पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/६१८

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ni गि अन्तमें सुलाई, पनिवार रातिको १२ बनके ४० तिला (सं. खो०.). तिवस्तिक बोजवोष व वायति मिनट पर पाप सर्वदा के लिए धराधाम त्याग कर स्वर्ग तिस-केक टाप । १हारभेद, काडमें पहननेवा एक सिधारे। मरे दिन महात्मा मोहनदास करमच द गान्धो, पाभूषन । २ शरीरमें गन्धादि द्वारा तिल-पुष्पर पाबार- खाप, मुनजो, देशपा, कारन्दिकर, शोकतमलो, का चित्र। छन्दोमेद, एक छत्तमा नाम निमो छोटानो, बैपटिष्टा पादिमिन्द-मुसलमान नेतागण विषम प्रत्येक चरणमें पक्षर होते है। उदयमे अपने सम्मानित सहयोगोको अन्तिम जिया तिलकालक (सं० पु. ) तिल इव बालकः बाव। मम्पादन के लिए पैदल परयो के साथ गये थे। भारतके १ देखित तिम्ल, शरोर परवा तिल के पाकारका कामा भर्व वीस मापुरुष के लिए शोकप्रकाश किया चित, सिस। सके सस्त पर्याय-तिलक, पालक, गया था। पिन पोर जाल। जिसका परिमाप तिलक समान ___ तिलक वास्तवमे. भारतमाताके सलाटके पळचल तथा वर्ण काला होता पौर जिसको वृति नहीं होती तिम्गक थे। प्रापर्क चरिखसे हमें पसाधारण Eढ़ता, पौर शो कष्टदायक नहीं होता, उसे तिलकासक करते पात्यन्तिक सरलता, पाविम देशभक्ति और समाजनिष्ठ है। वात पित्त पोर कफकी अधिकता होनेसे या निम्न की शिक्षा मिलती है। पापकी मृत्य से जातीय-जोवनकं उत्पन होता है। रोगविशेष। इसका वर्ण काममा जो पति है, माजमैं उसको पूर्ति न हो सकती। अथवा विचित्रवण विवाश होता है। इसमें पुरुषको तिलकक (सं० पु. ) काश्मोर एक राजाका नाम। इन्द्रिय पक जातो और उस पर काले काले दागसे पड़ राजतरa.airte) जाते है और थोड़े दिनके बाद माम गल कर गिरने तिलककामोद (म.पु.) एक गगिणीला नाम । यह लगता है। तिलयुक्त व्यक्ति वह मनुष्य जिसके तिमाही। कामोद और विचित्र वा काबड़ा कामोद और षछ सिलकात्रय (स.पु. ) तिलकस्य पाश्रय: ६ तत्। वर बोगसे मिल कर बनी। स्वान अहो तिलक लगाया जाता है, सखाट । तिलकट (म.जी.) तिलस्य रजा तिस-कटच । तिलका सिम्स किट (H• लो. ) हिम्नस्य कि तत् । तिलमा, तिलकी खली तिसकवक (स.सी.) तिसका छिलका। तिलवित (वि.) तिलकोऽस्य सनात'तारमादि- वादितच । पति, छापापा। तिलकना ( 1) तास पादिको महाका सूख कर " तिलको (म वि० तिलकमस्त्यस्य लिखक रनि । तिसक दरारके साथ फटना। . तिलवामुडा ( पु) दम पादिवा टोका और युक्त, जो तिलक लगाता हो। तिलक धारण कर सब युती काम करना चाहिये। शाचक्रमादिका बाया से भर लोग सबात है। तिलकुट (Eि पु०) कुटे हुए तिल जो पाँड़की चाशनी- तिमाकराज (0..) कामोरके पक राजाका नाम। में पगेनी। (राजतर. १३१९) तिलकरतीर्थ (सलो. ) तिसकेशर नामका तीर्थ । लकारखा (स.पु. ) तिलास्य वाला तत्। तिलकुट, शिवपुराणो एक तोय का नाम। तिलका पूर्व। तिलाल (म मो०) तिलस्य खलिः तत् । तिलको तिलबालाज (सं.वि.) तिसकलात् जायते तिल कक्क, लो। जन-साजो निलकले उत्पन। तिमा ( पु) एक चिड़ियाका नाम । तिलकसि ( पु.) कामोरक पब राजाका नाम। तिला एक प्राचोन जनपद । खान्दपुरणक कुमारिका- . . . . (राजतर ८०२) खण्डौ रस जनपदका सोस। मालूम होता है कि तिलवार ( पु.) वामनुष जो बयाको बोरसे या विवाविज शब्दका पपश। पभो यह सेवा बत्यो तिक्षामा वि माता। नाम मगारालग दे। . . . . .