पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/६११

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सेवा करता है। इसमें सिवा अस्पताल को देख-रेख भो किया । मन्त्रि सभाके पन्यतम.सदस्य लाईस बरोने पाप ही करते थे। अंगको पाशामे, जिम पादमियाँको प्रिविकोन्सिल में (१८८७१० नवम्बर मासमें) तिलक शारसे हटा कर छावनीम रक्खा गश था। उनके लिए मुकामका विचार किया। मि• पास कुपथने बम्बई के जरि- पापने अबसत खोल दिया। प्रजा सरकारको वावस्था- योको भान्त भरणा और ट्राटीके विचार विषयमें बहुत से कष्ट पा रही थी, इसके लिए तिलक महाराजने बहुत कुछ समझाया. पर कुछ फलाना । पन्समें अध्यापक लिखा-पढ़ो की और उच्च कर्मचारियों के साथ जा कर मोक्समूलर पोर. विलियम हण्टरने तिलकको अपूर्व मिले। किन्तु भांपने अपने दोनों संवादपत्रों में नंग. विद्यावत्ताका उझेख कर महागनी विकोरियाले दमनको सरकारी वावस्थाका संपूर्ण समर्थन किया था। दया के लिए प्रार्थना को। तिलकको भी यह प्रतिश्रुति १८८७१०, मा० १५ जनको "केशरो"में शिवाजी- देनो पड़ो कि कभी भी सरकार के विरुद्ध प्रसन्तोष उत्पा. उत्सवका एक विवरण प्रकाशित हुचा। उत्सव १३ दक वक्ता न दूगा पोर न लिख 'गा।' तारोप से। जनको हुषा था। म माल भेगके कारण शिवाजो के म्बर (१८८८०-को तिलक छट गये। जन्मदिनको यह उत्सव न हो पाया था। मुकुटोत्सवके दिन कारागारमें तिलकका शरीर अत्यन्त दुलहो गया हुआ था । अबको बार इस उत्सवमें उपदेश, थाख्यान, था, इसलिए जेल से छटने के बाद छ महीने तक वे पुराण-पाठ धादि अनेक प्रकारको व्यवस्था हुई थो। स्वास्थ्योबतिको कोशिश रहे। पहले कुछ दिन सिंहगढ़के इस सत्सवमें एक स्रोत्र पढ़ा गया था तिलक महाराजने स्वास्थ्य निवासमें रहे. फिर दिमम्पर महोनिमें मन्द्रानको उसे "केशरी'में छाप दिया। २२ जमको मि० रैण्ड कांग्रेम में शामिल हुए। मंदाजसे पापन मिल भमणके और लेफ टिमण्ड एयार गुम घातक अनसे मार गये। लिए यात्रा को । "शिवाजी-उत्सव' शीर्षक लेखसेस प्रत्याका सम्बन्ध, कारागारम सी समय. पालको जितना भो पव. इस सन्देह पर सरकारने तिलक महाराजको गिरफ्तार काय मिलता था, उतना ममय पाप ग्रन्थ लिखनेमे व्यय कर लिया। हाईकोर्ट में तिलक के नाम राजद्रोहका करते थे । पापका "उत्तरमहमें वैदिक निवास" नामक ममला चला । बम्बई गवर्मेण्टने ता. २६ जनको तिलक- अन्य इमो ममयका लिखा एमा। हम ग्रन्थमें पापने को गिरफ्तारोका हुका निकाला । २७ तारोखको तिलक नाना युक्तियां दाग यह प्रमाणित किया है, कि प्राचीन गिरफ्तार हुए । पाखिर ता. २ अगसको जब ममला पार्यो का वेदोक निवाम उत्तर मेकम था। इसको हाईकोर्ट में पाया, तब वहांके विचारपति बदरहीन भूमिका मापने निखा है. कि इस पुस्तक के लिखनमें सयाबजीने पापको जमीन पर छोड़ दिया। ता०८ मैंने दश वर्ष समय व्यतीत किया है।' मेम्बरको मुकदमा दायर हुआ और एक समाह तक तिलक प्रारम्भसे हो दारिद्रार्क माथ युद्ध करते उसको सुनवाई हुई। कलकत्ते से बेरिष्टर प्य • तिलकके बाये थे। इसलिए वे कभी किसोके सामने हाथ न पसा- पक्षका समर्थन करने के लिये बम्बई गये; मि. गार्थ रते थे। जब पापको भोषण रामद्रोहके मामले में फसना प्य को महायताके लिए उपस्थित थे । मानमोय विचार पड़ा, उस समय भो प्रापन किसोका मुंह नहीं साका। पति मि० ष्ट्राटीने इस 'मुकदमाका फैसला किया । ना। आपने कान मका एक कालेज खोला था पोर लातूरमें जरियो मेमे ६ य रोपियनों मे तिलको दोषो ठहराया और भापका कारखाना भो था; उमोको पामदनोसे पापके ३ हिन्दुस्तानियों ने उन्हें निर्दोष बतलाया। परिणाम यह परिवारका खच घनता था। पापके जल चले जाने पर एमा कि तिलक महाराजको १॥ वर्ष सश्रम कारादण्डका पापका पाईन-कालेजगको गड़बड़ोमें बन्द हो गया पादेश दिया गया। 'फल वेश्च'को प्रार्थना की, पर वह और लातूरके कारस्थान में प्रबन्धकको प्रमावधानीमे व्यर्थ हुई। पाखिर प्रिविकौन्सिलमें अपील को गई। मुकसान हो गया। जिस समय तिलक “केशरो" के विलायतमें मिल पास कुप्रथम मिलकके पक्षका समर्थन मालिक हुए थे, उस समय उसके बम ४... ग्राहक