पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/६४६

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तीस-तीसी आदि खाना। इससे स्वदार सन्तोष व्रतमें दूषण लगता है। है। रिब और ग्रोक-ग्रन्थों में तोसोके मूतेका २५१०० मोम (हि. वि. ) १ जो कतिसमे एक कम हो । (पु०) बार उल्लेख है। खोजलेण्डके हदनाला के निकट जो सब २ वह मख्या जो बीम और दशके योगमे बनी हो। प्राचीन स्त पाकार वामस्थान प्राविष्कत हुए हैं, उनमें तोमट (म पु०) एक वैद्यक:ग्रन्यकार। तोमोका पौधा आदि पाया गया है । उत्तर यूरोप में पार्मि- तीसरा (हि. वि०) १ जो दोके बाद पाता हो । २ मम्बन्ध मेने अन्यान्य प्रयोजनोय वृक्षों को नाई तोमोको खेतो रखनेवालों से भिन्न । प्रचलित को, किन्तु नरौवे और खोडनमें बारहवीं शता. तोमवा (हिं पु०) जो उसनोमके बाद आता हो, जिसके ब्दोमें इसका प्रचार हुआ है। पहले उनतोस और हो। जैनचन मामक यूरोपीय पगिडतने १८४८०में यह तोमो (हि. म्बी०) एक प्रकारका तेलहन-अनाज । भित्र प्रकाश किया कि तीमोके तोन भेद हैं-(१) Linum भित्रभाषामें इनके नाम इस प्रकार है- ucitatis innum (२) L. humili पोर ( ३ ) L. हिन्दी (भाषाम ) अन्नमो, तोमो । बङ्गाल-तोमो, :mgustilolium | हियर नामके एक मरे पगिरतने मसोना । विहार-तीसी, चिकना । उडीसा-पेश । युक्तपदेश- प्रमाण कर दिखला दिया है, कि उक्त ३य श्रेणीकी तोमो बिजरो। कमायन-तोमो, अन्नमी। काश्मीर-फियुन्, ही सबसे उत्कृष्ट है तथा प्रथम श्रेणीमें इमकी गिनतो प्रालिम । पञ्चाय-प्रानाश, तोमो, अन्तमो । कागधर-होतो है। इस प्रथम श्रेचौकी तोमो के फिर भी दो भेद जिधिर । बम्बई-अन्नमो, जरमा, जरम। गुजरात-अम्लमो। हैं,-(क) सामान्य ( alpha rulgar ) और हुमिम्नि तामिन (भाषामें ) अन्नमो विराए । नलगु (भाषा) (!ota humilji) इनमें से पहला भेद भारतवर्ष में और प्रातसो, उन , मन्न मदन-गिञ्जाल । कर्णाटक-अलसो, दूसरा पारस्यमें प्रचलित है। लाइनम अगिष्टिफोलियम अन्नामो। मलय-चेरू, चाना, वित्तिन्त, मिलता । तुर्की- ( L. augustifolium ) भूमध्यमागरके दोनों ओर गिग्गर । अरब-कत्तान वा बजरत कत्तान । पारस्य-जघ. पाय त्यप्रदेशमें जगनी अवस्थामें उपजता है। भिन्न जधिर, कुतान वा नवम कुतान । हिब्रु (भाषाम) पिस्ता। भिन्न मल भाषामें इसका नाम जिस तरह स्वप्रधान है, मस्कृत (भाषा) अतमी, उमा, क्षमा, मालिका, ममृणो, उमसे जाना जाता है, कि विभित्र देशों में विभिन्न जाति शगा । लाटिन (भाषाम, नारनम् । गनगड-लिनसोड। हारा यह प्राचीनकालसे प्रचलित है। केलाटक (भाषामै ) मिन। भारतमें भी तीसोका प्रचार बहुत पहलेसे है। आजकल इमका वैज्ञानिक नाम Linum usitatissimum म देशमें तोसोके बोज और तेल के सिवा उसके सूत का है। तोमोसे तोमोका बोज, सेम्न और खुरो बनतो है। व्यवहार नहीं है, किन्तु पहले था । मस्कृत शास्त्रमें नौम- किन्तु यूरोप और अमेरिकामें इमके पौधेमे सन सरोग्या वसका यथेष्ट व्यवहार देखा जाता है। बहुतेरे एक प्रकारका सूत प्रस्तुत होता है जो लिनेन (Lincn) सोमवस्त्रका अर्थ रेशमी वस्त्र लगाते हैं। किन्तु वह वा विनायतो साटिन नाममे इस देश में प्रसिद्ध है। यरो नहीं है। क्योकि तोमोका एक नाम जब 'पा' पोय पगिडतों का कहना है, कि यगेपमें पार्य लोगों की है तब उसमे प्रस्तुत वस्त्रको है: क्षोम वस्त्र करते विस्कृतिक ममय तोमीका व्यवहार प्रचलित हुआ था। है। चोनमें चुमा नामको एक प्रकारको पास होतो है मित्रके प्राचीन ममाधि-मन्दिरको दोवार में जो अशित उसके रेशे या सूतैसे एक प्रकारका वस्त्र प्रस्तुत होता है, छवि हैं, उनमें तोमोके पौधेसे सूता तैयार कर कपड़ा जो देखने में ठीक रेशमी मा मालम पड़ता है और रेशमो बुननेके सब काम प्रच्छो तरह चित्रित है। प्राचीन नाममे प्रचलित भो हो गया है। इससे अनुमान किया मिस्रवामियों का ममाधिवम्ब इमो सोसोके मूर्तमे बनता जाता है कि क्षोम वस्त्र भी इसी प्रकार रेशमी वस्त्र था। ईमा जम्पर्क २३ शताद पहले मिस्र में तोसोके कहलाता है। मनुमहिलामें लिका, कि वश्य लोग सूलेका व्यवहार हर एकको मालूम था, यह प्रमाणित क्षोम्य सूत्रका उपवीत धारण करते थे।