पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५२

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इटमाटेउकी ८टना ( . कि.) १ खसिड़ न होना, भग्न होना इस मछली कई भेद होते हैं। मौके परीरम तीन दवाईट.कई कोना । २ किमो अङ्गा के जोड़का उबड़ काटे होते. दो पगल बगल में पोर एक पोटमें। जब जाना। ५ चलते इए क्रम का भङ्गा कोना, मिलमिला यह कप हो कर मनुष्यों को बिंधतो तो बहुत देर तक बंद होना जान रहना। ४ झपटना. भुकना। ५ वे दर्द में बेचैन रहते हैं। सबसे बड़ी विलक्षमता रम दम्म बांधकर पाना. पिल पड़न, ।। पाक्रमण करना मकती में यह है कि यह मुमे गुनगुमास्टके जेमा एक एकचारगो धाबा करना । ७ अकस्मात् प्राप्त होनः, प्रकारका शब्द निकाम्नती है। इनके पाकार और पायतनमें हठात् कहों में आ जाना। ८ पृयक होना, अम्लग होना। बहत विभिन्नता है। कोई कोई ४५ पञ्च पोर कोई ८ किमी म्यानका शत्र के अधिकार में जाना . १० चोगा ८१ इञ्च लम्बी होती है। मन्द्राजको टेंगरा मछलो होना, टबला पड़ना । ११ फनों का एकत्र करना । १. कानी किन्तु बङ्गालको रुपयेके ममान सफेद रङ्गकी होती शरीरमें दर्द होना । १३ निर्भन सोना, कंगाल होना। है। इसका स्वाद बहुत बढ़िया होता है। १४ बंद हो जाना। १५ हानि होना, टोटा या घाटा टेंघुना (हिं पु०) धुटना। होना । १६ रुपयेको बा को पड़ना वपुन न होना। टॅघुनो (हिं. स्त्रो० ) टेवुना देखो। टूटा (हि. वि.) १ भग्न. खण्डित, टुकड़े किया टेंट (हिं स्त्रो. ) १ कमर पापड़ी हुई धोतोको मंड- हा।२ कोण, शिथिल. कमर, दुबला । ३ धनहोम, ___लाकार ऐंठन । इसमें मनुथ कभी कभी रुपया ऐसा भो दरिद्र, कगाल। रखते हैं। २ कपासको ढोढ़ । ३ करोल। ४ पशुपों के टनरोटी (हि. स्त्री० ) चुगो। शरीर पर एक प्रकारका घाव। यह घाव देखनमें तो टूम (हि. स्त्रो० ) १ प्राभूषण, गरना । २ सुन्दर स्त्री, सूखा मालूम पड़ता है, पर उममेंसे समय समय पर रत खूबसूरत पोरत। ३धनो स्त्रो, मालदार औरत । ४ वहा करता है। चालाक प्रो। च पर मनु। ५ धका झटका। टेंटड़ (हि.पु. ) टेंटर देखो। व्या, साना । टेंटर (हि.पु.) पाँख के डेले परका उभरा इषा माम दग्नामेगट ( पु.) इनाम मिलनेवाला एक खेल। जो रोग या चोट के कारण होता हो। ८ मा (हि.पु०) ग्वगड. ट कड़ा। टेंटा (जि. पु.) एक बड़ा पक्षो। बमको चोंच एक ट मो ! मि. स्त्री० ) जो फल अच्छो सरह खिला न हो, बिलस्तको और पैर डेढ़ हाथ तक ऊँचे होते हैं। इसके कली। समूचे शरीरका वर्ण चितकबरा पर चोंच काली टें (हि. स्त्रो. ) सोतको बोली। किका (हि.स्त्रो• ) तालका एक भेद । टेंटार (हि. पु. ) टेंटा देखो। टेंगड़ा ( पु० ) टेंगरा देखो। टेटी (हि. स्त्री० ) १ करोल। २ करीसका फल, टेंगना (हि. स्त्रो०) टेंगरा मछलो। कचड़ा। टेंगर (हि. स्त्रो०) टेंगग होको सरहको एक मछलो। टेंट, (हि. पु. ) श्योनाक, मोनापाठा । यह टेंगरासे कुछ बड़ो होती है। टेट वा (हि पु.) १ गला, घेट । २ गूठा । टेंगग (हि. स्त्री. ) भारतवर्ष के अनेक स्थानों में विशेष टे (हि. मो.) १ तोतेको बोसी । २ बर्षको बबा. कर पवध, बिहार और बङ्गालके उत्तरके जलाशयोंमें वाद, इज्जत । पाई जानेवाली एक प्रकारको मछली ( Macrones टेंड (हि. स्त्री०) टिंट देखा। vittatus ) इसकी गरदन शरीरक सब असे बड़ी टेउको (हि.सी.) १ वह वस्तु जो विसी बसको बुढ़का और पछिको पतलो पोतो है। इसके शरीर में मोहरा ने या गिरमिसे बचाने के लिये उसके नीचे लगी रहती है। नहीं होता और सुरके किनारे लम्बी मई कोती है। २ तानेको डाँडोमें लगी हुई शुमारीको एक साड़ी।