पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४९

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


यताम करें यौन को समरमा करने का पादेश दिया। धर; पराक्रामसे शव की गतिरोधले लिए पसर । २७ उन्होंने दरपोक मन्त्री मामिर उल मुल्कको ( मोर मार्ग को मालवानो नामक स्थान पर टोपूको सेना परा- पालमको ) टोपुके विरुण उत्तजित किया। जित हो गई। इस पराजयले टोपू भी. भोत पोर भन्नो इस ममय महावीर नेपोलियन इजिप्टमें उपस्थित मार गये थे, पिताको निदाष वागी मानो ज्वलन्त थे। कब भारतमें पा जाय, इसका कोई पता नहीं। पचरों में उनके स्मृतिपट पर पदय होने लगी। वे तुरंत ऐसे समय में यही कार्योहार करने के अभिप्रायसे बड़े ही राजधानोको खोट पाये। यहां पाकर सुना कि, लाटने अपने भाई कस पार्थर वेलिम लि ( भावो उनके बहुतसे कर्मचारो उनके विश षड्यन्त्र कर रहे डिउक श्राफ वेलिंगटन) को ३३ दल पदातिक और पारस समय वे पौर भो हताश हो गये। किसो किसोने ३००० सिपाही दे कर मद्रास भेज दिया । पाखिर टीपू- उनसे पुनः अपेजोंसे सन्धि करने के लिए कहा। पहले के साथ एक मीमामा करने के लिये वे स्वय मदाज तो सन्धि करने के लिए कुछ कुछ रांजो भो हुए थे, पहुंचे। कमल डोभटन बड़े लाटका पत्र पा कर पहले पर जब सुना कि, यज-सेनापति रिस सुखोला होम टोपू पास चले गये थे। इस पत्र में यहो लिखा नामक कावेरी नदोके एक गुब टापूको पार कर चुके गया था कि, जिससे फरासोमियोंसे टोपूका कुछ सम्बन्ध और शोन हो के बीरगपत्तन पर चढ़ाई करेंगे, तब ____ उनके उदयम सन्धिके प्रस्तावने खान नहीं पाया। इधर टोपून कर्नसके साथ मुलाकात नहीं को। कहला: लार्ड हरिमने-सेनाको रसद निबटो जारही देख भंजा कि, "ग्रेजों के साथ पहले जो मन्धि हुई है, कर तुरंत हो औरणापत्तन पर धावा कर दिया। पं. वही यथेष्ट है। हम अंग्रेज गर्म गटके हमेशा ही जोमे भारतवर्ष ऐमा भीषण युद्ध कभी भी नहीं किया मित्र है।" इधर उन्होंने फरामोसी गवर्मेण्टको सेना था। अप्रेलसे युद्ध प्रारम्भ हुषा। तीसरे दिन टीपूर्ण- भेजने के लिए तशा अफगान राजा जमानशाहको भारतमें न माल म क्या सोच कर-सम्धिका प्रस्ताव पर भेजा। पा कर धर्म युद्धको घोषणा करने के लिए अनुरोध किन्तु पंग्रेज सेनापति हरित २ करोड़ रुपये पोर पाया किया। राज्य मांग बैठे। इसके प्रत्युत्तरमें टोपून कालवा टोको एमा भगेसा था कि फरासीमोगण शोध्र ही भेजा कि-"म णित प्रस्तावको खोकार करनको इजिष्ट जय करके भारतमें पदार्पण करेंगे और तो क्या अपेक्षा वोरों की भांति मत्थ भी वाहनीय है। हम नेपोलियनसे भी उनका पत्रव्यवहार चल रहा था।| वीरके पुत्र है, बोरों को सरह अपनी सम्मान रक्षा करना किसी तरह एक पत्र उनके शव बोके हाथ पड़ गया। जानते हैं।" उस दिन उन्होंने अपने प्रधान प्रधान अंग्रेजीम तुरकिस्तानके सुलतानमे पत्र लिखवा कर अमात्य पोर कर्मचारियों को बुला कर कहा-"पाज टीपूकी होशियार हो जाने को कहा। किन्तु टोपूने उम हम अपने जातीय सम्मान और धर्म की रक्षा चाल पर भोप भी न किया। १९८०, ११ फरवरीको विसर्जन करेंगे। जो इस कार्य मे डरते हों, अभी २१... जी सेना पौर १०,००० निजामको मेना। इस स्थानसे प्रस्थान करें।" बहा रमे रख दी। इधर पश्चिम उपकूलसे जनरल चार्ट सुलतामकै उत्माह भरे बचास सभी प्राणों को ममता और हार्टलिक पधोन ६.०० सेन्ध अग्रसर हो रही छोड़ कर घोरसर बुधमे प्रवृत्त हुए । 'जों ने भारतमें घो। १५ मार्च को जनरल हरिस, बगल र भा पहथे। ऐसा भीषण युशन देखा था पोर न सुना ही था। रस १६ मार्च को कोड्गराज्यको मोम्प पर माशोर नामक युबमें दोनों पक्षको कितनो मना न दुई, रसकी कोई खान पर धोरसर बुद्ध दुपा। इस युद्ध में टीपूको २... समार नहीं। २री मईको दुर्ग तोड़ने की तैयारियां मा नष्ट हो गई। । समईको चार मार मेना गढ़वाईको पार ...अब मतान अपनी बुनो ना कर प्रबल कर दुर्ग को तोड़ने लगी। टीपू सुलतान सय बोरवयमें Vol. 1x. 12