पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/६१५

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


दिसत पष्ट भाषामै वर्णन किया गया था और बतलाया गया चले गये। ।१० बजेके समय जारी लोग इजलासमें था कि "बम फेंकनेका कार्य अत्यन्त गहित है, इसमें पाये। सात जूरियों ने तिलकाको दोषी ठहराया पौर दोने सन्देह नहीं, किन्तु सरकारी दमननौति पोर अन्यान्य निर्दोष । बजने अधिकांश जूरियोंके मतानुसार तिलका- व्यवस्थाके दोषसे हो ऐसा हुआ है। अब यदि रस को अपराधो ठहराया और उन छ: वर्ष के लिए प्रत्याहित के लिये फिरसे कठोरतर दममनोतिको व्यवस्था होपान्तर वास तथा एक हजार रुपये शुर्वानाका हुपम · को गई, तो उसका फल यह होगा कि देश में विद्रोहका सुनाया । दण्ड देने समय तिलक महाराज के लिए जजने विस्तार होने लगेगा। विद्रोह निवारणका उपाय यहो कहा था---'पाप पसामान्य प्रतिमा है, असोम शति है, कि देश के पादमियों पर सहानुभूति पूर्ण दयसे है और जन-समान पर पापका यथेष्ट प्रभाव है। इस उनके लिये नाना विषयों में सुव्यवस्था कर देना। इस प्रतिभाको यदि पाप अपने देश के हित के लिए नियोजित परमे गवर्मेण्टने प्रमाणित किया कि 'केशरी' के लेखों में करते, तोपाज जिस जन-ममाजके लिए पाप चिन्तित', कौशलसे बमके व्यवहारका समर्थन किया गया और उसके मुख-मन्तोषमें कारण हो सकते थे। राजनीतिक उसके लिए लोगों को उत्तेजना दी गई है। तिलक पान्दोलनमें बमका व्यवहार विधि-सात उपाय है, यह महाराज हो केशरो के सम्पादक 1, ऐसा सरकारको बात विक्षत मस्तक पोर समागंगामीके सिवा पोर कोई माल म या। प्रतएव उनके प्रेस पोर सिंहगढ़के भो नहीं कह सकता। और तो क्या, रसको चिन्ता भी स्वास्था-निवाममें खानातलायो हुई। तलाशीमें एक नहीं कर सकता। पोर पापने जो शेख लिखे, पोष्ट कार्ड निकला, जिममें विस्फोटकको दो पुस्तकों का विविध सात . यह बात भो वितमस्तकाके सिवा नाम लिखे थे। तिलक महाराज गिरफ्तार हो गए। और कोई नहीं कर सकता। पाप जैसे पवस्वापब और मरकारने गई जमानत पर भो महो छोड़ा। पाप पर दो उच्चपदस्थ व्यतिको कैसा दण देनेमे पाईन पोर विचार अभियोग लगाए गए । १३ जुलाईको हार-कोटमें मुकदमा का उहग्य सिम हो सकता है, उसोको में चिन्ता कर शुरू हुषाः स्पेगल जुरोमे सात पारेज पौर दो पारसो चुने रहा है। पापको वयस पोर पन्चान्य पारिपार्षिक पव. गये। 'केशरों के जिन लेखों के लिए तिलक गिरफ्तार हुए खाका विचार करते हुए मैं विवेचना पूर्वक खिर करता थे, वे सब मराठी भाषामें लिखे हुए थे। जज और जूरियों में विदेशको शान्ति चौर गालाको रक्षाके लिए तथा जिस कोई भी व्यक्ति ऐमा नहीं था जो मराठी भाषा जानता देशको सेवाके लिए पापने पास-नियोग किया है, उस हो। तिलकने अपने पक्ष समर्थनके लिए वता,ता दो। देशके मालार्थ भव पापको कुछ दिनों के लिए उस देशसे मुकदमाके तोसरे दिन चार बजे से पापको वक्ता शह दूर रखना ही विशेष वाहनोय है।' हुई थो, परवर्ती बुधवारको ( मुकदमाके पाठवें दिन) विचारपतिके रम मन्तव्य पाठसे तिलक महाराजने दोपहरके वक्त वह खतम हुई। अपना पक्ष समर्थन प्रपना अपमान समझा। मि. दाधरने जब तिसकको करते समय पापने व्यवहार-शास्त्र में अपनो विशेष दक्ष पापना शेष वक्तव्य करनेके लिए कहा, तब पाप कठ- ताका परिचय दिया था। एडभोकेट जनरलने तिलकको घरेमेसे जलदगम्भीर-खर पोर मर्मस्पर्शी भाषाम बोस ताका उत्तर देते समय कुछ ज्या किया था। उनको उठे-"मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहता किरियों- वक्तता उसी दिन शामको समान हो गई। जजन के हारा अपराधी ठहराये जाने पर भी, में निरापराध कहा-'हम रात तक मुकदमा करेंगे और पान हो इस । एक महाशति जगत्के भाग्यका नियन्त्रण किया मामलेको ख़तम कर देंगे।" विचारपति मि. दाारने. करतो है भगवानको पछा शायद ऐसोही कि मैंने जरियोको मामला समझाते समय तिलक विवह जिस उहेश्यको सिधि के लिए मान-नियोग किया था, मेरे वक्रता दी। रातक पाठ बजे जरी लोग आपसमें स्वाधीन रहनेको अपेक्षा मेरे दुग्णवाह मानेसे हो उसमें मक्षा परनेके लिए इजलाससे उठ कर इसी बामरेमें पषित सफलता प्राश होगी।'