पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४८१

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घटक वाल खेमटा-प्रचलित है । इममें ६ मात्राएं है, किसीके मतमे चार भो है । ठेका- तेटे ता गदि धिता (२) धा गं, दिन् ता कत् तागे दिन ता, (१) धाटे धे, नाले नै, ताटे धे, ना धेने : : तेटे कता गेदि धिनि :: छोटा चोताल-प्रचलित है। इसमें ७ मात्राएं होती (२) धागेधि नातिन् नाक धि नातिन् :: हैं, जिसमें ४ आवान और ३ खाली होते हैं। इसको गज-।।।।) पाड़ा चौताला भो कहते हैं। जगधम्म-(॥",) जगझम्प-(।॥ ) गजलील-।।।।, ) जगणमच-(1 ) गारुगि- ) जनक--१ ।।।।॥॥॥ ॥1)-- (:॥॥॥॥ गाग-४४०) गौरो-(।।।।।) जयताल-१।।।।।। ।), २।(।।), ॥ ।।। ।।।) ।।। ।।, I,) जयमङ्गल-- (IT॥॥ ), २॥॥॥॥) चच्चत्पुट-(॥॥।॥1) जययो -१।।।।।।।), २ ॥।॥।॥) चञ्चरो-१ ( , जलद तिताला-वतमानम प्रचलित है। यही हत- २।( , , , , विताली नाममे प्रसिद्ध है। किमो किसीके मतसे यह च गड ताल- ।। ) कव्वालोमे किञ्चित् विलम्बित है। कव्वाली देखो। चतुरस्र-।। ॥) झम्मतान-१॥ (", I ), २।(' ), ३॥ ( +), चतुर्थ ताल-(।। ) ४। वर्तमानमें प्रचलित झपताल-(॥॥ ॥) चतुर्मुख-।।.) चतुस्तान-प्रचलित है-१॥ ॥ )२। () इसमें चार पद पोर दश मात्राएं होती है । बोल- चन्द्रकला-११ (।।। )-२(॥॥॥॥॥॥1) चन्द्रकोड़-( + ।) धागे धा 'गे दिन चन्द्रताल-।।॥॥॥॥ । ) चन्द्रिका (एकताली)-॥) सा के धा के दिन : चाचपुट-।।।।) ट- (॥ । ॥ + ) चित्रताल-(।) तुमगै-वर्तमानमें प्रचलित चार खमात्राका साल । चौताल-प्रब भो प्रचलित है। रममें ६ दोध मात्राएं इसमें दो प्राघात और दो खाली होते हैं। बोल- है, जिनमें १ । ३। ५ । ६ इन चार पदाम पाघात और २४में खालो लगता है। चौतालक पददो मावावाले होतएइसमें चार आघात लगी, इसीलिए इसका ११ धधा, किोट, नधा, किटि, माम चौताल पड़ा है। यथा- (२) सानाकि, धन धा, युवा (३) धाक् धिन धेधा गदिम (१) धा धा धिता कत् वटे सा (४) धागे धिनधिन धागे धिनाधिन Vol. Ix. 120