पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५३३

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तिब्बत ५२९ तिम्बतका बहुत पनिष्ट होता है। इसके अलावा है। यहां एक पाच यजनक निझर है, जिसके जलसे विषेखालो (मुमलमान) भो वाम करते हैं। ये काम रोग नाश होता है। रसके सिवा हरपाय तोको निङ्ग गरके अधीन गान गोगोंके देयके बाद न्यानम् नामको मुर्ति पर्वत पर खुदो हु । तमाङ्ग-पो नदोके किनारे विस्त त मरभूमि पड़ती है और फिर उसके बाट बञ्चिया तमाङ्ग र उपत्यकामें रिन नप जोङ्ग अवस्थित है। नामको एक मुसलमान जाति रहता है। उन लोगोंके यह रिछन पन नामक राजाके हारा बनाया गया है। साथ बौद्धधर्म की चिरश ता चलो भा रही है। यान निकटवर्ती यव-ग्य नाम : ग्राम पञ्छन रिनपोछे नामक खननामक स्थानमें बहुतमे मृत मनुष्यों को हण्डी और तगिलामा का जन्म हा था। 14 उपत्यकाक नामा खोपड़ी पाई जाती है। गायव पौर दिगुनप पाश्रमको स्थानाम बहतसे लामाोंने जन्मग्रहग किया था। यहां लड़ाई में जितने मनुष्य मारे गये थे, शायद ये उन्हों को पनेक तपोवन है, किन्तु लोकमख्या अधिक नहीं है। पस्थिमाला होगी। पा-शाक्य सागमके निकट नमा: ग्यन्-तसे नगरके दक्षिणमें पर्वतमाला के दूसरे बगल . पो नदी प्रवाहित है। इसके तोरवर्ती लहरी , मरिश रहि नामक स्थान है। रम के पूर्व में मिवाल फोलह मामक और पुम-त्म होस प्रभृति स्थान सान् गवर्मेण्ट के गजाका जन्मस्थान फोल ग्राम है । तशिल-इन पो अधोम है। इन सब स्थानों में बहुत से पवित्र मूर्तियां पाश्रम के दक्षिण-पूर्व में किन करल नामको पर्वतमालाके देखी जाती है। यहांका खोपु-यम-छेन नाम का स्तम्भ दूमरे पारमें सोन-जोङ्ग नामका दुग और एकप्रदके मध्य थोपुलोचवने बनवाया है। फुन-त्सको लिङ्ग नामक कागगार निर्मित है। इस स्थान के बाद टिशिय मोज पाश्रम कुन खियेन जोमो नङ्गपने बनाया है। इस है। इसके दक्षिण में मोन-दजोङ्ग नामका राज्य है, जिसे खानमें ता फुग्ण-त्मो-निङ्ग प्रभृति स्थानोंमें गै-व नामक भारतवामो सिकिम कहते हैं । ग्यन्तमे नगरके ठोक बोहाचार्य को शिष्यपरम्परा वास करतो तथा बोनशास्त्र. दक्षिण में पर्वतमाला के दूसरे किनारे फगरो-जोङ्ग नामका कालचक व्याकरण और विचार प्रन्यादि पढ़ती थी। दुर्ग प्रवस्थित है। यही लामा गवर्मे गटका मोमान्त दुर्ग फुन-त्मो-लिङ्गमे जोमङ्ग मत प्रचलित हुआ है। यहाँ है। हमके दक्षिण-पूर्व में ल को-दुक भूटान । राज्य है। कुबल नामक सम्राट के गुरु टोगोन-फग-पा रहते थे। उत्तर न्यङ्ग नामक स्थानसे खरून पर्वतमाला पार बाद जोनाप माम्प्रदायिक मतको श्रोडि हो जाने होने पर यग्दोक (यम-दो) नामक स्थान मिलता है, जो यह प्रायः खोपमा हो गया। इसके दक्षिण में तशि-न इन- ठोक फगगेके उत्तर में पड़ता है। यहां तिब्बत के प्रधान पोखाराम है, जो ग्ये -गदुन्दुव द्वारा स्थापित हुआ है। चार टर्मिसेयर-दोक-युनत्यो नामक एक द है। यहां अमिताभ बद्ध मनुष्क प्राकारमें पछम-थम- पाशोतकालमें इदका उपरी भाग जम जाता है। उस समय शुनपा नामसे प्राविभूत हुए थे । तशिल हुनपो नामक इदमेसे ववध्वनिको नाई शब्द हमेशा निकलता पात्रममें उनकी कई एक जन्मको समाधिया है। इसके रहता है। किसीके मससे यह शब्द समुद्र या सिंहको ममोप कुन स्थाब-लिङ्ग नामका प्रासाद पन-तनयर गरज पोर किसीके मतसे वायु का शब्द है। सदको निमसे बनाया गया है। तशिलान्पो पायम के पूरबको मछलियां छोटी और सब एक हो भाकारको होतो है। उत्तर न्या. नामक स्थानमें तिब्बतका तोमरा प्रसिद्ध नगर यरदोक नामक स्थानके पूर्व में सागर-पो पौर विध-छु नाम- ग्बन्-त्से अवस्थित है। इस शहरका व्यवसाय बहुत को नदौके सङ्गमस्थलमे कुछ पूर्वको हट कर जङ्ग नामक बढ़ा चढ़ा है। पहले यहां मितु बतन कुन समझे स्थानमें प्रतिवर्ष मामा लोगों को सभा होती है। इसके नामक गजाको राजधानी थो। उक्त राजाने यहां गोमा निकटवर्ती थका नदोके किनारे हुसङ्ग-दोन वङ्ग गन्धील यो नामक संघागम स्थापन किया। तशि. नामका मन्दिर राजा रजपचन हारा निर्माण किया गया सकुन्यो पात्रमके दक्षिणमें छोईकित् दोज नामक एक है। इसके पूरब में लेगपर-शेरव-खपोन नामक स्थानमें लोग- सन्यासीका- तपोवन ए, जिसे लोग गर्मो शाईलोग कहते लोदन शेवर नामके देवताको दो स्वयम्भ, प्रतिमायें । Vol Ix. 133