पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५६२

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जिला था। उत्तरं मोमा नेपामराज्यक मात्र पंग तिरहुत जिलेका भूभाग साधारणतः परमय रेजो राज्य के सोमानिहरण के लिये खाई, नदोईटे मोर बोच बोध नदो है, कई जगह जङ्गल भी है। बांस और काठपादिके स्तम्भ है। पामके वन यथेष्ट । ममस्त भूभाग जमोगको प्रजातिक १८७५ १० को १ली जनवरीसे यह बड़ा जिला | पनुपार सोन भागों में विभक्त किया जा सकता है। शासनकाय को सुविधा और सुयवहार के लिये दो दक्षिण-पश्चिममें हाजोपुर, बालागाछा, सरेसा, विपाड़ा. स्वतन्त्र मिलापों में विभक्त हुमा । मुजफ्फरपुर, हाजोपुर, रति और गदेखर परगने को लेकर एक विभाग बना है; सोतामढ़ो इन तीनों उपविभागांको ले कर मुजफ्फरपुर इमको जमोन मंचो और उर्वरा है। बाद छोटी गण्डक तथा दरभङ्गा, मधुवनो और ताजपुर इन तीन उपविभाग और बाघमती नदिया के अन्तर्गत दुपाब भूभाग है; लेकर दरभङ्गा जिला संगठित हुआ है। वास्तवमें भी इसकी जमोन पामय है, वर्षाम नदो बढ़ जाती है। यहां बङ्गास-विहारके मानचित्र तिरहत जिले का पस्तित्व का प्रधान शस्य खरोफ है। हतोय विभाग बाघमतो लोप हो गया है। मुजफ्फरपुर और दरभङ्गा इन दो जिलों नदी के उत्तर और पूर्व में है, यहांको जमीन भो पलको है का विवरण पब भो स्वतन्त्र भावमे मगहीत नहीं पोर जिलेका मध्य भाग सबमे अधिक स्वास्थ्यकर है। इमा है। सुसरा तिरहुत नाम हो इसका कुछ कुछ विव- मन्तिक धाम हो इस अञ्चलका प्रधान शस्य है। रण दिया जाता है। जमोन स्वभावतः रेतीली है, कहीं कार और १९५०में जब सूबा बिहार अंगरेजोंके हाथ पाया,. कहीं मट्टो में मोरा तथा नमक पाया जाता है। दुनिया सब गङ्गाके उत्तरकूलवों सारण, चम्पारण, तिरहुत नामको एक जाति सोरा और नमकसे अपनो जीविका और हाजीपुर ये चार स्थान सरकारमें विभक्त थे। उस निर्वाह करती है। समय मरकार तिरहुतका परिमाण ५०५३ वर्गमौल और तिरइतमें गङ्गा, बड़ो गण्डक, बया, छोटी गण्डक और सरकार हाजीपुरका परिमाण ७८३५ वर्ग मोल था, तिलगुजा ये चार नदियां प्रवाहित है। इनमेसे गङ्गा, किन्तु उस समय सारे तिरहुत जिलेका परिमाण केवल गण्डक, छोटी गण्डक, बाघमतो छोटो बाधमतो, तिल- १३४३ वर्गमौल था, पहले सरकार तिरहुत और सर. गुजा और कराई इन सात नदियों में वर्ष भर में सभी समय कार जोपुर इन दोनोम १०४ परगमे थे। इन सब जा पा सकते है। इनके सिवा केवल वर्षाकालमें कमला परगनोंके नामको तालिका नहीं पाई जाती, पर सर- पोर इसको शाखा नदी बलाम, चाउम, झिम, लाखहा. कारी कागजातसे जाना जाता है, कि उस समय भागल- हा पुरानो बाधमतो पोर बयामें भो गमनागमन पुर और मुङ्गो जिलोंके अधिकांश स्थान इन्हीं दो होता है। सरकारों के अधीन थे। २७८५ में भागलपुर और मुरके पतर्गत बलिया, ___ गंगा-शिकमागेपुर के निकट गङ्गानदी इस जिलेको मस्जिदपुर, बादभुसारो, इमादपुर, कुड़ा, गावखण्ड, दक्षिणी सीमाके रूप में गिनी जाती है। हाजीपुरके कवखण्ड, नारादिगर, छय, फकिया, मालको बलीया, निकट चामताघाटसे कई कोस उत्तर-पूर्व में बाढ़ मामक मामले गोपाल और नयपुर ये तेरह परगने तिरहत कले। स्थानके सामने गण्डक गङ्गामें जा मिलो है। वर्षाकाल करीके अन्तर्गत हुए. किन्तु १८३७ में ये पुनः | छोड़ कर दूसरे समय में गङ्गाको चौड़ाई पाच कोस तक सिरहतसे अलग कर दिये गये। १८६५१ में सारणके रहती है, किन्तु वर्षाकालमें बहुत बढ़ जाती है। पन्तर्गत परगना बाबरा और मुझरके अन्तर्गत परगना सारण दियारास गङ्गाका एक स्वाभाविक खाड़ी निकल बाद भुसारो तिरहुतर्क पन्त न हुआ तथा १८६८ में कर हाजीपुरके निकट नेपाली मन्दिरके नीचे गडबके गङ्गानदीको गति परिवर्तित हो जानसे पटना के प्रत- साथ मिली है। इसकी चौड़ाई इतनी थोड़ी है कि इसे गेस भीमपुर, गयामपुर तथा प्राजिमाबाद इन परगनाँके किसी हालत में नदी नहीं कह सकते। गङ्गामें जब जल कईश तिरहुतके पन्तभुताए । बढ़ जाता है, तब तौरवर्ती सभी खान बसमय हो जाते