पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/६४

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टोरमल की मोहरों के मूल्य भी चार प्रकारके थे. जैसे - ४००) राजा टोडरमलेका चरित्र वन महत पोर उदार ३६०, ३५५, और ३५०, मन्थ । इस ममय तोन प्रकार. था। सबाट अकबर के समानुयायियाम टोडरमल हो के रुपये भी प्रवर्तित हुए जिनका मुख्य क्रमश: ४०. प्रधान गिने जाते थे। इनको कार्यदक्षता प्रभावमे ३८ और ३८, रखा गया था। पहले हिन्द मोहरिर अकबरी गल्यम बहुतसे सुनियम और मनाला स्थापित गजकोय हिसाब हिन्दी भाषामें निखा करते थे । टोडर- हुई यौं । मबाट के प्रधान मभासदोंमें पबुलफाजल और मलने नियम चलाया कि अबसे समस्त राजकार्य उर्दू मानसिक सरोखे राजा टोडरमलके नामसे कौन नहीं भाषामें लिखे जायगे। तभीसे वाध्य हो कर पर्योपरिचित है? वे अपने गुणसे चार हजार मैनापोंक पार्जनके लिए हिन्दूगण उर्दू भाषा मोखने लगे। अधिपति हो गये थे। राजस्व नियमके स्थापनके जैसा मुमन्नमान ऐतिहामिकोंने स्वीकार किया है -टोडर ये निपुण थे, वैमा इनका साहस भी प्रमीम था। मलसे हो उर्दू भाषाको बहुत छ उनति हुई है। अबुलफजल टोडरमल के बाहर विषो थे। किन्तु ___ एक क्षत्रिय बहुत दिनों से टोडरमन को अत्यन्त गा- जब वे सम्राट के मामने टोडरमलको शिकायत करते, दृष्टिमे देवता पा रहा था, यहां तक कि उसने एक तब सबाट उत्तर देते थे कि 'टोडरमल जैसे प्रभुभता बार इन्हें मार डालनेको भी चेष्टा की थी। १५८५ और विश्वासो व्यक्तिको कदापि पृयक नहीं कर सकते।' ईको एकदिन रात्रिकालमें उसने टोडरमल पर अस्त्रा- अन्तमें अबुलफजल भी राजा टोडरमलको कार्यदक्षता. घात किया। सोभाग्यवस उप पाघातसे टोडरमलका त्यवादिता और साहसको यथेष्ट प्रशसा करने लगे कोई विशेष पनिष्ट न हुआ। वह नराधम उमी ममय थे एवं धर्म सम्बन्धमे पन्धविश्वासी कह कर उनको पकड़ा गया और मार डाला गया। मिन्दा करते थे। युसफजाइयोको दमन करने के लिए गजा वीरबम्न राजा टोडरमल एक कटर निन्द, थे। वे प्रतिदिन भेजे गये थे। परन्तु थे उन्हें वशीभूत तो क्या करते पाप नियमितरूपमे बहुतसी देवमृत्तियोंको पर्चना करते खां उन लोगोंसे मार डाले गये। वोरवनको मृत्य को तथा पूजादि किये बिना किसो कार्य में हाथ महौं प्रतिहिसा लेने और युसुफजाप्यों को सम्म ण रूपमे डालते थे। मम्राट के माय पंजाब जाते समय एक वशीभूत करने के लिये टोडरमल प्रधान सेनापति मान- दिन जल्दी में उनको एक देवमूर्ति की गिर पड़ी। मिडके साथ १५८८ में भेजे गये। १५८० में हम कारण उन्होंने कई दिन तक उपवाम किया था, धे अकबर जब कानोरको पधारे थे, तब लाहोरको रक्षा• चिन्ताके मारे कुछ भो ग्वाते पोते नहीं थे। पन्त, का भार राजा टोडरमल हो पर मौंपा गया था। सम्राट ने अत्यन्त कष्टसे उनका मानसिक दुख दूर ससमय टोडरमल हो गये थे। तथा राज कीय कार्य के गुरुतर परिश्रमसे इनका शगैर क्रमशः पहले हिन्द गण कर दिये बिना किमी तरका दुर्घन होता आ रहा था। मौ लिए राजकार्य से छुट धर्मानुष्ठान नहीं कर सकते थे। अकबरने गजा काम पाकर धर्म चर्चाम जीवनका पवशिष्ट काल टोडरमलक प्रादेशमे उस कर तथा जिजिया कर सदा बिताने के लिए उन्होंने सम्राट से प्रार्थना की। लेकिन लिये उठा दिया। मबाट ने सम्मान तो दे दो, मगर बहुत अमिछासे। कर वसूल होनिका कोई निर्धारित नियम नहीं रह- टोरमल अब हरिहारमें रहते थे, तब मम्राट ने इन्हें मेमे प्रजा और जमींदार दोनों को अत्यन्त कष्ट झलना फिर बुला भेजा। टोडरको पानको तनिक भो पच्छा पड़ता था। राजा टोडरमलको सहायताले पशवरने जाषि- न थी, किन्तु सम्राट को पाला पालन करने के लिये ये विषय में नये नियम निकाले। प्राचीन पिन्दरोतिके पशु- पार्मको वाध्य हुए। जो कुछ हो, इन्होंने रिजरी सार पसाबर के राजस्व नियम बनाये गये थे। पहले में मातातीर पर प्रायत्याग किया। भूमिका परिमाय निर्णयबाद. नमोमो जितमी