पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५६४

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तिरहुत मिल गई है। पश्चिमक गः वामें बागता नामक स्थान में भी इसी श्रेणोके अन्तर्गत है। ये बङ्गालक कुम्लोन पास यह बलान नदों में मिली है। राइमारी से कर बाणों को नाई बह-विवाह और रच्छानुसार कुछ दिन नदोके गर्भ तक जगह जगह बांध दिये हुए हैं। न.व एक खशरालयमें और कुछ दिन दूमरे खरालयमें रहते जाने धानेका कोई गम्ता नहीं है। हैं। खशरमे प्रति बार ये लोग रहनेके लिये रुपये कमला--यह नेपालमे निकल कर जय नगर नामक प्रादि ने लेते हैं। मोगठ नाम : स्थानके देव मन्दिरमें स्थानमे तिरहतां प्रवेश करता है। पहले यहां गिना. यावदोय ब्राह्मणोंका मेला लगता है। इस मेले में अपनो नाथ नामक एक शिवमन्दिर था जो क्रपणः नदो को गति अपनो घणो के पण्डित प्रयक शक्ति को वशतालिका बदल जानमे, नदोंके गर्भ में पड़ गया है। कमतौलके खोलकर विवाह सम्बन्धका निरूपण करते हैं। उच्च कुलको निकट कमना बाघमसी में मिली है। कम ना को पगनो मन्तान के पिता निम्न कुम्नमें विवाह होने में कुलमर्यादा प्वाई तिलकेश्वर के निकट सिलगुजा नटोंमें गिरती है। खरूप रुपये प्रादि पाते हैं। इस मेले के दिन वर और इनके मिया छोटो बनान नयाधार, कमला, पण्डोन कन्याका नाम निरूपित होता और उनके पिता को सम्पति- नाला आदि नदियां हैं। सूचक एक तानिका निव जातो है । श्रोत्रिय लोग यदि ___ ताजपुरमे ५ कोम दक्षिण पश्रिम मरेमा परगने के अपनो श्रेणोके सिवा भिव श्रेणी में विवाह करें तो वे मध्य तानवरेना नामक नाना हो विख्यात है। . इसकी उमो श्रेणोक हो जाते और प्रात्मीय स्वजन परित्यक होते लम्बाई ३ कोम और क्षेत्रफल २० वर्ग मोल है। हैं। ये लोग अपने हाथमे कुदाल द्वारा पारने और जमोन तिरहुतमें खनिज द्रव्य कम भो उत्पन्न नहीं होता, मोचते हैं। केवल हल जोतने के लिये किमो दूमी लेकिन मट्टोके माथ मोरा और नमक पाया जाता है। (निम्न श्रेणी के लोगों ) को नियुक्त करते हैं। पहने ये हरोलो नामक स्थानमें छोटो गण्डकमे कर निकला लोग किसोके यहाँ नोकरी नहीं करते थे, किन्तु अभो जाता है। बहुतसे तहसीलदार और गुमस्त हो गये हैं। इन वन्य द्रव्याम मधु, शम्ब,क, सोश पाटिको देहोंसे लोगोंमसे बहुतमे प्रामके बगीचे लगा कर जोविका चलाते प्रस्तुत चूना, चिरायता, महर कोश, गुम्च, मुगिड, तालमूनो हैं। मैथिलब्राह्मण देखो। तथा मकाई प्रभृति भेषज उत्पन्न होते हैं। जङ्गग्नमें ब्राह्मणों के बाद इस देश में राजपूतोंका सम्मान अधिक भाँगका पेड भो होते हैं। यथार्थ में दम जिले में उनना है । ये अधिकांश जमोंदार भोर कषक हैं। भाज अङ्गल वा परतो जमीन नहीं है। जामुन, शोशम, माध, कन कुछ पुलिमक चोकोदार, प्यारे और बोढ़ोदार- प्राम, कटरन, महा आटिक वृक्ष भो ययेष्ट हैं। का काम करते हैं। गजपूत और ब्रायणके बाद इस देश मैकड़े पोछे ८८ हिन्दू और ८ मुमन्नमान बाभन नामको एक दूसगे जातो है। वे राजपूतों को है । घोषवात नामक स्थानमें एक पार्वतोय जाति वास अपेक्षा होनमर्याद होने पर भो दूमरो दूसगै जातिको करती है। पहले वे एक नेपाली सूबेदारके भृत्यक अपेक्षा गण्य मान्य है। ये लोग जमोन्दार वा पत्र- रूपमें थे। सुवादारका वंश लुप्त हो गया है। उनके भृत्य जोवो ब्राह्मणके नामले परिचित हैं। गभन देखो। खेती करके अपनी जीविकानिर्वाह करते हैं। तिरहुतमें निकालिखित शहर विशेष प्रसिद्ध है- ब्राह्मणोंम मैथिन्न और गोड़ है, जो विशेष कर मधुः मुजफ्फरपुर -यह मुजफ्फरखा नामक एक यति हारा वनो और दरभङ्गामें रहते और तिरहुतिया ब्राह्मण कह- स्थापित हुआ था, इमोसे इसका नाम मुजफरपुर पड़ा है। लाते हैं। मोयिन ब्राह्मणों में प्रोत्रिय लोग शुचि है। ये यह शहर अक्षा० २६७२३ उ. पोर देशा० ८५ २६ मजगतो, योगिया और ग्रहश्य पा मैथिल, यात्रिय, २३ पू में छोटे गगड के किनारे अवस्थित है । इमो नगर योगचङ्गोला तथा पण्डित इन पांच भागांमें विभक्त है। जिनेको मदर प्रदानत है। यहां म्यनसिपालिटो, श्रोत्रिय लोग सबसे मानमोय है। दरभङ्ग के महाराज कलेकरी, दोवानी और फौजदारी अदालत, जेल,