पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५२१

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धनस पब, सशाङ्ग, सुखी. युवतीप्रिय, चतुष्पदय ता, धन | सिनोवालो तिथिमें यदि दासी, पत्नो, हाथी, घोड़ा, धान्यसंपन्न और उत्तम धोर होता है। महिषो पादि किसो भो एकका प्रसव हो, तो ग्टहस्वामो, नवमीका फल-सवमोके दिन जिसका जन्म हुआ को धनहानि होता है। यदि देवराज इन्द्र के यहां भा है, वह विरोधकर, साधुओंके लिए प्रगम्यस्थल, दूमर के | ऐमो घटना हो, तो उनको भी धनको हानि उठानो लिए पनिष्टकर-मतिम पत्र, दुश्चरित्र, पाचारविहीन, पड़तो है । जमे गगह-प्रसूत दोष वर्णित है, मिनोवालो- कजस और कठोर होता है। में प्रसव होनेसे वसे हो दोष होते है इस तिथिमें प्रसव दशमीका फल-दशमी तिथिमें जन्म लेनेवाला । होनसे ग्टहखामोको पायु पोर धमका नाश होता है। विद्याविनोदी, धन-पुत्र-युक्त, लम्ब कानीवाला, कन्दप - __ प्रतिपद भादि पन्द्रह तिथियां नन्दा, भद्रा, जया, रिक्षा से भी अधिक श्रीमपत्र, उदारचेता, प्रशस्त अन्त:करण. और पर्णा इन पांच भागों में विभक्त हैं। विशिष्ट और दयालु हुअा करता है। ___ उनमें प्रतिपदा, एकादशो और षष्ठो न तोन तिथियों एकादशीका फल-एकादशी तिथिमें जन्म शेनसे, का नाम नन्दा है। हितोया, हादगो ओर मालमो भद्रा वह क्रोधोत्कटमृति विशिष्ट, क्लेशसहनशील, सुभाषो, कहलाती है। तृतीया, अष्टमो पोर त्रयोदगोको जया योगादिका कर्ता, पात्मोयवर्ग का एकमात्र भर्ता, महा- कहते हैं। चतुर्थी, नवमो पोर चतुर्दशी ये तोन तिधियां मतिम पत्र, देवगुरुका प्रिय और अत्यन्त इष्ट होगा। रिता है । पञ्चमो, दशमी, पूर्णिमा, पोर अमावस्या इन हादशीका फल-हादशीमें जन्म लेनेवाला बह- चार सिधियोंका मा सन्तान-विशिष्ट, सर्वजनानुरागो, नृपमान्य, प्रतिधिषिय, ___ नन्दा तिथि, जिसका जन्म हुआ है, वह महामानो, प्रवासवासहीन और व्यवहारमें दक्ष होता है। पण्डित, देवता-भक्ति-निष्ठ और जातियोंका प्रियवत्सल त्रयोदशीका फल-इस तिथिमें जन्म लेनेवाला सुरूप- होता है। शरीर, सात्विक-भावश न्य, बाल्यकालमें सुखी, जननोको ___ भद्रा तिथिमें जन्म लेने वाला बन्धुवर्ग में मानमोय, प्रियकर, सर्वदा आलस्ययुक्त और एकमात्र शिल्पगुणवत्ता गजमेवी, धनवान्, संमारमे भयभीत और परमार्थ तत्व होता है। पण्डित होता है चतुर्दशीका फल-चतुदं शोको जिसका जन्म होता __ जयातिथिमें जन्म लेनेवाला गजप ज्य, पुत्रपौत्रादि- 8. वर विरुद्धस्वभाव, सर्वदा रोषपरायण, चोर, कठोर, सयत, शासनकर्ता, दोर्घाय विशिष्ट पौर महावित परवक्षक, परावभोजी और परदारामें अनुरक्त होता है। होता है। अष्णपक्षीय चतुर्दशीका फल पृथक हुआ करता है। ___ रिक्षा तिथि जिसका जन्म हुअा है, वह धनहीन, कृष्णा चतुर्दशी तिथि के परिमाण दण्डको ६ भागों में प्रमादविशिष्ट, गुरुमिन्दाकर, भासवेत्ता, गत्वहन्ता और विभक्त करें, प्रथम भागमें जन्म होने पर बालकका शुभ धार्मिक होता है। होगा, द्वितीय भागमें जन्म होनेसे पिताकी हानि, पूर्णा तिथिमें जिसने जन्म लिया है, वह धमप में, द्वतीय भागमे जननीकी हानि, चसयभागमें मामाको शास्त्रार्थ में जयो, तत्ववेत्ता, सत्यवादो और शुचेता हानि, पञ्चममें वंशका नाग एवं षष्ठ भागमें धनको होता है । ( ज्योतिष-मचन्द्रिका ) हानि, पोर आत्मवंशका नाश हुआ करता है। मृत्यु-तिथिका निर्णय । पूर्णिमामें जन्म होने पर, वह कन्दप तुल्य रूपवान, युवतीप्रिय, न्यायोपार्जित धनसम्पत्र, सर्वदा हष युक्त, ____ उम्र, राशि और खराङ्गको एक साथ जोड़ कर शूर, बलवान् और शास्त्रार्थ में दक्ष होता है। . युक्ताहको भाग करने पर जो बाकी बचेगा, उसके द्वारा प्रमावस्या तिथिमें जिमका जन्म होता है, वह कर, मन्दा प्रादि तिथियों का निर्णय होगा । एक बाको बचनेमे साहसिक, तज्ञ, त्यागगोल और सर्वदा चोरके काममें | नन्दा तिथिमै मृत्यु होगो । इसी तरह पाको बचनेसे भद्रा स्त रहता है। | तिथिमें, ३ बचने पर जयामें, ४ बचने पर रिशाम और Vol..x.130