पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/६५७

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N TI पर भो थासाका मर्म साधारण बीए थे, परन एक सय साथ मो निकट प्रचार करते थे जो किमो किसीको प्रमाणातकारामके साथ शिवानीमा सामान पोर सम्मिला मालूम पड़ने लगा। मन्वागीको माई रामेश्वरम ये दोनों समले जीवनका एक एक विशेष परियोग्य नामक एकात्रण तुकारामके अपर पत्याचार करने पटना। शिवाजो तुकाराममोपूना सामोलिये लगे। रामशर राजमाग्य मात्र पण्डित कापर परि• सम्बमस्थ , पंचपोर एक बार मिश, विन्तु चित। मोने पामाधिकारीले सममा पार कहा कि तुकाराम सम्पत्तिको विषक समान मानी कावना पाराम गृहोकर भूतिया मर्म प्रवास करत । को ना धारपानका उनकी तनिक भोजन अब प्रामाविकारोको माल म मा कि तुकाराम-सब हुई। सोने शिवाजी के लिये पर एकपमा स्वना धर्मकर्मको उत्पाटिस पर नाम महिमा प्रचार पोर कर शारकुमको विदा किया । विन्त शिवाजी तुपासम.. भतिपय सामने बड़ा काररीतब उन्होंने का. कापमा और गुब सुनकर एकदम मोति ने ठे रामको निर्वासनका पादेश प्रदान किया। नकाराम इसलिखिर समझे। शिवाजी रामपदको विषम विपदम पर गये। अन्तम उन्होंने सोच समझकर तुकारामको पर्णकुटी पर मथे। उन्होंने ममय रामियरका भरवापर होनस विपरमार तुकारामको प्रभूत सर्व मुद्रा प्रदान को परत मा. हो सकता, या सोचकर माने रामसरवी शरण सामने विवालो-प्रदत्त प्रभूत स्व रागिनीपोष्टि लो। रामेहर पत्यात गर्वित थे, सोने इसका विष• कभी नाली बोर सिवानीमबहा,- " मराज! गेत फरा । रामेश्वरने कहा तुम जो समस्त परिवी निवाट प्रतिमा घोर सुवर्ण मु भी पभाकी रचना की है, उसी प्रतिया पर्व' प्रकाशित पावनी, सीवस मोहोर पाया बढ़ती कोता है, इस कारण तुम उस पभाको पन्द्रायणीक यस यथायी पलीकनीय बासन- जलम केक डालो। पसावर्ती शिवाजी तामसि पुटसे सामान घे, वामपकी वाचा परिहार्य समभावर तुपावाम उधर प्रभूत स्वसवासा ढेर लगा था। मिलो अपनेदय धन सम पभाको पन्द्रावणी मनमक उनको निष्पलता सबर विल सिनेमपौर अपने राजपाको तय समय पर इस संबासीवी तकाराम रस काम पर बहुत ही साबित हुए और ममताको ही अधिक मानने लगे। उन्होंने सबकार्य में मानस परित्याग कर विडोवाक चरणम अनवरत धान प्रबहलाकर तबारामने कौतन पोर धर्माम जोवन करने ममे। सतसे तरह दिन यतोस हो गये। ज्यतोतं करनेका ह साल कर लिया; बाद ता. पन्त, विवाने खा दिया 'मैने उस पभाको रक्षा रामने उन्हें उपदेश देकर पूना गारमें भेज दिया। इस की है, तुम उसे उबार करो।' ग्रामके लोगोंने उस तर तुकारामको प्रतिपत्ति चोर शिखा दिन दुनो कविताको सहार कर सुकाममको प्रस्थय किया। और रात चौगुनो बढ़ने लगी। सब कोई मारामको तुकाराम म उपसलमे ७ पभाकी स्चना की। बाद देवावतार पौर देवाराशीत पुरुष समम कार पर्चना रामेश्वर भी उनकी एक प्रधान मिचो हो गये थे। करने लगे। इस समय तुकाराम सर्वदा वही थे, इस समय बाइबल मानव और भलिवलसे महा- 'प्रभो ! अब मुभी बखण्ड से चलिये। . गदेव पपूर्व मोरवमें गौरवान्वित हो गया था। बार- फाला नो दोलपूर्षि मा यहा बनेका पारमा बसके पवताराच्य शिवाजो, तथा मानवसके अवतार कुलित पामोद-प्रमोद हुपा करता कम भार तुका- गमदाम खामोथे, पर भविलम काराम महाराज, रामने होला रस कुत्सित पामोदको बन्दकर रि- देशमें गो सानोय ने गये थे। तबारा शिवाजी कीर्तनको उमा साथ प्रचार किया। इस रात्रिम सका रामबाब-लामो बसमा समर्म बाविभूत हो जाने २४ घमाकी रचना को, जो "काय कर Tol. Ix. 162