पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४९७

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११४८ सावतिक-ता तावतिक (स' वि० ) तावत क रट । बतोरिक वा । पा लावोष ( स• पु० ) साविष एषो. दोघ १ वर्ग । २ ५।१२।३। उतने में खरीदा हुपा। ममुद्र। ३ काञ्चन, मोना । तावतिथ (म० वि०) तावतो पूरणः डट, वा "वतो साविषो (म स्त्रो०) ताविषो पृषो. दोघः। १ चन्द्रकन्या । रिथ क" इति सूत्रण रतुक् । तावत्का पूरण । २ पन्द्रकन्या । तावभाव (म' वि०) तावदेव सावत्-मावच । वस्वस्तात साबुरि ( पु. ) अषगशि। स्वार्थे द्वरसज् मात्रचौ बहुलपा२३, उतना हो परि- ताश (जि. पु.) १ खेलने के लिये मोटे कागजका चौखंटा माण, उतनेका। टुकड़ा जिम पर रंगोंको बूटियों या तसवोरें बनी रहती सावबन्द (हि.पु. ) एक प्रकारको औषध जिसके प्रयोग- है, खोलनेका पत्ता। ( Playing card ) मे चांदोका खोटापन सपाने पर भी प्रकाश न हो। इसके एक जोड़े में बावन पत्त होते है जो चार रंगोंमें तावभाव ( हि पु०) परिस्थिति, मौका। विभक्त रहते हैं। रंगोंके नाम हुक्म, चिड़ी, पान और तावर (मक्लो) धनुगुण, धनुषको डोरो। ईट हैं। एक एक रंगके तेरह तेरह पत्त होते हैं। म तावरी (हि.स्त्रो०) १ जलन, ताप । २५ प, घाम। प्रकार चागे रण के पत्ते मिला कर बावन होते है। ३ ज्वर, बुखार । ४ मूर्छा । प्रत्येक रंगके तेरह पत्तों में से एकमे दय तक तो बूटियां तावान ( फा० पु.) दण्ड, डाँड़ । होती है जिन्हें क्रमश: रसा, दुक्को ( या दुडो), तिको. तावि-बम्बई प्रदेशके काठियावाडका एक कोटा राज्य। चौकी, पक्षी, छका. सत्ता, अट्ठा. नरला पोर दाता साविष (म० पु. ) तयते गम्यते सत्कामिभिरत्र तव मौत्र- कहते हैं ; शेष तीन पत्तियों में क्रमशः गुलाम. बोबी और धातुः तव-टिषच बादशाहकी तसवीरें होती है। २ समुद्र। इन बावन ताशोको लेकर पनेक प्रकारके खेल खेले ताविषो (स० स्त्री० ) सवति मोन्दर्य गच्छति तब-टिषच जाते हैं, जिनमें साधारण या रंगमार खेल्न सबसे प्रमित स्त्रिया डोप । १ देवकन्या । २ नटो। ३ पृथिवी। है। हम खेलमें विशेष कर दोडो मनुष्य खेलते हैं। ताबीज (अ.पु०)१ यन्त्र, मन्त्र या कवच । यह मोने, खेलने के समय पहले ताशको अच्छी तरह फेरफार कर चाँदी, ताँचे पादिके चौकोर या पाठ पहले म पुटके पांच पांच ताश पहली बार बाँटते है इस खेल में किसो भोसर रख कर गले में या बांह पर पहना जाता है।दूम रंगकी अधिक बटियोवाला पत्ता उसी रंगको कम से रोग, दुःख या अपदेवताको दृष्टि दूर होती है पहले बूटियोंवाले पत्त को मार मकता है। इस प्रकार दाले. यूगेपमें भो ताबोज पहननको प्रथा थो , भिउटेरोनमी को गुलाम मार सकता है और गुलामको बोबो, जीवीको के ११वें अध्यायके १८३ पदमें हम विषयका प्रामाम पाया बादशाह और बादशारको रक्षा रंगमारमें एका मबसे जाता है; उममें लिखा है- 'Therrfore shall ye श्रेष्ठ माना जाता है और वह सब पत्ताको मार सकता lay up these my words in your heart, in your है। मी प्रकार रंगसे मार कर जब हायके पांचों ताथ soul and bindl them for n sign upon your खर्च हो जाते हैं, सब फिर पाँच पाँच ताश बांट लेते हैं। hand that they may be as frontlets between इसो क्रमसे वावनों ताशके बंट जाने पर खेलनेवाले your e..." हिन्दनों में गजाग्नि चौर भयनिवारण अपने अपने जोते हुए ताओंको उठा कर रंग लगाते हैं। लिये, रोग शोक दुःख कष्ट काम करने के लिये और ग्रह प्रब खेल फिर पहले जैसा शरू होता है। पन्त में जिसके दोष शान्ति के लिये अनेक देवदेवी तथा ग्रहदेवतांक पास अधिक साशकी पतं पा जात है, उसोको जीत मम • कवच धारण करनेको प्रथा प्रचलित है। झी जाती है। 'कोट फीम' नामक एक दूसरा खेल है। २ पलहार विशेष । यह मोना या चाँदीका बना कर इसमें चार मनुष्य एक माथ खेलते हैं। दो दो मनुष्य हाथमें पाना जाता है। का जोड़ा या गोश्यों होता है। दाहिनी पोरमे चार Vol Ix 124