पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५०४

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लिगित-विजयाँसा य पक्षा० २०२४ मे ३.३२ उं० और देशा ८५. तिग्म जम्भ । वि०) तीक्ष्णमुख, जिसका मुंह तेज हो । २६ मे ८५३५ पृल्म अस्थित है। इसके उत्तरमे धैका तिग्मता (म० स्त्री. ) तिग्मस्य भावः तिग्मनाये सन् नल गज्य, पूर्व में काठगढ़ राज्य, पश्चिमम बडम्बा राज्य टाप । तीक्ष्णता । और दक्षि गमें महानदी है। करदराज्यों में य: मर्म निग्मतजस । स० वि०) तिग्म तेन यमा । तोक्षण तेज. छोटा होने पर भा यह बहुत मनुष्योंका बास है । भूपरि युता, अत्यन्त तेज । माण ४६ वर्ग मोल और लोकमख्या प्राय. २२६२५ है। तिग्मदोधिति ( स० पु०) तिग्म. दोधितिर्यसा, बहुव्रो । हिन्दीको मख्या मबसे अधिक है। यहां पार्वतीय और निग्मांशु सूर्य। जङ्गल छोड़ कर और मब जगह अच्छो फसल तिग्मभृष्टि (म त्रि.) तिग्म भृष्टिय स्य बहुव्री। तोष्ण होती है। मोट! चावल, तमाकू, कई, ईख और तेलहन तेजयुक्ता, अत्यन्त तेज। मरमों भादि यहां के प्रधान उत्पन्न द्रव्य हैं। प्रायः ४०. तिसमन्य ( म. वि. ) तिग्मः मन्य र्य स्य । १ उग्रकोधक, वर्ष पहले सुरतुङ्ग नामक किमो उत्तर भारतीय मनुथ- जिसे बहुत गुस्सा हो । ( पु० ) २ महादेव, शिव । ने जगन्नाथताथ मे लोटले ममय यहां भा कर इम देशक (भारत १३।१७४६ ) अमभ्य प्रादिम निवासियोंको भग! राज्य स्थापन किया . तिग्मरश्मि ( स० पु. ) तिग्मा रश्मयो यस्य । १ सूर्य । येही वनमान राजवके श्रादिपुरुष हैं। पहले यहाँ वि.२ प्रखरश्मि क. जिसको किरण बहुत तेज हो। तीन गढ़ थे, उन्हीं तोन गढ़ीसे इमका नाम तिगड़िया (क्लो) ३ प्रखर रश्मि, तेज किरण । ना तिरिया हुआ है। महाराष्ट्र प्रभ्यु दय के ममय तिग्मच ( म० त्रि. ) तिग्मा रुक यस्य । तिग्मरुचि, इस राज्य के कई शपःख वर्ती राजामीने अधिकार तेज कान्ति ।। कर लिये थे । इममें कुल १०२ ग्राम लगते हैं। राज्यको तिग्मत् ( म त्रि०) तक्षायुक्त, अत्यन्त तेज । पाय १८.०००, और राजख ८८२, रु. है। हमको मैन्य तिग्मशृङ्ग (म त्रि०) तीक्ष्णशृश, तेज सोंगोवाला। मख्या ३०० हैं। राज्य में १२ स्क ल है। अब कुछ सिग्म गोचिस ( म० त्रि. तिग्म शोनिः यस्य । तोक्षण पहिले यहां के राजा वनमा नी क्षत्रियवा चम्पमिह ज्वाल, तेज लपट, तेज पांच । महापान थे। तिग्महति (म त्रि.) तिग्मा स्तीक्ष्ण हेनयोर्य स्य सिगित (म त्रि.) निगित, चोखा, तेज। बहतीतोसावाल तंज प्रागको शिखा, ते लो। तिगुना (हि.वि.) तीन बार अधिक, तोन गुना । तिग्मांशु ( स० पु०) तिग्मा अशको यस्य । १ सूर्य । तिगुचना (हिं० कि. ) तिगुना देखो। (त्रि.) २ प्रखर किरण युक्त, जिमको किरण तेज हो। सिम्म ( को०) जयति उत्त जयति तिन म । (लो. ) ३ प्रखर किरण, ते प्रकाश । युज़िरूजिति जाध। उण १।१४ । १ वञ्च । २ पिप्पलो । । तिग्मात्मन् ( स० पु. ) उध के पुत्र एक राजकुमार। २ पुरुष शोय एक क्षत्रिय । (मत्स् पु. ५०१८४) ये राजा तिमानो क (म' त्रि.) तिग्म तीक्षा अनी यस्य । सिम नामसे प्रमिड हैं। तिमि देखो। (त्रि.) ४ तोक्षण, तीक्ष्ण मुख, तेज मुहवाला। ते। ५ तौक्षणस्पा युक्त । तिग्मायुध ( स० वि०) सिग्मतीक्षण प्रायुध यस्य । निगमका (म. पु०) लिम्मः करः किरणो राजग्राह्यो वा तीक्ष्णायुध, तेज हथियार । यस्य । १ सूर्य । २ उच्चराजगाध नृप, एक मशहर तग्मेषु ( स० वि० ) तोहावाण, तेज तोरि । राजां। तिग्मः का कर्म धा। ३ प्रखर किरण, सेन तिङ्गद ( पु.) इज दी वृक्ष । काश। निजम (हिं पु०) वह बुखार जो तीसरे दिन पाता हो, तिरमकतु ( स. पु० ) ध्र वशीय वत्सरके औरस और तिजारो। सुधोयोके गम में उत्पन्न एक पुत्रका नाम । - सिजवामा (हि.पु. ) किसी स्त्रीके तीन महीनका गर्भ ( भागवत. १३१२) होने पर उसके कुटाम्पसे किये जानेका उत्सव।