पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४८०

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१ नाग धिन धा ठेका- न् ता, कत् तागे केटे दिन:: () धिन धिन धा धा, तिन सा कत् तं + (२) धा धिन् धिन् धा, ता धिन धिन् ता, ता तिन् तिन् ता ना धिन धिन् ता (२) धिन् धिन् धा धा, थन् ना, त तं + । (३) 'धा धिन् धा, ना धिन् धा, धाग तंटे धिन धा कोई इममें बारह मात्रााको जगह ही मात्राएं तिन तिन ता, ना धिन् धा : : बतन्नात है, मी एक ही बात है। तीसरा ठेका द्रत बजात ममय और मितारके माथ कगा-(mII) अधिक बजाया जाता है। काल-१ । पूर्ण (२४ ॥) मतान्तरम-(७७ कहरवा-यह तान्न वतमान में प्रचलित है। इसमें ।।). २। ग्वगड (* ॥ ॥) मतान्तरमै . (॥ ), ३। म दोताल और पांच मात्राए हैं। ठेका - ॥ ॥।), ४ । अमम (1 ॥ ॥) कन्दताल-१। (॥।॥ ॥ ॥), २। (.) धिधि कत् नाक दिन कन्दर्प --१ । (**॥॥) २ ।') काश्मोरो खमया वतमान में प्रचलित है। ठेका- कन्दक-१ (।।।।।), २ ( ) धिकना धा तिता :: करण-() करणयति- ( ) कोतितान- ( । ॥ ॥ Im), २ (।॥॥।॥) कलध्वनि- (III) कल्याण--( + ) कुण्डनाचि -( ॥ ॥ ।॥ ) कव्वाली-यह ताल प्रब भो प्रचलित है। कुगहल-१।। ।।), २। (।।।।। ॥1) कव्वालोकोक गायक प्रायः इस तालका व्यवहार कुविन्दक -(। ॥ ॥ ) करते हैं, इमलिए इसका नाम कव्वाली पड़ गया है। त्रु मुद-। (। ।।), २। (। ॥) यह विताम्लो और द्रुतत्रितालो नामसे परिचित है। द्रुत- कुम्भताल ( x , x",") बितानो ( जललितान ), अनितालो (धामा तिताना), कोकिलप्रिय-( 1 ) मध्यमान और पाड़ा ठका ये सभी एक जाति के हैं; मिर्फ कोडाताल (७) द्रुतविलम्बित। बजानसे एक हो बोलसे उक्त मभो बाद्य खण्ड-(कान )--( ॥॥), २ (* ॥) माध जा सकते हैं। मध्यमानको दूना द्रुत करनसे खगडताल-( + ) कव्वालो, मध्यमान और द्रुत कव्वालोम विलम्बित होन- खयरा-प्रचलित है। कोई कोई इसको खरता भो से जलदलिताल भोर मध्यमान विलम्बित होनसे धीमा कहते हैं। ठेका- सिताला हो सकता है। मध्यमानको कुछ बाडा बजानसे +। । । । । पाना ठेकाका बोल हो सकता है। इसका ताल चार धाक् विधा धिधि धाक तित्। मावोंका है और एक खालो पड़ता है। खामसा -- प्रचलित है ; ठेका- ठेका- कुड़क- ।।। + . १+ (1) धा धिन दिनतः, तत् धागे त्रे कटे दिन धा केटे नाक दित थना के ताक घुवा: