पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५२९

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भन्नाक्येष देखनमै पाते हैं। कहा जाता है, कि यहां तित-हिमालय उत्तरमै एक देश । तिब्बती भाषामें एक राजभवन था। इसका नाम 'पो' । म उत्तरमें नतातार, पूर्व में • पर्वनमें एक हनुमानको पातनि सदो हुई है। चीन, दक्षिण में हिमालय पर्वत पोर पश्चिममें तूगन है। यहां कहीं भी सत्को शिलालेख नहीं पाया जाता। इनका परिमावफल १८.५.. वर्गकोस और लोक जत तालाब चारों पोर बड़े बड़े पत्यरंसि बंधा है। चूना, संख्या प्रायः ५.००.००है। इसके दक्षिणमें जैसा सुर्की पथवा और किसो प्रकारके मसानेका व्यवहार हिमालय पर्वत ।। उत्तग्में भी वैसा ही एक अत्यन्त की भी नहीं है। पहले इसमें सोड़ियां लगो हुई थीं। विस्तीर्ण पर्वत है। चोनो इस पहाड़को 'कियुनलन' इसके एक तरफका भाग टूट फट गया है । प्रवाद है, कि हिन्दुस्तानो 'कैलाम' कहते हैं। पूर्व और परिममें इसी भम्नमुखमे तिपागडो नदो निकालो ., किन्तु उस बहुतसे पर्वत है। इन पर्वतोसे एसियाको पातलो स्थानसे जम्मका निकलना अनुमान नहीं किया जाता है। नदियां निकली है। यह देश अत्यन्त उक्त पोर पोत- किसी दूसरी दिशासे तिपागडीको उत्पत्तिका कारण जल प्रधान है। शोतका अधिक प्रादुर्भाव होनेसे यहां बात नाली है। प्रवाद है, कि इस दुर्ग की प्रतिम रानो एक उबिद नहीं जनमते है, इससे यहाँ जलावन दुष्प्राप्य । दिन गोवाहित ग्यसे उतरते सतत अदके मध्य रथके साथ इस देश में तरह तरह के पक्षी पाये जाते हैं। गाय, भैम पहख हो गई', सभोसे य इजालमें परिणत हो गया है। पौर घोड़े तथा खवर ही यहां के साधारण पक्ष । एक दूसग प्रवाद है, कि लुपदराजने इस दुर्गका निर्माण हिमालय-पथ पर बलगाड़ो अथवा मवेशी स्वादि नहीं किया। वे युरागढ़में रहते और जमीनको एक मुरंग जा सकते है, मो कारण मेंड़े और बकरे हो बोझ हो कर यहां पति थे। यहां उनका एक पखाड़ा था। ढोनेका काम करते है। चमरो नामक एक प्रकारको पासनीके राजा भी सुरंग हो कर इस पखाड़े में पाते थे, गोजाति पाई जाती है, सोकी पूछसे चामर बनता है। किन्ह पदराज उन्हें कहीं भो देख नहीं सकते थे। चमरी देखें। कस्तरी मग भो रस प्रदेशमें बहुत । तिपाड़ (हि. पु.) १ तोन पाट जोड़ कर बनाई हुई इस देशके बकरके रोए से दुशाले बनते हैं। अब देखो। चीज । २ वह जिममें तीन पर्व हो। ३ वह जिसमें तीन तिब्बत के कुत्ते बहुत बड़े पोर बलवान होते हैं। किनारे हो। यहांको खानों में सोना, पारा, सुहागा पौर नमक पाया तिवारी (हि. स्त्री० ) परमातमें प्रापसे पाप होनेवाला जाता है। तिब्बतके लोग देखने में बहुत कुछ तातारोंसे एक प्रकारका छोटा भाई। इसके पत्ते छोटे और सिरे मिलते जुलते है। ये पलस, शान्त और सन्तुष्टचित्त पर नुकीले होते हैं। इसमें सफेद फूल गुच्छोंमें लगते हैं। शान पोर जनी वस्त्रं बुनना हो इन लोगोंका प्रधान है।इसके दूसरे नाम-मकोय, परपोटा और छोटो रस शिल्प है। इनका बाणिज्य चीनके साथ चलता है। भरी। मुर्दे को जलाने तथा गाड़ने की प्रथा इस देश में नहीं है। तिरा (हि.पु.) बड़ा कुषा जिसमें तीन परमे एक ये पारसियोंकी नाई मुर्दे को श्मशानमें फेक पात, साथ चल सके। केवल याजकको देहको जलाते । मेवा मांसपन तिबदी (हि. वि०) जिसमें तीन रस्सियां एक साथ एक लोगोंका प्रधान खाद्य है। बहुतसे लोग कचा मांस खात एक बार खोंचो जाय। है। ये सब भाई मिल कर एक खोसे विवाह करते। तिवारी (हि. वि.) १ तीसरी बार । (१०) २ वह मध ___ बड़े भाई सो पमन्द करने के अधिकारी है। सिन्बतबामो जो तीन बार उतारा गया हो। १ वह घर या कोठरी बोह । इनका याजकमम्प्रदाय लामा' नामसे मिल जिसमें तीन बार हो। है। दलाई लामा सबसे प्रधान पौर तशि-लामा उसके तिबासी (हिं.वि.) तीन दिनका बासो । नोचे हैं। तिब्बतवासियोंका विश्वास है कि दलाई लामा किबी (हिजो) सारो। ., स्वयं रखर है, मनुष्य भेषमें मनुषके मध्य रहते, Vol. I. 182