पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/६६०

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तुकोजीराव होलकर तुमेश्वरी पहार मिन्धिया और तुकोजोने रस दसमें योग दिया था । सोम फरासोसो सेनापति पदातिक दलले पराजित एए । अब वटियगवण्ड में साथ तुकोजोको युद्ध करना पड़ा था। सिन्धियाको मेना भागने लगो, तब तशोजोको विनामोंने · नारायणरावकी मृत्यु के बाद मधुराव मामक उन्ह' रन्दौर तक उनका पीछा किया किन्तु मालवी मध्य. एक पुत्र उत्पन्न हुमा । सारों ने उसो मधुगवको पेगवा. सिन्धियाको कोई क्षति हुई। इस खुम सिन्धिया को पद पर नियुक्त किया, किन्तु प्रक्षत-क्षमता बालाजो पोर होलकरमा छ मो खार्थ न था। दोनों इसके अनादं न ाथ रहो। इतिहासमै ये नानाफड़नवोपके मर्दारों को सर्दा प्रकाय करना हो उहेश था। नामसे विख्यात है। राधाके विवह जो मैन्यदन संग- तुकोजी मालवमें कई एक मास रहे। इस समय ठित हुआ था, उसमें ननाटनने यथेष्ट कार्य किया था। बहुत दिनों मे सहास्थित निजामपलो बाँके विवा युद्ध . २७७में कमेन पापटन भो मध्यस्थतासे दोनों दसमें करने के लिये पूनामें सर्दारगण एकाव हो रहे थे, उन्होंने सन्धि हो गई। विन्त वह मन्धि कायम न रहो। पन्त, तुकोजोको बुलाया। १७६५ में यह लड़ाई हिड़ी । सालबाई नामक स्थानमें दूमरी बार सन्धि स्थापन को गई इस समय तुकोजोको उन्म • वर्ष की थी। माधोजो. इससे खुदकुछ कालके लिए शान्त रहा। सिन्धियाके मरने पर, ये सबसे प्राचीन सर का कर पूना गवर्मण्टने निजामको सहायतासे टिपु सुलतानके | सम्मानित होते थे, शिन्तु दौलतराव सिन्धियाको क्षमता विवा जो युद्ध किया था, उसमें तुकोगोने प्रधान कार्य का हो सबसे अधिक थी। निजामको पराजित करने के भार लिया था। दूमरे वर्ष उन्होंने महबर पहुँच कर लिये जितनी लड़ाइयाँ दुई, उनमें होलकरने प्रक्षत पायावाई माथ मुलाकात की पोर सोसे सब गह- पक्षमें सिन्धियाको केवल परामर्थ दाममें सहायता को, बड़ी मिट गई। . विशेष कार्य में कुछ भी नहीं। इस युपके समान होने के प्रथम बाजोरावके औरस पोर एक मुसलमानः पहले ही सुकोजोको मृत्य हुई। ये वोर पुरुष, समर• रमणोके गर्भ से पलो बहादुर नामक एक पुत्र सत्यव कुशल पोर जतन्त्र थे। सवतिके पथ पर अग्रसर होते एषा । बुन्देलखण्ड के अधिकांश पलो बहादुरका पधि- हुए मृत्युपर्यन्त पहल्यावाई के निकट जैसे वाध्य, वशी- कार तथा समस्त भारतवर्ष में माधोजी सिन्धियाका भूत और छातच थे. उसके लिये सौ मुखसे. उनको प्रशंसा पधिकार फैलाने के लिये महाराष्ट्रनि यथेष्ट चेष्टा को, करनी चाहिये। इस विषयमें योग देने के लिये तुकोजो तैयार हुए, जिन्तु तुझड़(हि.पु.) वह जो भहो कविता बनाता हो। तुमोजो, माधोजो मिश्धियाके प्रति सहायता करनेम तुबन (फा खो.) मोटोडोर पर उड़ाई जानेको एक सहमत न एए । सो सूचसे लड़ाई छिड़ो, किन्तु इसमें प्रकारको बड़ी पता। तुकोजीने कोई उपकार न पाया। पन्तम हिन्दुस्थानके मुका (फा• पु०) १ बिना गांसोका तोर । २ जुद्रपर्वत, गन्यमें होलकर पौर सिन्धियाका बराबर बराबर पंशं छोटो पहाड़ो, टोना।। सोधी खड़ो वख । सोजत हुपा रणजी सिन्धिया पौर मलहारराव होल- खरी यहाड-पासाम मध्य बालपाड़ा जिलेका एक करके देन-लेनमें जो गड़बड़ी थो वह इस समय मिट पहाइरसके शिखर पर बिजनोके किसी एक राजामे गई ऋण परियोधके लिये कई एक जिला तुकोजोको बना पा एक सुन्दर प्राचीन मन्दिर , जिसमें दुर्गा- देने पड़े। किन्तु माधोजोक मावल्यसे सु कोजोमे कोई देवोकी मूर्ति प्रतिष्ठित है। मन्दिर अत्यन्त सुदृश्य विशेष लाभ प्रानन किया। माधोजो इस समय । कारकार्य विशिष्ट है। इसको गठन प्रणाली में यथेष्ट पूनाक दरबारमै अपनो प्रभुता स्थापन करने के लिये जब कौशल देखे जाता यहां भिव भिव स्थानके मन्यामो उपखित एए तब तकोजी सर्दारों के माथ विवादमें चित्र और यात्री पातपर्वत केवल सन्यासियोंका वास. हो गये। १७८२ ई० में सिन्धियाके प्रतिनिधि लुबादादा स्थान है। संन्यासियोंमिने एक राणाकी पौर संन्यासी. साथिरी गित साटमें तुकोजीके जि-बयन नामक नियमले एक रानीको पापण करती है।