पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/६४५

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सीपरी-सीवानुराग बाद पंगमानिक और उसमें नीचे गण। मोचे थाकके सौगन्धिका (म. मो.) बानो, पावायन । तोयरों को सच्चश्रेणोको कन्या लेनो पड़ता है। इसके तोचानो (स.वि.) तोवधान-पिनि । अत्यन्त जानो,. सिवा कन्या के पिताको अधिक रुपये न देने से इनका ब्याच बहुत प्रलमन्द । नहीं होता। इनमें विधवा-विवाह प्रचलित नहीं है। तोरवाला (म० श्रो.) सोन यथा तथा ज्यालयात हो, गरीब विधवाये अपनो इच्छासे मछलो बेचती हैं, ज्वल-णिच-पच टाप । धातको, धवका फल। लोग सूतको करधनो. बनातो है अयवा वैष्णवी हो भोख कहते है कि इसके छ ने में पाररमें घाव हो जाता है। मांग कर अपना गुजारा करतो है। (वि०) २ तोव्रज्यालायुक्त. जिममें बहुत जलन हो । तोवरो (स. स्त्री. तोवर स्त्रियां डोष। १ तोवरपलो. तोवा ज्याला कमंधा । तोव्रज्याला, तेज जलन । तोवरकी खो। २ व्याधपत्नो, व्याधको यो। सावता (म. स्त्रो०) तोवस्य भावः तोब-तल । उपता, तोत्र (सं.वि.) सोवरक वा तिज निशाने इन दोघः। . तीक्ष्णता, तेजो, तोखापन। (असावोवा । उण २ । २८ सूत्रे उग्ग्वल)१ प्रतिशय, अत्यन्त। सोवदार ( स'• को० ) तीव्र दारु कर्मधा । तोवकाठ, २ तोरण, तेज । ३ प्रत्य ष्ण बहुत गरम । ४ कटु, तज लकड़ी। कड, वा। ५ अतिशययुक्त, नितान्त, वेहद। 4 अमा, तोवन्ध (स.पु.) सोनः वन्धो यस्मात् बहुव्रो । तामस नसहने योग्य । ७ प्रचगड़ । ८ तोखा । ८ वेगयुक्ता, सेज। गुण, तमोगुण । (मो .) लौहभेद, इस्पात। ११ तार, नदोका तोत्रवेदना (ल. स्त्रो. ) सोव्र वेदना कम धा० । अत्यन्त किनारा। १२ बोपु, टोन। १३ लौहमात्र, माधारण यन्त्रणा, बहुत पोड़ा, ज्यादा तवालोफ़। ... लोहा । ( स० पु.) १४ शिव, महादेव । १५ वैराग्यका तोत्रम वेग ( स. पु. ) तोवः मवेगः कर्मधा। तोत्र उपायविशेष। (पातजल ११२१.२२) . वगग्य। तीव्र देखो। किसो किसो मनुष्यको तोव योगो कहते हैं । योग- तोवसन्ताप (म. पु.) श्येनपक्षों, बाज। साधनका उपाय तोन तरहका है. मदु, मध्य पोर पधि- सोव्रसव ( पु.) एमाह यागमेद, एक दिन में शेने- मात्र अर्थात् तोव । जो ये विविध उपाय अवलम्बन करते वाला एक प्रकारका यन्त्र । है, उन्हें यथेष्ट फल प्राप्त होता है। यह भो तोन प्रकार. तोवसुत ( स० वि०) सोमवा अवयवभूत प्रात:- का है, मदु उपाय, म य उपाय और तोव उपाय । फिर सवनिक । इसके तोन में है --मदुम वेग, मध्य मवेग और तोब. तावा (म' स्त्रो०) सोबटाप । १ कट रोहिणो, कटको। मंवेग । सुतरा योगियाँ क उपाय नौ प्रकारके हैं। जो साव- २ गगडदूर्वा, गाँडर दूब । ३ राजिका, राई। . ४ महा- संवेग है, उनको भिड्विमविकट है । पात व्यापभाष्य) ज्योतिष्मतो, बड़ो मालकंगना। ५ सरदीवर, तरवो. तोत्रमण्ड (म.पु.) तोत्रः कण्ठो यस्मात् बहुव्रो। का पेड़। । तुलसो। ७ नदोविशेष, एक नदोका शूरण फल, जमाकन्द, अोल । नाम। ८ षडज स्वरको चार श्रुतियाममे पहलो श्रुति । तोत्रकन्द ( स ० ५० ) तोवः कन्दः मूल यस्य । १ शूरण, मदकारिणी, खुरासानो अजवायन । (वि. १. तोत्र जमीकन्द । २ पन्नाण्ड, प्याज। वेगयुक्त, जिसमें बहुत तेज गति हो। तोगति (सं० वि०) तोता गतिय स्य बहुव्रो । १ जिमको तोवानन्द (म. पु.) तीव्र पानन्दो यस्य। शिव, चाल तेज हो । ( पु०) २ वायु, हवा। महादेव। तीनगन्ध (मो०) तोताः गन्धो यस्य। तोवगन्धयुक्त, तोवान्त वि. ) तीव्र या तीक्ष्य फल। वह पदार्थ जिसको गन्धं बहुत तेज हो। सोवानुराग (सं० पु. ) जैन-मतानुसार एक प्रकारका तोवगन्धा ( स्त्री०) तोवगन्ध टाप । यवामी, अतीचा। जैसे-परस्त्री या परपुरुषमे अत्यन्त अनुराग अजवायन। करना अथवा कामको पिके लिये अफीम, करत रो Vol. Ix. 159