधिकांग जङ्गल में पाच्छादित है। उसके ऊपरसे मोचेको जो चाप है वही चाप नीचेसे जपरको भी है अर्थात् जलके मध्यस्थित किमो पण तारवाँयु (म० पु. ) तारः व यु कम धा । पत्युच्च शब्द- अपर उत्क्षेपक और अवक्षेपक चाप बराबर है। युक्त वायु, बहुत जोग्मे बरनवालो हवा। __साम्यवस्था तरल वस्तपोको पृष्ठदेश सर्वत्र सम- तारविमला (सं सो०) तारकप्यमिव विमला । उपधातु तक रहती। विशंभ, पामक्खो नामको उपधातु ।