पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/६२१

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विसरा-तिकाकिदक मिलबा (हि.पु. ) तिलोका लड्डु । अनेक सुगन्धित पुष्प, सुवर्ष, पिप्पल पोर हिरण्यमय हंस- सिलवासिनी (सं० पु स्त्रो०) एक प्रकारका धान जिसको दुत समाना पड़ता। पोछे पूर्वी रूपसे यथाविधि दान सुगन्ध सिलसी होती है। करते हैं। (मत्स्यपु० ०१।०२ प.) तिलवतो (म त्रि०) तिलस्य व्रतमस्त्यस्य तिन-वत- तिलस्तुद (स• वि०) लिन तदसि-तह-खम् मम्। तिलको पनि । सिलवसधारी, जो तिलवतका अनुष्ठान पेरनेवाला, ली। करता है। तिलस्नेह (स'• पु. ) तिलस्य से तत्। तिलका तिलशकरी ( स्त्रो०) एक प्रकारको मिठाई.जो तिल तेल। और चौनोके मेलमे बनाई जाती है, तिलपपड़ी। तिनस्म (हि. पु० ) १ इन्द्रजाल, जादू । २ चमत्कार, करामात । सिलशम् ( म० अव्य० ) तिल तिन तत् परिमित करो. तिलस्मो (हि. वि. ) इन्द्रजाल सम्बन्धो, मादूका। तोति मनायं त्वात् वीप्सायां कारकार्थे शम्। धीरे धोरे, तिलहन : हि पु० ) एक प्रकारका पौधा । इसके बीजोंसे पाहिस्ते पहिस्त । सेल निकलता। तिलगानि (म० ए० स्त्रो०) धान्यविशेष, एक प्रकारका तिलहर-१ युक्तपदेशक शाहजहानपुर जिलेको एक सुगन्धित धान। तहसोल। यह पक्षा० २७.५१ से २८.१५ ७० पौर सिलशैल ( स. पु०) तिननिर्मितः शल: मध्यलो. देशा०८.२७ से ७५६ पू. में अवस्थित है। क्षेत्र. कर्मधाः । दान करने के लिये तिलकल्पित शैल। दानके फल ४१८ वर्ग मोल पोर लोकसंस्था प्रायः २५७०३५ है। लिए दश पर्वत कल्पित हुए हैं, उनमें से सिलचल एक इसमें तिलहर, खुदागंज और कटरा नामके तोन शहर है। तिलश लर्क दो भेद हैं, पहला पर्वतका तिलमय और ५५८ ग्राम लगते है। इस तहमोलमें रामगङ्गाके प्रधान मेरु, दूसग तिलश लके पश्चात् कल्पित तिलमय बनेसे यहांको मट्टी बहुत उपजाज हो गई है। . विष्क भगिरि। इस शैलदानका विधाम इस प्रकार २ उक्त तहसीलका एक शहर । यह पक्षा० २७५८ लिखा है- ७० पोर देशा० ७०४४ पू. शाहजहानपुरसे कोस अयन, विषुव, व्यनोपात, दिनचय, शुक्लाटतोया, पमा पश्चिममें अवस्थित । लोकसंख्या प्राय: १८० वस्या, विवाह. उत्सव, यज्ञ, हादशी, पुण्यदिन श्रादिमें है। किसी समय यह शहर चारों भोर टोको दोबारसे यह शलदान करना पड़ता है। यथाशास्त्र इस चैल- घिरा था, अभो उसका केवल मावशेष रह गया है। के दान करनसे मनुष्य सनातन विष्णुलोकको पात। सिपाही-विद्रोहके समय यहाँक सम्भ्रान्त मुसलमानगण दश द्रोण परिमित तिलका जोशल कल्पित होता है, विद्रोही हुए थे, सोसे उनकी सारो सम्पत्ति जबत कर वह उत्तम, पञ्च द्रोणका मध्यम पोर तोन द्रोणका प्रधम ली गई। अब यहाँ धनी मुसलमान बहुत थोड़े । माना गया है। यह शहर गुड्के व्यवसाय के लिए प्रसि । इस तरह यथाशक्ति १०.५ वा ३ द्रोण हारा पहले शंग्ल तिला (हि.प्र.) लिजालेप, वह तेल जो लिन्द्रिय पर बनाते हैं ; पोछे इस मन्यसे मामन्त्रण करना पड़ता है। उसको शिथिलता दूर करने के लिए.लगाया जाय। मन्त्र- 'यस्भान् मधु वध विष्णोर्देहस्वदसमुद्भवाः । मिनाक (Eि• स्त्रो०) स्त्री पुरुष के मम्बन्धका टूटना। ईसा- तिला कुलाश्च माषाश्च तस्माच्छनो भवत्विह ॥ इयो और मुसलमानों में यह प्रचलित है। वे अपनी विवा. हव्ये कन्ये च यस्माश्च तिला एवाभिरक्षणम । हिता स्त्रोसे एक विशेष नियमके अनुसार सम्बन्ध तोड़ भवादुर शलेन्द्र तिलाचल नमोऽस्तुते।" देते हैं । मम्बन्ध टूट जाने पर स्त्री और पुरुष दोनोको इस मन्बसे पामन्त्रण कर ब्राह्मणको दान करना चाहिये। पृथक पृथक विवाह करनेका अधिकार हो जाता है। रमसे विष्णु लोकको प्राप्ति होती है और पुनर्जन्म नहीं तिलाशितदल (सं० पु. ) निलवत् परितं सं यस्य, होता। तिलविकागिरि करनेमें इसो तिलपर्वतको बहुवा। तैसकन्द । Vol. Ix. 153