पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५७१

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तिराहा-तिकोरलर (तिरुकोविलूर) सिराहा (हि. पु. ) वह स्थान जहाँसे तोन रास्ते तोन तिरकालर-एक प्रसिह धाम। यह तिलि जिलेके ओर गये हो, तिमुहानी। अन्तर्गत बोकुण्ड नामक स्थानसे २ कोम दक्षिण पूर्वमें तिराही (•ि स्त्रो०) तिराह नामक स्थानको बमो अवस्थित है। यहाँ एक प्रत्यन्त प्राचीन शिवमन्दिर पोर कटार या तलवार। एक विष्ण मन्दिर है। यहाँक स्थलपुराणमें विण : तिरिजिशिक ( स. पु. ) हममेद, एक पेड़का माम।। मन्दिरका माहामा वर्णित है। यहांका चलचोलपाणी तिरिटि (मपु) इक्षु-ग्रन्धि, ईखको गिरह या गांठ। खर नामक देवमन्दिर भी अत्यन्त प्राचीन है। वहांक तिरिणीकण्ट (H.पु.) पारिजातका पेड़। एक शिलालेखमें लिखा है कि १५२२ में विवाह के तिरिन्दिर (म. पु. ) एक गजाका नाम । राजा मातंगड वर्माने देवमेवाके लिये शामन दिया था। तिग्मि ( स० पु० ) ह-मक् । शालिभेद, एक प्रकारका ग्रामके बीच में एक प्रस्तरस्तम्भ पर शिलालेख है। धान। तिरुकुलम्-एक प्राचीन ग्राम। यह मलवार जिलेके तिरिया ( हिंस्त्री० : स्त्री, औरत । अन्तर्गत मञ्जरोसे १ कोस दक्षिण-पश्चिममें अवस्थित तिरिश (म पु० ) -वृषक । शालिभेद, एक प्रकारका यहाँका शिवमन्दिर प्रत्यन्त प्राचीन है। टीपू सुलतानके समयका यहाँ एक दुर्ग है। इसके अलावा यहां कई तिरोट (म.की.) तोर्यत शिरोविपदोऽनेनेति कोटन्। एक पत्थरको को भो। कृत् कृषिभ्यः कीटन् । उण १।१८४ । १ किरीट, मुकुट । तिमकोइलूर (तिरकोविलूर) -१ मन्द्राजके दक्षिण पावट २ स्वर्ण, मोना। ३ लोध्रवक्ष, लोधका पेड़। जिले का एक उपविभाग। इसमें तिल्कोहल र पौर का. तिरीटो (म वि.) तिरीट प्रस्यास्ति तिरीट-णिनि। कुरघो नामक दो तालुक लगते हैं। मस्तकाच्छादन-युप्ता, जिमका सिर ढका हो । २ उक्त उपविभागका एक तालुक। यह पक्षा. तिरोफल (हिं पु० ) दन्तोवृक्ष । ११३८ से १२५ उ० पौर देशा. ७.४ मे ७e. तिरोबिरो (हि. वि. ) तिदीबिड़ी देखो। २१ पू०में अवस्थित है। क्षेत्रफल ५८४ बर्ग मोल है। तिगपशालि ( म० पु०) तीन महीने में होनेवाला एक लोकमख्या प्रायः २७८५०६८ है। इसमें इसी नामका प्रकारका धान । एक शकर पोर ३५० ग्राम लगते है। पोनियर पौर तिरुक चुर-चङ्गलपट जिले के मध्य चेङ्गलपह, नगरसे ४॥ गदीलम नामको दो नदियां इम तालुकमें प्रवाहित है। कोम दक्षिण-पूर्व में स्थित एक ग्राम । यहां दो प्राचीन ३ उक्त तालुकका एक प्रधान शहर। यह पक्षा. शिवमन्दिर हैं, जिनमें बहुत प्राचीन शिलालेख ११.५८७० और देशा० ६८ १२ में पोवे यार नदी मौजद हैं। दक्षिणतट पर अवस्थित है। लोकसख्या प्राय: ८,५१७ तिरुकम्पिलियर-त्रिशिरापल्लो जिलेका एक ग्राम और है। इस पहरमें श्रोवेषाव मप्रदायका एक प्रसिद नदो। यह कलई स्टेशनसे प्राध मोलको दूरी पर अब विष्णुमन्दिर है। इसको गठन प्रणाली तिरुवनमन्वय- स्थित है। इसको प्राचीन चेर, चोल और पागड य गज्य- के शिव मन्दिरसे कहीं अच्छी है। उत्सव-मण्डपके को सौमा समझना चाहिए। निरुकलर-तोर जिले के अन्तर्गत मबारगुड़ीसे ८ स्तम्भ पर अत्यन्त सुन्दर कारकार्य है और बाहरके भागन कोस पूर्व में स्थित एक छोटा ग्राम । यहाँका शिवमन्दिर को दीवारके अपर सोन, तथा मन्दिरके दरवाजे के अत्यन्त प्राचीन है, जिसमें प्राचीन शिलालेख और पांच अपर एक गोपुर है। इस मन्दिरमें बहुतसे मिलालेख ताम्बलेख मिले। . हैं। किउलरके शिव मन्दिरको अपेक्षा यह मन्दिर तिरुकवलाई-तञ्जोर जिलेके नागपट्टनसे ७ कोम दक्षिण- नया मालूम पड़ता है। इसमें विष्णु-मूर्ति विद्यमान पश्चिममें अवस्थित एक ग्राम । यहां एक प्राचीन शिव- है। उनके हाथ में शक, चक्र, गदा, पद्म, कण्ठ में १०८ मन्दिर और उसमें एक शिलालेख है। मख-युक्त थालग्राम माला, पक्षास्थल पर महालको है।