पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५८२

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५७ तिरुनगहतुरै-तिरुवन्नमलय तिरुवण्ड, तुरं-तखोर जिले के मबार गुड़ि शहरसे ३ ; पड़ता है। यहां एक प्राचीन विष्णु मन्दिर है, जिसके कोस दक्षिण-पूर्व में अवस्थित एक ग्राम। यहाँ एक नाना स्थानो में भिव प्रतगैमें खुदे हुए बहुतसे शिलालेख प्राचीन शिवमन्दिर है जिममें १३५३ ई का खुदा हा पाये जाते है। मन्दिरके भोतरको दोवारमें भी एक एक शिलार्म ग्व है इमर्म मन्दिरके विषय का पूरा पता शिलालिपि है। इसके पास हो तिरुमणिकलि नामक चलता है। ग्राम है, यहां वृहत् ययेष्ट कार कार्य विशिष्ट एक तिरूवत्तियुर-मन्द्राज प्रदेशक चङ्गाना, जिन्ने के पन्त शिवमन्दिर है। प्रवाद है कि यह मन्दिर १३वौं शता- र्गत मंदापट तालुकका एक शहर । यह अक्षा० १३१० ब्दोमं निर्माण किया गया है। ममें भी बहुतसे शिना- उ० और देशा०८०१८ पृ० में ट जोज किम्लामे ६ मोन्न लेख हैं। पूर्व को ओर प्रवेशद्वार पर १८ एच चौड़ी उत्तरम अवस्थित है। यहाँको जनसंख्या प्रायः १५८१८ और १५ गज नबी एक निवि है। हारके दोनों बगल है। यहाँ एक अति प्राचीन शिवमन्दिर है। मन्दिरको बाहर और भीतर ग्रन्थअक्षर खुदा हुआ शिलाले ग्व तिवमलय-प्रन्द्राज के दक्षिण आर्कट जिम्न का उत्तर- पाया जाता है। १६७३ ईमें फ्रायर माहब इस मन्दिर पशिमोय तालक। यह अक्षा५८ से १३'३५.उ. और शिलालेखको देव गये हैं। देशा० ७८३८ से ७८.१० पू०में अवस्थित है। भूपरि- तिरुवतूर-मन्द्राजक उत्तर अरूकाड़, (पाक ट) जिले का एक मागा १००० वर्ग मोल और लोक या प्राय: २४४७०८५ शहर । यह प्राकट शरमे ११ कोम दक्षिण-पूर्व चेयार है। बारामहलमे चेङ्गमगिरिपयको राहम यहो नदी के उत्तरकूल पर अवस्थित है। पहले यह जैनियों का मबसे पहला शहर पड़ता है, इमोसे घाट पर्वतके उप एक प्रधान शहर था। यहांका देवमन्दिर पहले स्थानीय रिस्थित स्थानममूहका व्यवसाय दम शहरमें चलता है। पौराणिक मताचारियांक हाथ था । इमके मामने नदो के पर्वतके अपर स्कन्धावार है। १०५३ ई० मे १७८१ .के दूमरे पाग्में पूर्णावत्तो नामका स्थानमें एक जैन मन्दिरका मध्य एम पर दग वार धावा माग गया था। १७६० तालभाग अबशिष्ट है। कहा जाता है, कि उम मदिरको ई में यहां अगरेजोंका एक स्कन्धावार था। १७६७ मेरो गोजोंका TRHIar शा तहम नहम कर उमक द्रव्यादिसे तिरुवत्तरका मन्दिर में कल मियन हैदर अनी और निजाम के साथ निर्मित हा है। पूर्णा यतो के मन्दिरको जैन प्रतिमा अभ यह के ममय चेङ्गमगिरिपय हो कर आते हुए इम पृथ्वी पर पड़ी हुई है। उमा पाम हो एक नहर है। सुना स्थानमें उनके महयोगियांको एक एक करके परास्त जताई कि उम नसमें मदिपक पोतल का किवाड किया: किन्त १७१ ई में यह टोपके हाथ लगा। टीपके भोर धनरत रखा हया है। मदिपक ध्वम के ममय अध:पतन के बाद यह फिर अगरजांके टवल में आया। बहुतमे जेन फांसी पर अस्त्राघातसे तथा कौलहमें पेर तिरुवनमलय दक्षिण प्रदेशमें मन्द्राज के मध्य एक कर मार गये थे । मदिरमें खुदे हुए चित्रसे डमका पूरा प्रधान तो है। यहां एकल स्टेशन भो है जो शह- प्रमाण झलकता है । सदिर को एक खुटो हुई नमवोरमे रमे : मोल को दुगे पर पड़ता है। स्टेशन अरुणाचल एक ताडका पेड़ है। वहाँ के लोगोंका विश्वाम पहाड पूर्व को ओर है। यह तोयं संस्कृत शास्त्रों में है कि महादेवको अर्डन रोखर मूर्ति के प्रतिमा स्वरूप अणाचन नाममे प्रसिद्ध है। यहां महादेवको पाञ्च- यह पेड़ खुदा हुआ है। इस तमबोरका लेख अत्यन्त भोतिक मृत्तिको तेजोमति विराजित हैं। अरुणाचल विख्यात है। यह एक मगडप पर अवस्थित है और दम गिरिशृङ ममद्रपृष्ठले २६५४ फुट और शहरसे २०१५ की जंचाई लगभग ८ फुटको होगो । म दिपको दोवार फुट ऊंचा है। में बहतसे अस्पष्ट उत्कोण शिन्नालेख देखे जाते हैं। महादेवको तेजोमूर्ति के आविर्भाव के विषयमें एक तिरुवन्दिपुरम् दक्षिण-आरुकाड़, पार्कट) जिलेका एक रोचक कहानी इस प्रकार है-किसो समय हर और शहर। यह कुड्डल र शरमे २३ कोस उत्तर-पश्चिममें पार्वतो कलासके पुष्योद्यान में भ्रमण कर रहे थे