पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५२७

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तिन्नेली १२३ जीते। बहुत से पलिगार सार उस समय भोकर एक पादरीने परवगेको पहले पहल रमाई बनाया । मुसल. स्थानोंके शासनकर्ता थे। किन्तु १७०८ में वे विद्रोहो मानो अत्याचार के समय रम्होंने पुत्त गोजोका पाश्चय हो उठे पौर शायद ये टोपू सुलतान को मदद करें, म लिया था। तभोसे ये अपनेको सेण्ट जेभियरको सन्तान डरसे पर जोंने उनके अस्त्र कोन लिये पोर दुर्ग. तहस करते पाये हैं। नहस कर डाला। १८०१ ई.में पुन: विद्रोह पारम्भ मदुरा और तिबवेली जिलेसे कहवा और चायके हुषा, भिन्तु रस ममय समस्त कर्णाट पोर तिववेला लिए मिहल देशको पादमो भेजे जाते है। अङ्गारेजों के हाथ रहमेसे कोई विशेष गड़बड़ो न मचो। यहाँके ३८ नगरोंमें तिबवेलो, पालनकोटा, तुतकुड़ी इम जिलेमें २८ शहर पोर लगभग १४८२ ग्राम लगते । ओर धोविलपतुर नगर प्रधान हैं। यहांको प्रधान भाषा हैं। लोकसंख्या प्रायः २०५८६०७ है। यहां हिन्द, तामिल है। इसके सिवा यहां तेलगू, कर्णाटो, गुजरातो, मुसलमान और ईसाइयांका वास है। मुसलमानों को हिन्दो पौर पतनुल भाषा भी प्रचलित है। यहाँ धान, अपेक्षा ईसाइयोंको संख्या अधिक है। मुमलमान प्राचीन चना, के गनो, चेना, उरद प्रभृति अब उपजाते हैं। अरवियों के वंशधर हैं । ये पपनको सोनागर या बोनागर ताकू, कहवा, प्याज, पान, लाल मिच, धनिया, तिल, कहते और पगारेज लोग उन्हें लाधि कहते हैं। ये सब डो, रूई, ईख और ताड़ यहां के प्रधान कृषिद्रव्य है। मत्सा व्यवसायी है। " तुतकुड़ोस भंड, घोड़ा और चलको रफतना सिंहलमें हिन्दुओं के मध्य बद्रीय (मजदूर और कषक), बेला होतो है और कहवा, ताड़को मिमरी पोर लाल मिर्च लर (लषिव्यवमायो ), शानाम (ताडीवाले ), परिया दूमरे दूसरे देशों में भेजो जाता है। उपकूल भागमें कोड़ो ( चण्डाल मरोखो नोच आति और जातिभ्रष्ट ), कम्मा- मोर मोर पकड़नेका व्यवसाय विख्यात है। एक समय लर ( शिल्यो । ब्राह्मण, कैकलर ( ताँतो ), स .ानो (वर्ण- ओलन्दाजाने या पकड़ने का व्यवसाय स्वयं अपने अधि- मकर और नोच जाति), अम्बत्तन (नाई) बबन (धाबो, कारमें कर लिया था। मान्यार, उपमागरमें अगरेजों- शेठो ( बनियां ), कशवन' कम्हार , क्षत्रिय, शेम्बाडवन ने १७८६ ई० में पहले पहल मुसा निकालनेका व्यवसाय (धोवर ), कगाकन ( कायस्थ ) प्रभृति जातियां प्रधान प्रारम्भ किया। यहां के मुता उतना उत्काष्ट नहीं हैं। शानान और परवर जातिके लोग इस देशमें एक है। शह वगदेशमें अधिक भेजे जाते हैं। प्रकारसे प्रधान है। परवर जाति के मभी मनुषा गेमन गासनको सुविधा के लिए यह जिला : भागां ओर ८ काथलिक ईमाई हैं । गामान लोग केवल ताड़के पेड़को तालुकांमें बांटा गया है. जैसे-तिब वेलो नालुक (पालम- खेतो करते हैं। इन लोगमि प्रेतोपामना प्रचलित है। कोटा ), तापोड़ारम् और तकराई तालुंके ( त तकुड़ो ), ब्राधण्य धर्म का प्रभाव यहां बहत कम है। बहसमे नामागुनिरो, अम्बाममुद्रम, तेनकाशो (शम देवी), ब्राह्मण भी प्रत जा करते हैं। श्रीविल्वपुत्तर, सातूर, शङ्करनादनारकोबिल ( श्रोविलि. वेशालर जातिमें कोटाई बेलालर नामक एक मम्प्र- पतुर)। रेल लाइन भी हम जिले में गई है। माचे मोर दाय है। वे मट्टीके टुर्ग में वास करते हैं। इनको स्त्रो- जून महिने में यहाँका ताप परिमाण वृक्षको छायामें ८५ जाति उस दुर्ग के बाहर नहीं आती। तथा दिसम्बर और जनवरो महान लगभग ७७ ___ समुद्र के किनारे तेरुचेन्दुर, ताम्रपर्णीक ऊपर पाप है। वार्षिक वृष्टिपात २५ च है। माशम् और चित्राके किनारे कोत्तालुम नामक स्थानमें २ मन्द्राज के अन्तर्गत सत जिलेका एक उपविभाग। तोन प्रसिद्ध हिन्दू मन्दिर हैं, कोत्तालुमका शिवमन्दिर यह सिवेली और सकरनाइनार-कोविल तालुक लेकर शहरके दक्षिण 'तेजागो' अर्थात् दक्षिण काशो नामसे संगठित हुआ है। मशहर है। ३ उक्त जिलेका एक तालुक। यह प्रक्षा० ८.२६ १५४२१०में पुर्तगीज सेण्ट फ्रान्सिस जेभियर नामक से८५७० और देशा० ७७ २४ से ७७ ५१