पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५३

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यह उसमें इसलिये लगाई जाती है जिसमें ताना जमीन टेकाना ( नि.) १ किसी वसको खे जनिमें सहारा पर न गिरे। देनेके लिये थामना । २ सहारा देने के लिये थामना। टेक (हि..) १ किसी भारी वस्तुको बड़ाए या टेकानी (हि.सी.) बह. लोहको बोल जो परिये को टिकाए रखनेका खंभा, चौड़, थम। २ सहारा, मोंठने रोकने के लिए लगी रहती है, किलो । को चोज । ३ पात्रय, अवलम्ब । ४ बैठने का ऊँचा चबू- टेकी (जि. पु.) १ प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहनेवाला। २ दुरा सग। ५ दृढ़संकल्प, पड़, हठ, जिद। ६ सस्कार, ग्रही, हठो, जिही। पादन, बान। ७ बार बार गाये जानेका मोतका पद, टेकपा ( पु.) १ कते हुए सूतको लपेटनेका चरखे. स्यायो। ८ छोटो पहाड़ी, ऊँचा टोला का तकला । २ वह वस्तु जिममे कोई चीज पड़ाई जाती टेकचन्द--सरहिन्दवासो एक हिन्दू कवि । इन के पिताका है। ३ गाडोको जपर ठहराये रखनेको एक लकड़ी। नाम वलराम था। इन्होंने उर्दू भाषा में 'गुलदस्त इश्क' यह उसी समयमै काम पाती है जब गाड़ोसे एक पहिया नामक ग्रन्थकी रचना की है। इम ग्रन्यमें आदिमे निकाल लिया जाता है। अन्त तक कामरूपका इतिहास भरा है। ये पालमगौरके टेकुरो (हि.सी.) १ वह सूपा जिममें फिरको लगो समयमें विद्यमान थे। रहती है। इसके घूमनेसे फँमो हुई का चूत कत कर टेकचन्द मुन्गी-एक हिन्दू कवि । इना कविता-मम्ब- निपटता जाता है, मूल काननेका तकला । २ रस्सी घट धीय नाम बहार था। क्षत्रिय होने पर भो इनको नेका तकला । ३ तागा खोचने पोर निकालने का बनाई हुई सभी किताबें उई में हैं। यों तो इन्होंने बहुतः चमारोंका सुपा । ४ मूर्ति बनानेवालों का एक सो किताबें रची हैं, मगर फारमो मुहावरेकी किताब औजार । इमसे वे मूत्ति का तल साफ पोर चिकना करते "बहार जाम" और "नवासि-उल-मामदिर" मशहर है। ५ जुनाहोंको एक फिरको। या बांसको डाँडोके हैं। पहली किताब १७३८ ईमें और दूसरी १८५२ एक छोर पर लालिगा कर बनाई जातो है और रसी ई० में रची गई है । उदो पुस्तकांके मिया ये "अबताल नोकमें रेशम फंसाया रहता है। सोनारीको मलाई जरूरत" नामक एक ओर भी मुस्तक बन गये हैं। जो गोप नामका गहना बनाने के काममें पाती है। टेकन (हिं. पु०) कसी भारी चीज । टिकाए रखनेक इमसे तार खींच कर फंदा दिया जाता है। लिये उसके नीचे में लगाई जानेवाली वस्त्र, अटकन, टेक्कली-मन्द्राजके गजाम जिलान्तर्गम इमो नामको जमो. रोक। दारो तहसोलका एक शहर । यह पक्षा० १८३० । टेकना (हि.क्रि.) १ महारा लेना, पाश्रय बनाना।२ और देशा० ८४°१४ पू०. रोडसे ५ मोलकी दूरी पर ठहराना। महारनिये घामनः । ४ हायका महारा अवस्थित है। टेली राज्य के प्राचीन अधिपति रघुनाथ लेना। ५ एक प्रकारका जंगलो धान, चनाव। देवके स्मारकमें कोई कोई से रघुनाथपुरम भी कहते टेकनी (हिंस्त्रो० । टेकन देखो। है। लोकसंख्या प्रायः ७५५७ है। वर्तमान सम्बाट के टेकर ( पु.) १ टोला, ऊँचा धुम । २ छोटी राज्याभिषेकको यादगारोमें यहां टाउनहाल बनाया पहाड़ो। गया है। टेकरी (हि. स्त्रो०) टेकरा देखो। टेचिन ( पु.) एक प्रकारका काँटा। इसके एक ओर टेकली (हि.स्त्री० ) वह यन्त्र जिसमे कोई चोज उठाई माथा और दूसरी पोर पेच पौर ढिबरी होती है। या गिराई जाती है। टेढ़ (हिं० ५.) १ वक्रता, टेढ़ापन । २ नटखटी, ऐंठ, टेकान (हि. पु.) १ टेक, चौड़, श्रम। २ ऊँचा चबूतरा पकड़ । या संभा। इस पर बोझा ढोनेवाला.अपना बोझा पड़ टेदविडंगा (हि. वि. ) वक्र, टेका, बेडौल । कर कुछ काल तक पाराम लेता है, परम ढोहा। टेढ़ा.(हि.वि.) १ वक, कुटिल, जो एक सोध न Vol. I. 13