पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५५७

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


तिमि-तिमिक्सि RI Cnfodon cabeeni मै किसको देशोय तैलकर तिमि- पोछे स्टानी पड़तो है। चोट लगने तिमि भयके मारे मटिको उपकूल। सम्म,ख नहीं दौड़ते, हमेशा जलके नीचे दूवते । यहाँ ३ Catodon polyeyphus दक्षिण सागरोय तेलकर तक कि २..हाथ नोचे ड्व जाते हैहारमको रमो सिमि-दक्षिणसागर। इससे भी बड़ी रखनी होतो है। पानोके नोचे तिमिर०।२५ मिनट ड्वे रहते है, परन्तु इसके बाद खामकट होनेके इस सिमिको दूसरो शाखा तुटमम्त 5 है। इनको कारण फिर अपर उठ पाते हैं। कभी वे भामार कर पालतिमें मस्तकको क्षुद्रता छोड़ कर चोर कोई भेद नहीं नोका उलट देते हैं। ये वर्क के पाघातसे हो मरते है। है, इस श्रेणीके बल दी उपविभाग हैं। (?) Kojit. चोट खाकर कोई कोई तिमि अपर नहीं उठते पोर जो Bleniceps or short heded sperim is hale क्षुद्र अपर नहीं उठते वे हाथ नहीं पाते। इनके भाप मस्तक तैलकर तिमि दक्षिण आफ्रिका के उपकूनमें प्रोग (२) Kogia marnyii भारतीय क्षुद्रमस्तक लेलकर बचने के लिए मोकामें बड़े बड़े लोहे के कांटे लगे रहते है। तिमिके मरजाने पर शिकारी नोशाको उसके निकट तिमि अष्ट्रेलिया और भारत महासागरमें निवास ले जाते है और जलमें हो उसके घरोरके अपर खड़ेही करते हैं। कर उमको खाल और चर्बो निकालमा पार कर देते इम रिमिको टतीय गावा कुअपृष्ठ तनकर तिमिका हैं। इन लोगों के साथ जहाज रहता है। मोकाको जहाज- उपविभाग हैं। (१) Phaster tursis or the black से बांधकर या लल डाल कर इस तरह ये तेल चर्चा fish णममा --कटले गड हा उपकून और ( २ ) इत्यादि संग्रह करते हैं। वसन्त कालमें शिकार भारम्भ Euphyseles Giraji वा अष्ट्रेलिया ते नकर तिमि- होता है और शरद समयमें समान हो जाता।नौरवेश दक्षिण-महासागर। निवामी नवम शताब्दीमे वृत्तिमिका शिकार करना तिमिको यह जाति शिकारियों के अड़े लोभको जानते हैं। बयोदश ताब्दो में फरामोसो स्पेनियर्डपी सामग्री है। शिकारी लोग इमे पाकर और केक नहीं लोमिन लोगोंने उनका शिकार करना पारम्भ किया। चाहते। इनके शिकार करने में बड़ो विपदोंका सामना अंग्रेजोंने इसे १४वीं सदीसे शरू किया है। लेणके करना पड़ता है। ये पूछ के झपाटे होसे नोका उलटा कान न मुताविक साले के उपकूलसे तोन मोलके देते हैं। इनके शिकारको प्रणालो हत्तिमिक शिकारको बोचमें जो तिमि पकडे जाय, वे सब राजसम्पत्ति गिनी तरह है। शिका। लोग नोकामें चढ़ हारपून ( Hur. जातो है, इससे दूर मागरमें जो सबसे पहले वाही चला poon ) नामक वों में प्राक्ररग काले हैं और एकके कर तिमिको रोक दे वही व्यक्ति उसके पर्धा शका अधि- ऊपर एक बळ को वर्षा कर मार डालते हैं । हारपूनके कारो होता है। अपर अर्धा शके अधिकारी पन्यः पनुचर प्राघातसे दुर्बल हो जाने पर इन्हें मार डालना कष्ट कर पादि होते है। इनको छोड़ और भी कई स्थानीय नहीं होता । हारपून में खूब बड़ो रम्सो वधो रहतो है। नियम है। प्राधात पाकर ये ड्व जाते है । उस समय मछली पकड़ २ समुद्र। ३ राजविशेष, पुरुष योय दूर्व के पुत्र । नेको तरह रस्मो छोड़ कर नौकामें तेजोमे उनके साथ इन्हीं तिमिराजाने ४० वर्ष राजत्व किया था। घममा होता है। फिर ऊपर उठ पाने पर बळ छोड़ तिमिकोष (सं० पु०) तिमः कोष एव । समुद्र । कर इन्हें पकड़ा जाता है। हारपूनका फला ठोक बझैछ तिमिङ्गिल (म० पु०) तिमि गिलति तत: मुम् । ( गिळेऽनिक. (मछलो पकडनेके कॉटे)को तर उन्नटो औरको घुमाया स्यापा ६।३।१०।१ वृहत्काय मत्सविशेष, रेल नाम- होता है। यह देखने में लग के फल की तरह होमा है। को बड़ो मछलो । २ होपविशेष, एक दोपका नाम। नोकामं ४०५० गिमागे दो हारन और ५१६ बरे होते ३ उता देगके निवासी । (वि.)४ तदोपजात, जो उस है। मौकासे हारपून फेकते हो नौका पहले एक दम होपमें उत्पन हो। Tol. Ix. 139