पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/६५

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गेवर कवि-टोग फसल उत्पब मी, उसके मूखका तीसरा भाग गजकर अपर से कर नको "नोबाटसार" नामक बन्यो रिली निर्धारित पापाले पहल प्रति वर्ष भूमिका परिमाण टोका रचने लिए वा किया था. दीवाम अमरबन्दने निषय करने का रूपसे कर वसूल होने लगा। किन्तु इनको र तसे निचितार दिया था । अगदर्शन इसमें प्रजाको बहुत बार होता था; इसलिये पसमें दश बेपसाधारण विज्ञानी । रान प्रधान जैन मन्त्र गोबर- वर्षके लिये प्रजाके साथ जमोन ब दोवस्त कर दो गई। माको विस्तात टोकारवो... जो भी उसी .. राजा टोडरमलको बहुत प्रयनसे इस तरहका नियम इसको पृष्ठसंख्या लगभम .....। इसके साथ ही खापन करना पड़ा था। इस नियम प्रजाको यथेष्ट सब्धिसार पसारको टोका रो, जिसको शोक सुविधा होतो थो। वान्देशके प्रायः सभी सापकों के मामले मंख्या ४५ हजार है। अन्योंमें जोष पोर कर्मसिधान्त. राजा टोडरमल का नाम परिचित है। राजस्व के धन्दो- का विस्वत विवेचन है। इनका दूसरा पर पिसीव- वस्त के लिये ही उनका नाम चिरस्मरणीय है। वे क्षत्रिय- सारवनिका है. इसमें जैनमत के अनुसार भूगोल पोर कुलके थे। कोई कोई भूलसे इन्हें पंजाबो कहा करते गोलका वर्णन है। इसको बोकसंखा लगभग ११२ है. किन्तु अयोध्या में उनका पूर्ववास था। हजार होगी। तोमरा पन्य गुण भद्रवामित संसात उन्होंने परमो भाषामें भागवतपुराण अनुवाद किया पात्मानुशासनको वनिका ( स्वतंत्र टोका)। इसमें था। नोति सम्बन्धमें भी इनको बहुतमो कविताएँ बहत हो जदयपाहो पाध्यामिक उपदेश व दो पन्य देखने में पाती है। अधुर है-१ पुरुषार्थ सिहा पाय हिन्दी वनिका चौर २ राजा टोडरमलका नाम कोई कोई 'सोदरमल' लिखा मोक्षमार्ग-प्रकाशक । इनमे से पहले पबको तो पखित करते हैं। लेकिन टोडरानन्द नामक मस्त अन्वमें दौलतरामकाथलीवालने पूर्ण किया था, परन्तु दूसरा 'टोडरमा नाम देखा जाता है। टोडरमलन इस अन्य मोक्षमार्ग प्रयापक पूरा हो ।यापन पका शहद मस्त ग्रन्थको रचना को है। यह अन्य तीन १, पृष्ठ ..। यह पन्य उनका विवाह सतना। खण्डीमें विभक्त है-धर्मशास्त्र, ज्योतिष और वैद्यक। इसके पढ़नेसे मालम होना है कि यदि टोडरमल धर्मशास्त्रखण्ड भो फिर पाचार. काल और व्यवहारः बहावस्या तक जौते, तो जैनसाहित्यको पनिक पर्व निर्णय रन शाखाओं में विभक्त । रनोंसे पसरत कर जाते। एमके पन्बोको भाषा जयपरक १ मबाट थाहजहानके एक सभासद । उस समय ये बने हुए तमाम पन्योंसे सरसा, एज और साफालौने बहुत प्रसिद्ध थे। प्रन्योंकि मङ्गलाचरण पादिमें जो अपने पा दिये , उन टोडरमल पखित-दिगम्बर जैन सम्प्रदायक सुप्रसिद। से माल म होता है कि पाप कविता भी पशो बना विहान पौर अन्यकार। उनको जाति आई लवाल जैन सकते थे। और निवासस्थान जयपुर था। ये वि० सं० १८२४ तक टोडा (हि.पु. ) दोबारमें गड़ी डी टी जो बढ़ोतरी विद्यमान थे। केवल १२ हो वर्षको अवखामें ये इतना शजनको सहारा देने के लिये लगाया जाता है, टोटा। काम कर गये थे कि, सुन कर पाचर्य होता है। इनको टोडा-नोलगिरिको एक पार्वत्य प्राति। ये छ र रचनासे जैन समाजका तत्वधानका का एषा प्रबार सौंगवालो भैम पाली पोर बम धसे अपनी गुजर पुनः प्रवाहित होने लगा है। जहाँ कम सिधान्तको चर्चा करते। भोपनको सम्पत्ति वा जायदाद । करना कंवल सात वा पालतके विधामोंके हिस्से में था, इनको रहन-सहन माधारण मिसानोको भाँति है, पर वीपापकी पारी साधारण हिन्दी जानीवाले लोग ये खेतीवारो वरनमें अपना अपमान समझाते । . भी कमतली विहान बनने लगे। सुना जाता है किनकी खियोंका देनिया,वार्य तेल नमको रसोई जयपुर रायके दोबाम पमरचन्दने हमकी प्रवरचना- बनाना पोर केप-विन्यास करना है। यरोपियोंने पा चोदेखकर बनके परिवारवर्ग निर्वाहका भार अपने पर इनमें व्यभिचारका प्रसार किया जैसा कि . Vol. 1x. 16