पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५४९

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पतने ससन ऐन प्रदेश पर, हितोक्ने पामो चोर अधिकारोए। गोमनके दो सब मदन पर तसोनय प्रदेश पर पोर बतीयने ७ प्रदेश पर अधिकार गोधुगनने अपनी सभा शाक्य पणितको बुलाया था। जमाया। बतोय थि-धुन यव-लुन नगरमें राजधानो उठा स घटनाले शाक्यसमा राम प्रधान याजकोने तिब्बतके कर ले गये। थि कुनके अधस्तन पञ्चमपुरुष जोबोनार राजनीतिक युगमें मुगलों के धर्म-मत परिवर्तनका एक जोर -न-रिनपोछे और पल-फगमो.दु-प नामक दो नया युग गिना। लामापोंका विशिष्ट रूपसे परिपोषण करते थे। इनके पोत्र शाक्यगोन प्रसिद्ध शाक्य पण्डितके परिपोषक थे। तिब्बतमें याजकाधिकार ।- (१२७०.१२४. ..) चोन देश के प्रथम मुगल सम्राट् प्रसिख कुबले (काव) शाक्यगोनके पौत्र सग प-रिन-पोछेको चीन-सम्राटके यहां ने शाक्य पण्डितके भतीजे फग प लोदोई ग्वन्तवन खूब खातिर होती थी। तग-ख -फोदममें जो विख्यात प्रासाद है, वह इन्होंका बनाया हा है। इनके पुत्र नामक पण्डितको पपनी सभा में बुलाया। वे १८ वर्ष की शाक्य-गोन-पो (२य ) ने युम्ब -लगम प्रासादमें एक अवस्थामें चोन-राजसभामें पहुंचे। उनके पानसे सम्बार सहारामको प्रतिष्ठा की। ने उन्हें स्वर्ण सनन्द, अपनी मुहर, मणिमुलाके पलाहार, तिम्मतमें मुगल अधिकार ।-थिकुनवशीय राजगण मणिमुमाका मुकुट, स्वर्ण दण्ड पौर स्वर्गसूत्रका त. बहुत ही दुयल थे। जिस मुगलवारने भारतवर्ष पर छत्र तथा निशान पादि उपहारमें दिये। पीछे सबाटने आक्रमण किया था, उसी छोड्रिग्सखाने १२वीं शताब्दीक उन्हें अपना गुरु बनाया पौर बौषधर्म अवलम्बन किया। प्रथमभागमें बातको बातमें समस्त तिब्बत पर अधिकार अन्तमें सम्राट ने गुरुको प्रछत तिब्बत ( पोर ससन प्रदे. जमा लिया । केङ्गिसके बाद उनके एक पुत्र गोगान राज्य में शके १३ जिलापोंके साथ) खम् पोर पामदो प्रदेव दाम में दिये । रस समय शाक्य लामा सिम्बतके खाधोन पासन थि-बुनकी वंशावली- खिछुन बा पिछुन जोवोवम् कहुबलै (कवलाह) का अर्थ अवतार वा अलौकिक जन्म- विशिष्ट है। होदक्यि -द-घर शाक्य-गोन् (१म) युमचन (६ पुत्र और) शाक्यकशि तिब्बतके १३ जिले जिन्हें वसाने फगपको दान में दिये, उनके नाम नीचे दिये जाते है- समन् प्रदेशमें - जो गह प्रग परिन पोछे दर्भ (अन्यान्य कई मनुष्य ) शाक्यगोनपो (२य) उ और जोवोनल व्यार जे-शाक्य रिन्छेन . * अगिसखा तिब्बतमें गिर ग्यलपोपा खैद-मुन नामसे मशहूर थे। ये फोर्ग बाहदुर (बहादुर ) नामक कालका ( कहलकह ) राजाके औरस और रानी दुमान (कहलान ) के गर्भसे इनका जन्म हुआ था । ३८ वर्ष की उमरमें ये पैतृक सिहासन पर बैठे। २३ वर्ष तक ये भारत, चीन, तिगत और एशियाके अन्यान्य प्रदेशों पर कमण करते रहे। बहु. तोको इन्होंने जीता था और बहुतोंको लूटा भी था। वर्षकी अवस्थामें इनका देहान्त हुआ। . जागिख वा गिजा देगे। Vol. Ix. 137 १२ उत्तर और दक्षिणलाटो ( ला-टो)। ' । गुर्मो (कुर्मो) ५ पन् । ४ छुमिग पल । प्रदेश १ ग्यम ४थन-पी-- २हिगुण तपल-प और तमन् प्रदशो में यक दग बनपद १३ जिक पदोन पापन-दो-को जिमओं के शाप ) मपस्थित है।..