पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/६६

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डा जे गर्ट कहते १-"टोडा जाति दिनोदिन दुर्वल नामकी चार भाखाएं हैं। कोई भी पीजी मारमेर. होतो जाती है, जिमका कारण य रोपौयों हारा प्रवर्तित हलके पास नहीं जा सकतो; किन्तु तारजाल कुमित व्याधि और अमिसपान प्रथा है।" सबमुख ही स्त्रियाँ पोकियों के पास जा सकती है। प्रथम रजोदर्शन बरिनं गतके मस्यग मे इम जातिको उपदंश रोगने घेर होने बाद बालिकापों का एक बलिष्ठ पुरुषले संयोग लिया है। बहुतोका कहना है, कि टोडारमणियोका कराया जाता है। चरित्र अत्यन्त होन है ; परन्तु यह बात य गेपियोंके इनमें एक स्त्रो कई पति ग्रहण कर सकती है। एक पावासस्थान के निकटवर्ती ग्रामोंमे ही पाई जाती है, भाईको खोके साथ अन्य भाई भी सहवास किया करते मन नहीं। है। सन्तानका कोन पिता है, इस बातका निर्णय ___ वर्तमान समय में टोडा लोग तामिल भाषा बोलते बड़ा कौतुकावा है। गर्भ के माम माममें एक उत्सव हैं। कोई कोई तामिल भाषा लिख भो मकते है। टोडा होता है, इसमें जो पशि गर्भ वसोके हाथमे एक विम पुरुष साधारणतः टेक, ऊँची नाकवाले और मझोले धनुर्वाण देता है, वहो गर्भस्थ सन्तानका पिता ममझा कदके होते हैं। ये लोग लोहेकी गरम सौं कसे कन्धे पर जाता है। साधारणतः बड़ा भाई हो धनुर्वाण देता है। नाना प्रकारके चिक बनाते हैं। इनका विश्वास है कि जब तक सब भाई एक साथ रहते हैं, तब तक सभो ऐसा करनेसे महिष दोहनकार्य पछी तरह किया जा भाई बालकके पिटत्वका दावा रखते है ; किन्तु जब एक सकता है। गर्भवती स्त्रियाँ पांच मासमें हाथको को ही स्त्रोके स्वामिगण विभिन्न वशीय हो जाते है, तब घर चित्र करती है । टोडा म्बियाका मौन्दर्य बहुत थोडे धनुर्वाण प्रदान करनेवाला शशि सिफ गर्भस्थ शिशुका दिन रहता है। इसीलिए स्त्रियों की अपेक्षा पुरुष अधिक- हो नहीं बल्कि उसके बाद जितने भी बच्चे होंग, सबका तर सुन्दर होते है। स्त्री-पुरुष सब मफेद कपड़े पहनते पिता माना जाता है। यदि समयान्तरमै अन्य कोई है। ऋतुमती स्त्रियों के शरीर पर एक प्रकारका चित्र वाक्ति गर्भिणोको धनुर्वागा प्रदान कर, तो वह वाग्नि रहता है। पिता समझा जायगा । टोडोंमें पब भी पुरुषों को अपेक्षा टोडापीके वासस्थानका नाम 'माण्ड । माडम स्त्रियों की संख्या कम है। इसलिए बहुतों का अनुमान छोटो छोटो मिट्टीकी कटीर और गोशालाएँ रहता है कि ये लोग कन्याओं को सोबरम का मार डालते हैं। डा. रिभर्सका अनुमान है कि टोडा मलवारकी किसी जिस तरह दो भाई मिल कर एक खोके साथ विवाह जातिकोत्राखा हो सकती है। परन सपनमानको कर सकते है, उसो तरह चाहें तो वे बहुतमो स्त्रियोका कोई भित्ति नहीं। भो पाणिग्रहण कर मकते हैं। . . ये लोग महिषदलके साथ ग्रामसे ग्रामान्तरमें भमण . इनका नाच बड़े अद्भुत ढंगका है। खिया नाच किया करते हैं। एक ग्रामको शस्व-सम्मद जब निबट शामिल नहीं होती। सात पाठ पुरुष एक दूमरेका जाती है, तब इन्हें दूसरे ग्राममें जाना पड़ता है। महिः हाथ पकड़े हुए गोल हो कर खड़े हो जाते है और फिर षादि मम्पत्तिके ऊपर इनका निजस्व खत्व है। किन्तु “ो-हाज" "पो-हाज" का कर चित्रात पौर जमीन तमाम ग्रामवासियों के अधीन होतो है, किसो एक सब एक साथ तालसे पैर पटकते हुए घूमा करते हैं। व्यक्तिको नहीं। जमीनको कोई बच भी नहीं सकता। यह नका भानन्दोत्सव नहीं, बल्कि मृत्व मब। टोडा लोग सामाजिक हिसाबसे दो भागों में विभक्त किमोके मरने पर ये मत व्यक्तिको ले कर एक गाँवसे - एक देवलया पोर दूसरे ताग्मेरजाल । रन दोनों दूसरे गाँव जाते हैं और प्रोक पाममें अपर लिखे श्रेणियों में परस्पर विवाह नहीं होता। पहली बीमे पनुसार मुरदेको घेर कर ईशारका नाम लेते हैं। ग्राम कीमोग हैं, जो ब्राह्मणों के ममान समझे जाते.है। को प्रदक्षिणा समान होने पर मुरदा. मोकी लाया जाता और दूसरी अगोमे वेकान, कुडाम, केन और टोड़ी है और सम्म ण तेजस प्रकारादिवे ..साथ घर की