पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/६५९

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तुकोबीसमोलकर तकोलो अपने उच्चपदके निदर्शनस्वरूप खेसात पार्मिके मान समरमें भेजे गये। इस समय नाजिब उहोला एक लिए महाराष्ट्र राजधानीको पोर अगर इए। पूनामें प्रधान मुमलमान सर्दार थे। पहले महाराष्ट्राने १७७० तुकोजीने यथेष्ट सम्मान लाम किया। में उन्होंके अधिकत नाजियाबाददुर्ग पर पाक्रमब सनले समय में गङ्गाधरने प्रधान मन्त्रित्व प्राप्त किया। किया। नाजिव खाके साथ मलबारराव होलकरकी होलकर राज्य में इनका भी यथेष्ट भादर था। पाल्या. मित्रता घो। तुकोजो उसो सबसे उनके साथ कथा वार्ता वाईन सेनापतित्वक भिवा शोघ्र ही तुकोजीको 'होलकर' करने लगेः किन्तु इस पर माधोजो सिन्धिया पवन चोढ़ पथवा राज-सम्धम-सूचक उपाधि प्रदान को। पाल्या. कर बोले, 'हम लोग प्रतिशोध लेने के लिए पाकि वाईने कोशलक्रामसे यह सम्मान प्रदान किया था, सन्धि स्थापन करने के लिए। मैं अपने भाई पोर भतीज- जिससे कि कोई भी उनके साथ प्रसन्तोष प्रकाश करन के शोपितका प्रतिशोध क्यों न लू तुकोजी मुसलमान सके। तुकोजीने निर्विवादसे २० वर्ष तक यह सच. उमराहके माय भावभाव स्थापन कर रहे हैं। पूनामें सम्मान भोग किया था। इतने दिनों में अहल्यावाईक पेशाको सम्बाद देना चाहिए। हम लोग उनके गुणसे एक दिनके लिए भी राज्य में कोई विघ्न न हुपा। केवल प्रादेशाही हैं। उनके आदेशानुसार हो काम अहल्याबाईने जो उपकार किया था, उमे तुकोजो। करेंगे।" किन्तु तुकोजोने मिन्धियाका प्रस्ताव पाच एक दिन के लिए भो विस्मृत न हुए। माल्यावाईसे नहीं किया। जिनको उन्होंने एक बार वचन दे दिया अधिक उमर होने पर भी वे उन्हें माटसम्बोधन करते है, उनके विरुद्ध किमी प्रकारको कारवाई करने के थे, किन्तु अहल्यावाईक अभिप्रायमे उनको मुद्राम 'मन्न- सहमत न हुए। उन्होंने नाजिव नहोला के साथ पूर्व हारगोलकरके पुत्र तकीजो' अस्तिथो। मित्रताको रक्षा की। इससे महाराष्ट्रोको पमिक सुविधा तुकोनीने होलकर उपाधि ग्रहण करने के बाद बारह । हुई। वे जाट और गजपूत राम्धमें बहुत स टमार वर्ष तक मसैन्य दक्षिण देशमें वास किया। इस समय और कर वसूल करने लगे। मातपुरा गिरिमालाका दक्षिणांश उनके अधीन तथा उक्त- नाजिव उद्दौला तु काजोको उदार प्रतिसे पत्यन्त राध अहस्यावाई के शासनाधीन था। जब वे हिन्दुस्थान- पालट हुए थे। यहां तक कि वे मृत्यु के पहले अपने में थे, तब वे गजपूताने और बुन्देलखण्डके अन्तर्गत प्रियपुत्र अविता खाँको तु कोजोंके हाथ समर्पण कर देशोंसे स्वय; कर वसुल करते थे। वे सर्वदा.दूर देशमें गये थे। वे जानते थे कि उनको मृत्यु के बाद महाराष्ट्रों- रह कर अपनो पच्छानुमार कार्य करते थे सही, किन्तु के करालकवलसे त कोजोके सिवा दूसरा कोई भी उनके हल्यावाईके निकट कार्य विवरणो नियमित भेजा परिवारवर्गोको रक्षा नहीं कर सकते। . करते तथा उनके मन्त्रणानुसार कार्य करते थे। यथार्थ में उनको मृत्व के बाद महाराष्ट्रो ने हिन्दु सचमुच अहल्यावाई जितने दिन बची थौं, उतने दिन स्थानका अधिकांश पपने दखलमें कर लिया। इस समय राजपद पा कर भी तुकोजो केवल प्रधान सेनापति और सिन्धिया हिन्दुस्थानमें सनसे बढ़े-चढ़े थे। तुकोजी अपने निकटवर्ती स्थानके राजस्व-मादायकारो कम चारो मच्योगीको उबतिसे सन्तुष्ट थे सहो, किन्तु उनके को नाई काम करते थे। ऐसे मत और ऐमो उच्च- अधीन मामन्तको नाई कार्य करनेमें प्रस्तुत नहीं थे। प्रकति के मनुष्य होलकरराज्यमें कभी नहीं देखे गये। इसलिये वे लौट कर मानवको चले आये। । वे जैसे प्रभुभक्त थे येमे हो मित्रप्रिय भो थे। कुछ दिनके बाद पेशवा मधुरावको मृत्यु, तथा राघव पानोपथकी लड़ाई के बाद मुमनमान-राज्य ध्वंस करके कत्त, क पेशवाके कनिष्ठ भाई नारायणरावको मृत्यु प्रतिशोध लेने के लिए महाराष्ट्र-वीरोंकी इच्छा पूरी हुई। होने पर महाराष्ट्र-सामन्तगण दाक्षिणात्यमें प्रा पहुंचे। उस समय तकोजी पूना जा कर पेशवा निकट रहते हत्याकागेके विरुद्ध इस समय 'बार भार' नामक महा. थे। पेशाके पादेशले रामचन्द्र गर्षिशके साथ वे मुसल- राष्ट्र-सरोंने एक दल मगठित किया था। माधोली