पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४८४

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४८. ताल-तालक राजमात रह-(।।) षट तामा--( ) गअमृगक (।) षट पितापुत्रक-१।।।।।।।।।।, (॥ राजविद्य धा ।।॥ ) गागोषक (॥ ॥on) मनिताल-( ।। ) गमा ( . कत ) (') मनिपात-१॥ (), २ (॥) गयवान ) मम १॥ (.), २१," ) राक (1) सम्पर्कष्टोक-१॥ (॥ ॥ ॥m), २ (m ॥॥ गमताल-वर्तमानमें प्रचलित है । यह १३ मात्रा सरस्वतोकण्ठाभरण-(॥॥।। ) का ताल है। रमताल देखो। मारङ्ग--- "") रुद्रताल-वर्तमानमें प्रचलित १६ मात्राका तान्न । सारस-। ।।) रुवताल देग्यो। मि -(1 ) रूपक १ (।।)-२। यह ७ मात्राका ताल प्रब मिहनन्दन-( AM | ॥॥ ॥॥।। भी प्रचलित है। रूपक देयो। __नक्ष्मोताल-१ ( 1xx । + x"." मिहनाद- ॥ ॥) |x,,)-२ (", un)-३। वर्तमानम चर्चा त मिविक्रम-१। (॥॥ ||| ||॥ ॥ २॥ १८ मात्राीका ताल । लक्ष्मीताल देखो। (।।॥॥॥॥ ॥ ) लमोश (', Im) सिंहविक्रोहित---१ (।।।।।।।।।, २।( । मिहलाल-(। ) लघुचञ्चरो-('।x."1x, x,"। x,"। सुरफाता-(।।, ।, ।।,) यह ताल वत. x, "।x, ।) मानमें प्रचलित है। सुरफाक्ता देखो। लघुशेखर ॥ (1), २॥ (11) हम-।।॥,) लयताल-(11 ॥ ",) मनाद-(। ॥ ॥) ललित ( ॥) हमोल-(।। , ) ( संगीतरत्ना० ) ललितप्रिय- (।।।।) पूर्वोक्त तालमिसे वर्तमान में प्रचलित तालोको सख्या लीलाताल----(।) बहुत कम है। प्रसिद्ध तालोंके लक्षण उन्हों शब्दों में शम ( कशाल) (॥ ॥l) देखना चाहिये। बोल साधने की प्रणाली देखने के लिये बोल शरभन्लोलक -१ (।। २।। ।।), शब्द देखा। ३। यह ताल अब भो प्रचन्तित है। शरभलीलक देखो। तालक ( क्लो. ) तालमेव स्वार्थ कन् । १ हरिताल, शार्की देव- । | ॥) पर्याय-ताल, पान, माल, शोलुष, पिञ्जक, रोमहरण, शिवताल-() हरितालक। तालक दो प्रकारका है-पव-हरिताल सीकान्ति---(॥॥।) पोर पिण्ड हरिताल। दोनों में पत्र-हरिताल ही श्रेष्ठ श्रीकोति - (॥॥।।) गुणयुक्त है, पिण्ड-हरिताल उससे कुछ अन्य गुणयुक्त है। श्रीनन्दन--( ) पत्र-हरिताल सुवर्णवण तुल्य, भारबहुल, निग्ध, अनको श्रीरङ्ग-- ।। ।।..), २ (।।।।।।) भॉति स्तर मन्वित, श्रेष्ठ गुणदायक और रमायन है। अर्थानमाला- दूसरा नाम धीमा तोताला है। धीमा पिगड हरिताल पिण्ड सदृश, स्तरहीन, स्वल्प, सत्व पौर तितालाका विवरण देखो। भय गुणयुक्त, लघु तथा रजोनाथक है।