पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५६३

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  • चोर गण्डकका जल भी प्रतिवह हो कर उसमें गा सके किनार मुजफ्फरपुर, समस्तोपुर, और मेरा प्रधान

का जल प्रवेश हो जाता है, जिससे तोरवर्ती खान मावित बाणिज्य केन्द्र ।। हो जात, ताजपुर उपविभागमें प्रतिवर्ष प्रावन होता बलान-यह ताजपुरके निकट छोटो गडकसे है। गङ्गाके किनार तिरहुतमें कोई विख्यात खान नहीं निकल कर ताजपुर दलसिंहसरायके ममोप होतो हुई है। बाढ़ के सामनेमे गङ्गा उत्तरपूर्व को पोर घूम कर जहाजामवयारो नदो मुङ्गो पास छोटो गण्डकमें बाजितपुर तक पाई है और दक्षिण-पूर्व को पोर तिरहुत मिलो है, ठोस उसे कुछ जपरमें जामवयारोके साथ जिलेमे दूर हट गई है। मिती है। ___गण्डक-हाजीपुरके निकट यह गङ्गाके साथ मिली वाघमती- यह मेपाल में काटमाण्ड नगरके निकट उत्पन है। यह नदी कहीं कहीं नारायणी सथा शालग्रामो हो कर सीतामढ़ो उपविभागमें मणियाड़ो घाटके निकट नामसे भी पुकारी जाती है। हिमालयसे उत्पन हो कर तिरहुत जिले में प्रवेश करता है। कुछ दूर जा कर इसमें मुजफ्फरपुरके कील नोलकोठोके निकट यह तिरहुत में लालवाकिया नदो पा मिला है। बाद यानरषया तक प्रवेश करतो है, बाद दक्षिण-पूर्व की पोर प्रवाहित छोटी गण्डक के माथ ममान्तर भावमें पाकर पाले से. कर हाजोपुर तक चलो पाई है। गगडाके किनारे राके निकट छोटो गण्डकी मिलो थो, किन्तु प्रभो लालगन ही प्रधान गन्न या बाजार है। इसका स्रोत घम कर हायाघाटके निकट कगई नदो के महार तिल. बहुत प्रवल है। नाव हारा पाने जाने में बहुत खतरा गुजा नदो में जा गिरी है। बाघमतोका पुराना गर्भ है। हजार मन बोझ लाद कर नाव लालगन तक पाज भी पुरानो बाधम नाम मे पुकारा जाता है। अच्छी तरह जा सकता है। गण्डकको तरह तौर-भूमिको दरभान पोर मत्रफ्फरपुर शहरमे दर गाईघाटो नामक अपेक्षा ऊंची है। इससे बाद रोकने के लिये दोनों स्थानसे नूतन बाधमतो दरमा भोर मुजफ्फरपुर रास्ते को किनारों पर बांध दिये गये है। मारण जिलेको पोर जो काटतो र चलो गई है। तुर्को नामक स्थानमें बाढ़का बांध है, वह बहुत जचा है, किन्तु तिरहुत जिलेका बाँध पानी रोकने के लिये बांध है। इस नदोमें पदोरी नामक उतना ऊँचा नहीं है, रसो कारण बाँध पार हो कर प्रावन स्थानके पास लालबाकिया, मणियारी घाट के पास भूगो हो जाता है। नदो, सोतामठोके नोचे दरमहा मोर मुजफ्फरपुरके रास्ते से बया-चम्पारण जिले में गण्ड कसे बया निकल कर १८ मोल दक्षिणमें लाखहगडार नदी मिलो। कम- करणोलनोलकोठोके निकट तिरहुत जिलेमें प्रवेश सौल नामक स्थानमें कमला नदो पोर पासोमें पूर्व से करती है। दक्षिण-पूर्व को पोर यह क्रमशः डुरिया, चाउस और पश्चिममे झिमनदो छोटो बाधमतोमें मिल सरिदा, भटोलिया, चितवारा पोर शाहपुर पतोरो नोल गई है। इसके बाद छोटों बाधमतो दरभङ्गा गारसे कोठोके बगल हो कर जिलेके दक्षिण-पूर्व प्रान्त में गङ्गाके कोस दक्षिण में याघाट के निकट बड़ो बाधमतोमें जा साथ आ मिलो है। गिरी है। छोटी गण्डक--यह चम्पारण जिलेसे निकल कर कई-बाधमतो जब पुरानो बाधमती नदीके भोसर मुजफ्फरपुर विभागमें घोष बात ग्रामके निकट तिरहुत होकर बहतो थो, तब यह एक मामान्य नदो थो, प्रमो जिले में प्रवेश करती है, बाद मुजफ्फरपुरके समीप टेढी यही हायाघाट के नीचे बाधमतो का प्रधान स्रोत हो गई हो कर पठाराकोठोके नोचे होतो मुझेर शहरके ठोक है। मुरको मोमामें तिलकबर नामक स्थान निकट सामने गङ्गामें गिरी है। वर्षाकालमें नाव गङ्गासे दो हजा यह तिलगुजा मदों में मिनो है। मन बोझ ले कर रमेरा तक और हजार मन ले कर तिलगुजा-यह नेपालसे निकल कर कहोनगावक मुजफ्फरपुर तक जा सकती है। नागर वसतोके निकट पास तिरहुतकी गणाम गिरी है। समारो ग्राम के निकट इस नदीके अपर हो कर "दरभाट रलवे" गई। यह दो भागों में विभता हो कर भेजापामके समीप पुनः