पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५०६

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५०२ तिविक्षा-तितुमीर पणादि हमहनशील, जो मरदी गरमी समान भावमे र्गत हैदरपुर ग्राममें सितमोरका घर था । १ौ शता मद्य कर सकता हो । (५०) २ ऋषिभेद, एक ऋषिका ब्दोके शेष भागमें रसका जन्म हुआ था। उस समय भी नाम । तस्य गोत्र पत्य गर्गादित्वात् यत्र । त तिता, इमो अगरेजोका प्रभुत्व बजगन्नमें उतना अटल न था। चोर गोत्रके युवा वंशज। डकैतोंके उपद्रवसे लोग सङ्ग में पा गये थे। तितिक्षा ( म स्त्रो० । तितिक्ष-प-टाप । १ समा, बचपनसे ही तितु अपने धर्म के प्रति श्रद्धावान् था। नास्ति । २ शीतोष्णादि हम्बमान, मरदो गरमी आदि अपने धर्म पर इसका जैसा अनुराग था, अपने सम्प्रदाय- महर्नको मामयं । के जपर भो उतनो हो ममता थी। शीतोष्णादि सहनका नाम तितिक्षा हैं : मुमतको १८२८ ई० में यह मक्का तीर्थ को गया। वहां वा- परले शम, दम और उपरनि माधन कर पोछे तितिक्षाका हाबि सम्प्रदायके नायक सैयद अहमदके साथ इसकी माधम करना चाहिए । शम, दमको माध विना निमिक्षा जान पहचान हो गई। उक्त सैयदमे दोक्षित हो कर साधी नहीं जा सकती। तितु अपने देशको लौटा और अपने नये मनका प्रचार अप्रतोकार पूर्वक चिन्ता और विलाप रहित हो कर करने के लिये इच्छ क हुा । उम ममय बङ्गालके मुमन- सब प्रकारके दुःखोका महना ही तितिक्षा है। जब मानोंका प्राचार व्यवहार प्रायः हिन्दौसा था। तितुने तितिक्षा साधी जातो हैं, तब सुखमे हृदय न तो प्रफुल्लित उन्हें सत्यधर्म को शिक्षा देने की चेष्टा को, देशस्थ सभी होता और न दुःखसे मन्सन्न हो होता है । तच सुख दुःख मुसलमानोंको अपने धर्म में लानके लिये उमने एक भी पोर मोह पन्तःकरणको किमो तरहसे क्षुब्ध नहीं कर कसर उठा न रखी। किन्तु मम्चान्त मुमलमानों से मकता। कोई भी इसका मतानुवर्ती न हुआ। थोड़े से मुसल. तितिक्षित (स' त्रि०) तितिमा माता अमा तारकादि. मान इसके उपदेश-वाक्यसे पाकष्ट हुए । इसने अपने वात् इतन् । क्षान्त, महिष्णु । शिर्थाने दाढ़ी बढ़ानेको कहा । एमका उपदेश था, कि वे तितिक्षु (स'• त्रि.) तितिक्ष उ। सनाशंसमिक्षउः । पा पर्वोपलक्षम वा पुत्रकन्या के विवाहमें नाच गान न करें, ३१२।१६८ । १ समागोल, क्षान्त महिष्णु। (पु.) सूद पर रुपये न लगावे, काछ दे कर धोतो न पहने २पुरवयीय एक राजा । महामनाके पत्र थे। इत्यादि। धीरे धीरे लोग इसके उपदेशसे ऐसे पावष्ट तितिभ (स पु०) तितीति गन्दन भणति भण-ड। इन्द्र हो गये कि गत दिन वे अपना काम धन्धा छोड़ कर गोपकोट, खद्योत, जुगन् । इमोके पास बैठे रहते थे, बाल बच्चे तथा रहस्योको तितिम्मा (प.पु.) १ अवशिष्ट अंश, बचा हुधा भाग। ओर कुछ भी ध्यान न देते थे। वहाँके राजाको जब २ परिशिष्ट, उपमहार। इमको खबर लगो, तब उन्होंने इस बातको घोषणा कर तितिर (म. पु०-स्त्री०) तित्तिरि पृषोदरादित्वात् साधुः। सित्तिरि पक्षो, तोतर नामकी चिडिया। दो कि कोई भी अपना कार्य नष्ट कर तथा बाल बच्चों को अवहेला करते हुए धर्मोपदेश नहीं सुन सकता । तितिल (म० क्लो०) सिलति स्निा यति सिल बाहुलकात्- जो रम पाजाका उलग्न करेगा, उमें उचित दण्ड दिया क हित्वञ्च । १ नन्दक, नाद नामका मट्टीका बरतन । जायगा। राजाने सबीको यह कह कर डरा दिया, कि २ सिलविप्पट, एक प्रकारका पकानान। ३ ज्योतिष में मात कारणों में से एक। उन्हें दाढ़ी पोछे सवा रुपये कर देना होगा। तितुमीर सितो( म स्त्रो० ) १ तैरनेको पछा। २ तरजाने. को यह बात माल म पड़ने पर वह पाग-बबूला हो गया ' को पका। और विधर्मी हिन्दूषोंको बलप्रयोग द्वारा अपने मतमें तितोषु ( स० वि० ) १ जो तैरनेको पच्छा करता हो। लाने लगा। १८३११०में इसने दल बांध कर राजाका २ जो सरने या उद्धार पानेको इच्छा करता हो। घर लट लिया और बलात् उनकी लड़कोकी पावरू सितमोर-चौबीम-परगना जिलेके बादुड़िया घामा पन्त- बरबाद कर दी।