पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५३६

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१२ हुए हैं। तिब्बती योग बन समस पार्वतीय प्रदेशीक । उनपरानेके लिए म जार पुर जपरं तक बसे मनुचोको मोन कहते है। लदायके लोग अपनको जाते हैं, इससे पधिक जपर जानेका साहस नहीं भोटिया बतलाते है । गोबि-मरके दक्षिणमे थोप नामक होता। काति वाम करती है। ये उपगुर जातिमे उत्यय हए धर्म-बौडधम हो समम्त देशका प्रधान धर्म है। है। होर वा हार-प जाति मडोम्नियाक क्लथ जातिम छोटे तिब्बतके लोग मिया मुसलमान हैं दलाई लामा उत्पत्र हैं। ये उत्तर तिब्धतमें वास करते हैं। मसलमान बोहवम के म प्रधान याजक हैं और वे लासा नगरमें लोग माधारणतः ललो नामसे विख्यात है। रहते हैं। तशिलामा हितोय याजक है और वे साम्म, वेशभूषा-धनी और मम्मान्त लोग ग्रीष्मकालमें चोना. (ब्रह्मपुत्रके किनारे ) तशिल हुनपो नगर में रहते हैं। माटन और शीतकाल में उसो माटन नोचे पशु रो माधारण याजक (अमगा) "गइलङ्ग'नामसे पुकारे जाते लगा कर पहनते हैं । साधारण लोग ग्रीष्ममें रोए के बुने हैं। इनक बाद "तोहब" वा "तुप्प"गण धर्मशासा-व्यव हए कपड़े और शोतमें में डके चमड़े पहनते हैं। सभो सायक शिक्षार्थी है। ये ८१० वर्षको अवस्थामें लोन ता पहनते हैं। साधारगा लोग गौतमें प्रायः सान किसो धर्म मन्दिरमें शिक्षाके लिये प्रवेश करते हैं।१५ नहीं करते तथा कपड़े भी मर्वदा नहीं धोते हैं, इमी वर्षको उमरमें इन्हें "तुष्प" उपाधि पोर २४ वर्ष में "गए- सारण उनके शरीरमें थोड़ा जल पड़नसे हो नमड़ा फट लङ्ग" उपाधि मिलता है। बोडधर्म के लोग यहां दो आता है। शहर के लोग जो प्राय: घरसे बाहर नहीं जाते सम्प्रदायों में विभक्त हैं-"गेलुग" और "शम्पर"। स्नान नही करते हैं और वे मान करनको अपकम प्रथम सम्प्रदायक या नक पोले वस्त्र पहनते हैं भोर विवाह समझते हैं। यहां कोई भी माबुनी व्यवहार नहीं नहीं करते । किन्तु हितोय सम्प्रदायक याजक लाल कर: एक प्रकारके यक्ष निर्यामको जलमें बट कर वस्त्र पहनी और विवाह करते हैं। लामा, गरल और स्मा काड़ा माफ करते हैं। तप्पक मिवा इनमें ओर भोई एक संन्यासो से जो व्यव-पार्मतीय प्रदेश सभो मनुष व्यवसाय करते भी तरह काम काज करते हैं। हैं। ये मान से नवम्बर माम तर उपत्यकामें रहते . ____ उत्पा-किसो गोन्प वः गुम्बके नामाको मृत्य है। पून लोगांकी स्त्रिया कुछ कुछ कृषि कार्य करतों हैं। तिथि के उपलक्ष्यम प्रति वर्ष उमी गुम्बमें उत्सव और उत्पन्न समाजमिसे पुरुष चावल, पाटा, रुई और चोनो रोशना को जाता है। तशाल हुनपो गुम्बमें प्रतियष नयार कर तिब्बतको ले जाते और वहां सुहागा, नमक तीन शर इसी तरह का उत्सय हाना है। जिम दिन और पशम लाते हैं। नवम्बरमे मार्च तक वे पर्वतको यः14:ले पहन बोधर्म प्रचार हुआ था. उसो तिधिक छोड़ कर अलकनन्दा किनारे कुरुम्याग और नन्दोत्रयाग- अनुसार प्रतिवर्ष लामा नगरमें 'लामा भिउहलुम' नामक में श्रः कर नजावाबाद के बणिकांक साथ बाणिज्य उत्सव होता है। इसके सिवा कनसुपच, सुसपैच, गैसपेच. करते हैं। ये चमरो गोको बोझ ढोमेक काममं नियुक्त मसूप मेसुपेच, गोमुङ्गपंच, गैजिपेच, लाल पेच, चिन्दूपेच, दुःपेच, करते हैं। यह पशु १५ से २०० पौण्ड अर्थात् २॥ मन कम्य रपेच पौर लुक कोपेच नामक बारह वार्षिक धोम दो सकता है । तिब्बतमें पर्वत और नदी में स्वर्णरेण है।१०२५१ मेन लोगों का पब्द शरू हुआ है। ___उत्सव हैं। इन लोगों में वाह स्वत्य संवसर प्रचलित पाया जाता है, किन्तु सुहागाका पाटर बाणिज्य व्यापारमें से १४३ ०के मध्य शाक्यकालमें, दूसरे बहुत अधिक है। बहुत दिन इए, कि यहां चायका व्यव- पशोककालमें (शाक्यको मृत्य के ११० वर्ष बाद ) भोर साय चल रहा है। लगभग चार सेर चायका एक बण्डल सोसरे कनिष्ककालमें (शाक्यको मृत्य के ४०० वर्षसे भी २४, रुपये में बिकता है। भेड़ और मकरोके रोग के अधिक समय बाद) मारतवर्ष में जो बौदग्रन्थ होत लिए इन दो प्रकारक पापोंका पालन की यहाँके निम हुए थे, तिब्बतवासो बोहों के पाव भो उन्होंके मतान- अंगीक अधिवासियों का मुख्य व्यवसाय है।पा-पालक यायी थे।