पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५३२

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५२८ तिम्बत बन प्रतिष्टित कर एक मन्दिर बनवाया और उमका सचम मन्दरवाशा प्रिय-पावाम था, यहाँ उस देवबंधिता नाम 'जमलो' रकवा । जमलोका पर्थ पचन है । निम्न खोका पदचित्र देखा जाता है। नतम के उतर गुम पुरखके पूर्व में लवमन्य नामक एक बहुत विस्त मम- माला नाम के जचे पहाड़ पर विख्यात तन्मयो नामन सन्त क्षेत्र है, जो पहले लासा शासनकर्ताओं के अधीन बारह अप्सराओंका वास था। पास भवने इन्हें शपथ था। प्रभो यर नवाल के अधिकारमें है। नम के पूर्व में जोङ्ग दिला कर तोथिक (बायण )के पंजेसे मोहधम को दुमोङ्ग नामक एक स्थान है। यहां एक बड़ा दुर्ग और रक्षा तथा भारतवर्षसे शत भावमें ब्राह्मणों का पाना बन्द कारागार तथा बहुतसे मसाराम है। राम के दक्षिणमें कर दिया था। सिब्बतो लोगांका विश्वास है कि तमा किरोङ्ग नामक स्थान है. यही उच्च तिब्बतको अन्तिम शत्र भावमें कोई तोथि क तिब्बतमें प्रवेश नहीं कर मामा है । यहाँका ममतन-लिङ्ग नामका पाश्रम पुरातन सकता ; किन्तु यह ठीक नहीं है। भारतवर्ष से पब भी भोर पवित्र है। तिब्बतके चार विख्यात चोभो (बुद्ध) ब्राह्मण परिबाजक तिब्बत देखने जाते हैं। इस पर्वत मन्दिरों में एक को कथा पहले कही जा चुकी है. एक पर गुङ्ग थाना गिरिवर्म है। इस गह हो करं उत्तर दूमरा पर्थात् चोभो-प्रोयति मसान-पो मामक मन्दिर को पोर जानसे टेशिय नामक जिना मिलता है। यहां का इस स्थान में विद्यमान है। इसके दक्षिणमें मम्ख नयाकोट सम्प-माङ्ग नामक पण्डितका तपोवन, गुहा पौर समाधि (नवकोट ) पोर अन्यान्य स्थान नेपालाधिनत है। इसके स्तम्भ है। ये हो तिब्बतोय धर्म के शियेत् शाखाके मत- पूर्ववर्ती ननन वा नमम तथा उसके समीपका. गुपथङ्ग प्रवर्तक थे। यहाँ चोन गजाको एक दल सेन्य और नामक स्थान जैत्मम मिलरप, व-लोचव और तैप कुगः एक सीमान्तरक्षक सेनापति है। एमके पर्वमें तेसि नामक सोन पगिड़तों के जन्मभूमि है। चुम्बर नामक जोङ्ग (दुर्ग ) और उत्तरमे शेकरदोजें जोङ्ग ( दुर्ग ) स्थानमें मिलरपको मृत्यु हुई थी। मलमके मोचे नतम तथा उसके समोप एक कारागार अवस्थित है। इसके नामक गिरिवर्म (घाटी) नेपालमें प्रवेश करनेका एक निकट शेकर छोदे पाश्रम है। इस पाश्रमके पाम पथ है। पा-शाक्य नामका सहाराम है। जिसमें एक रतना लम्बा प्रकत सिञ्चतके प्रधानत: दो भाग २-तमाङ्ग और चौड़ा घर है कि उसमें बहुत पमानीसे घुड़दौड़ हो सकती ज (बू) ये भो फिर चार रु पर्थात् सामरिक विभागों- है। इस घरका नाम दुखङ्ग-कों है। यहाँ माविक में विभक्त है । यथा-उस, येन, यामह और कलम । बौडमत प्रचलित है । पा-शाका पाश्रमसे उत्तरमें एक होर राजामों के समयमें यह प्रदेश छ थि-कोर नामक दिनके रास्ते पर, न तग जोङ्ग (दुग) नामक स्थानमें विभागों में विभक्त था। याम्टो नामका दप्रदेश एक खहलामा गोनशो शाटुब नामक महापुरुष मिह हुए थे। स्वतन्त्र थि-कोर के जमा गिना जाता था । नेपाल-सोमाके यहां पा-गोन्थिम नामको एक गुहा पोर पारिंग-को जोमोबाकर मामके ऊँचे तुषारमरिहत पर्वतक नामक एक प्रकारके खेतवर्ण अक्षरों में उत्तीर्ण शिला- निकट मिलरप पण्डित पांच परो भिड हुए थे। लब-छो लेख है। इसके समीप त्रिकोण पाकारका एक काला पत्थर मामक शिखर पर तोरिङ्ग तशे-जा नामक एक ज्ञानोका देखा जाता है जिसे लोदोन कहते है। प्रवाद है, कि वास स्थान था। इसके मूल देशम पाच तुषार-इट है, यह पा-गोम लामाके पिणको प्रस्तरोभूत पक्खा है। जिनके जस्तका वर्ण परस्पर विभिव है। ये द उन बहुतसे भला इसके चटके हुए टुकड़े उठा ले जाते है। जानोके नाम पर उत्सर्ग किये गये है। इस स्थानके घहु-जीजके उत्तर में एक तुषागत बचो पर्वतमाला पायम उत्तरमें कोमा नामक एक बड़ा तुषारद है, है। इसके दूसरे पारमें अल्यो नामक होर (मनुख. जो तिब्बतके चार प्रधान तुषार-दोममे एक है। इसके भक्षक ) जाति के लोग रहते पोर ताई-होर करतात समोप रिवो . सगसमान नामक एक बहुत पवित्र स्थान थे। ऐसा साधारण लोगोंका विश्वास है कि उस पर्वत. है। यहीं पनसम्भव नामके प्रसिप बौवाचायको खोमाताको तबारराधिक गत बर जमीन पर मरनेसे