पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/६१३

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तिलक वा एकही है। प्रतएव विभिन देशक हिन्द,पोका | पठाराघात किया । लोर्ड कर्जनके वा भाके बाद एकताके सूवमें पावर होना पावशाक है। भारतवासियो नसा भारत इतिहासमें अभूतपूर्व .. लोकमान्य तिलक, कांग्रेमके प्रायः प्रारम्भमे हो, दोलन उठाया, उधर नौकरशाशने भी वैसे ही उससे सबिष्ट थे। कांग्रेको काममें पाप प्रतिवर्ष उम. कठोरतम शामनसे देशको विभोषिकामय कर दिया । का साथ देते थे। १८८५६० को उनका विषय माधारण सभा समितियों का होना बन्द कर दिया. देयके निर्वाचिनसमिति के सभ्योंमें प्रापका TIA चुना गया था गण्यमान्य जन-मायकों को बिना विचारक निर्वामित सो वर्ष पापने वावस्था , सभा मम्बन्धो प्रस्तावका किया गया, बहतो को फांसी पर भो लटकाया गया। समर्थन किया था ! नागपुरको समम कांग्रेममें आपने जो लोग कभी राजनीतिक पान्दोलनको शयामें भी न पाईन-पम्तका सबश्वमें प्रस्ताव उठाया था, लाहोरको जाते थे, वे भो हम धड़-पकड़मे घपड़ा उठे । स विभी- नयम कांग्रेसमें चिरम्यायो बन्दोवस्त मंबन्धो प्रस्तावका षिका सृष्टि का परिणाम यह था कि भारत के कुछ समर्थन किया था, पूनाको ग्यारहवीं कांग्रेममें प्रजा- वाक्तियों ने पुगनी "अावेदन-निवेदन" की प्रथा सर्वथा स्वत्व संबन्धोय प्रम्तावके श्राप प्रयतम वक्ता थे और त्याग दी। राजनीतिक युद्धविमें वे दृढ़तर और प्रबल कलकत्तको बारहवीं कांग्रेसमें आपने प्रादेशिक गव. अस्त्र-प्रयोगके पक्षपातो हो गये। एक एक करको मेंन्टीको राजखक विषयमें अधिक जिम्मेवारी और महतो ने पुरानो रिवाजका मुंह काला किया। भारतके स्वाधीनता का प्रस्ताव किया था । सोलरखौं कांग्रेस- इन नवगठित "चरम-पन्थियो"में भी विभिन दलों की में भो तिलकने जन-साधारणके एक प्रस्तावका ममर्थन मुष्टि हुई। इस दलबन्दोके कारण सूरतको कांग्रेसमें किया था। कलकत्त को मत्रहवीं कांग्रेसमें शिक्षा संबन्ध विच्छद हो गया। भारत इस राजनीतिक विच्छेद कोई प्रस्ताव पेश हुआ था, जिस पर आपने. एक बड़ी घोर मझटके समय में लोकमान्य तिलकने "चरमपवियों वाता दौथी। लेण्ड में प्रतिनिधि भेजने के विषयों का नेटत्वपद ग्रहण किया। स्वर्गीय सर वेडरवनने जो प्रस्ताव पेश किया था. तिनक लोकमान्य तिलकने अपने राजनीतिक मतवादको महाराजने उसका ममर्थन किया था। कहनेका तात्पर्य निम्नलिखित रूपमे व्याख्या को,-"हमारे इस राज. यह है कि राजनीतिक आन्दोलनमें आपका ख़ब उत्साह नोतिक सम्प्रदायको जो 'चरम पन्यो'को पाख्या प्राम पौर विश्वास था। आप प्रायः यह कहा करते थे, कि है, पर उसके उद्देशाको विशिष्टिताके लिए नहीं, "हमारे कार्याकार्य के विचारकर्ता बग्ने गडमें है। बल्कि कम पन्या वैशिष्टाने कारण मिली है। आप ब्रिटिश प्रजातन्त्रको पोर इशारा करते थे। वृटिश भारतमे प्रभो ब्रिटिश थामनका उच्छेद करना चाहते प्रजा-माधारण पर पापको श्रद्धा थो । १८०५ ई में जब हो वा ब्रिटिश-यामन पे किमो तरहवा सम्बन्ध नहीं काशी में कांग्रेम हुई थो; उम ममय तिलक महाराजको रखाना चाहते हों, ऐसे राजनीतिक मतके समर्थक वा विशेषरूपसे अभ्यर्थ ना की गई थी हम कांग्रेसमें आपन पोषक भारतमें बहुत कम हो है। उनके साथ मारा दुर्भिक्ष, दारिद्रा और भारतको अर्थ नोति अवस्थाके कोई मम्बन्ध नहीं है-वह सुदूर भविष्य की बात है। विषयमें अनुसन्धान तथा मेढलमेण्ट के बारे में एक प्रस्ताव हम लोगाम किमी तरहको माला नहीं है, सम्पूर्ण उपस्थित किया था। १८०६ में कलकत्त को कांग्रे ममें निरस्व हैं, सह-विच्छेद के कारण दुर्बल है, भला इम स्वर्गीय ० पानन्दचाल ने स्वदेशो पान्दोलनकै विषयमें कैसे ब्रिटिश-प्राधिपत्यसे छुटकारा पा सकते ये सब नो प्रस्ताव किया था, उसके पाप समर्थक थे। बाते सुदूर भविष्य के लिए छोड़ देना ही हमारे लिए परन्तु भारतको राजमोति-क्षेत्रको शान्ति पंव नष्ट मत और उचित है। वर्तमानमें, हमारे देशका शासन- हो गई। विधि-मङ्गित राजनीतिक पान्दोलन पर जो भार क्रमशः अधिकतर. हमारे ही हाथमे पाये, यही भारतवासियों को बनायो, सार्ड कर्जनने उसके मूल हमारा उद्देश्य है। हमारी यह भविषको पाया - Vol. Ix. 11